बेईज्जति और बवाल: दिल्ली के मालिक केजरीवाल और सिंगापुर

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दिल्ली को सिंगापुर बना देंगे जी, दिल्ली को 10 सिंगापुर बना देंगें। दिल्ली सिंगापुर तो बनी नही लेकिन सिंगापुर वालों नें दिल्ली की बेईज्जति जरूर कर दी है। सिंगापुर में दिल्ली वालों के कारण बेईज्जति जरुर होना पड़ा है। सिंगापुर से ज्यादा खतरनाक है दिल्ली का यह स्ट्रेन।

भयावह महामारी के इस समय में यह तो उम्मीद किया ही जा सकता था कि नेता अपनी राजनीतिक को छोड़कर अपना समय देश के नागरिकों को आपदा से बचायेंगे, और वेवजह होने वाली तूृ-तू मै-मै से होने वाले विवाद से बचेंगे। लेकिन यह तो भारत के बदनसीबी है कि इस आपदा में भी नेता अवसर की तलाश मे लगे है। एक चुने हुए सरकार को कैसे गिराया जाए इसके लिए लाश तक गिराने कोशिश की गयी है .यह कहना सही होगा की इनकी तू-तू मै मै से लाखों लोगों के जान चली गयी है। जिसका जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ विवादित ब्यान देने वाले नेता है। एक तरफ जहाँ सरकार आम आदमी को कैसे बचाया जाय इसके लिए टुल-किट बना रही है तो दूसरी तरफ विपक्ष के गिरती राजनीतिक वर्तमान सरकार को हटाने के लिए टुल किट बना रही है। जो बात अब तक देश के अन्दर भी वह टुल किट आन्दोलन अब देश के बाहर विदेशों तक अपनी पहुँच बना ली है। पहले सिफारिश के जरिये और अब बदनाम करके।

दिल्ली के मालिक अरविन्द केजरीवाल, बेईज्जति और बवाल का चोली दामन का रिस्ता है। यह पहली बार नही है जब उनके ब्यान को लेकर बवाल हुई हो। लेकिन यह पहली बार है उनके कारण भारत को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी झेलनी पड़ी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री के द्वारा दिये गये गैर-जिम्मेदाराना ब्यान के लिए विदेश मंत्रालय को तलब किया गया। लेकिन दिल्ली के शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया ने केजरीवाल जी का बचाव ऐसे ही किया है जैसे घर की औरते अक्सर अपने घर के पुरुष के बेज्जति होने के बाद दिलाशा दिलाती है, और पड़ोसी के बच्चो पर सवाल उठाती है।

कोरोना वायरस को लेकर दिये ब्यान जिसमे केजरीवाल ने तीसरी लहर का जिक्र किया और इसके सिंगापुर का स्ट्रेन बता दिया। ये कहते हुए कि तीसरी लहर बच्चों पर असर करने वाली है जो कि बहुत खतरनाक है, भारत सरकार को तुरंत ही सिंगापुर से सारे फ्लाईट केंसिल कर देनी चाहिए। बच्चों का टीकाकरण तेजी से हो।

इसका मतलब तो यह भी समझा जाना चाहिए कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल अन्तर्राष्ट्रीय साजिश के हिस्सा है। उस साजिश के तहत ही भारत को बदनाम करने और ड्रग्स माफिया से जल्दी से जल्दी टीका खरीदने पर जोर दे रहे है क्योंकि भारत में अभी तक बच्चों के लिए टीका नही बना है लेकिन उम्मीद है कि सितंबर तक यहाँ पर भी टीका बना लिया जायेगा। तीसरी लहर सिर्फ कांग्रेस और केजरीवाल के टुल कीट मे शामिल है।

हालांकि केजरीवाल के ब्यान को भारतीय विदेश मंत्रालय नें यह कहकर स्पष्ट कर दिया कि यह भारत के अधिकारिक पक्ष नही है। इससे पहले कोरोना वायरस के नया स्ट्रेन को भारतीय स्ट्रेन कहकर भारत सरकार को भारत कुर्सीजीवी नेताओ ने बदनाम किया और जब यह सफल नही रहा तो अब दूसरे देशों को बदनाम कर रहे है। जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साफ तौर पर किसी देश का नाम लेने से मना किया हुआ है।

चुकि महामारी और इससे जुड़े कुछ पहलू मूलत: राजनीतिक नही वेज्ञानिक है, इसलिए इसको इसी नजरिये से विचार करना जरूरी होगा।

पहला मुद्दा यह है कि सिंगापुर में जो कोरोना मरीज मिल रहे है, उनमे वही वायरस देखने कों मिला है जो कि इन दिनों में भारत के मरीजों में दिख रहे है। सिंगापुर में कोईन नया स्ट्रेन देखने को नही मिला है।

दिल्ली के मालिक केजरीवाल ने जिस खबर को मुद्दा बनाकर ब्यान दिया है, या जिसकों आधार बनाया है, उसके अनुसार पिछले दिनों सिंगापुल में कुच बच्चों में संक्रमण देखने को मिला था जिसके चलते स्कूल बंद कर दिया गया था

सिंगापुर में अब भी संक्रमित मरीजों की संख्या अपेक्षाकृत बहुत कम है, और ताजा लहर में सिर्फ 30-40 लोगों के बीमार होने की खबर है, जिनमें 4-5 बच्चे है। वे सभी बच्चे एक साथ किसी टयूशन सेंटर में जाते थे। इन सभी बच्चों में मामूली लक्षण दिखा था।

आपको बता दे कि सिंगापुर सरकार हमेशा से कुछ सख्त रहा है और कोरोना के खिलाफ काफी सख्ती बरती है। शायद यही कारण है कि हमारे देश के धरनाजीवी और बेईज्जति और बवाल से रिस्ते रखने वाले दिल्ली के मालिक को कुछ ज्यादा सख्त ले लिया। बता दे कि सिंगापुर में इस प्रकार की कोई भी स्ट्रेन देखने को नही मिला है। ब्राजिल में जरूर देखने को मिला था लेकिन यह कहना कि तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरनाक है ऐसा नही है। वैज्ञानिक ब्राजिल में कोरोना से हुए बच्चों की मौत को सरकार के लापरवाही से होने वाली मौत बताया है।

जिस प्रकार से भारत में राज्य सरकारों के द्वारा लापरवाही बरती गयी, और सारी विपक्ष एक लामबंद होकर टुल-किट बनाकर भारत के केन्द्र सरकार को बदनाम करने के लिए खूनी खेल किया है, उससे यह तो साफ तौर पर जाहिर है कि तीसरी लहर भी अवश्य आने वाली है, दूसरी बात यह को आपदा नही जैविक हमला है जो भारत के विपक्ष और विदेशी मेडिकल लाॅबी, आर्मस लाॅबी और आयल लाॅबी के द्वारा सुनियोंजित तरीके से अंजाम दिया जा रहा है।

जिस प्रकार से भारत में वेक्सीन को लेकर अफवाहे फैलायी गयी और अब वेक्सीन वेक्सीन की शोर कर लोगों को भड़काया जा रहा है। इसी प्रकार से कांग्रेस के राजस्थान सरकार के द्वारा भारत के 300 वाली टीका को खरीदने में असमर्थ है लेकिन अमेरिका के पिजर को 1500 में खरीदने के लिए तैयार है। आप समझ सकते है कि भारत में किस प्रकार की साजिश चल रही है। इस साजिश से हमने बचने की जरूरत है। खैर आपके लिए इस बार इजराइल भी एक बड़ा मुद्दा है। जहाँ पर एक 86 लाख के आबादी वाला देश 2 अरब वाली ओआईसी को ठेगा दिखा दिया है। आप भी इजराइल के इस आतंकवाद मुक्त भारत बनाने के अभियान को देखिये और कुछ सीखिये के देश के साथ केसै खड़ा रहना है। फ्रि बिजली पानी के चक्कर में मत पड़ियें। अन्यथा आपको तीसरी लहर नही चौथी लहर भी देखनी पड़ सकती है।

जब से आक्सीजन की आडिट करने की बात आयी है आक्सीजन ही आक्सीजन है। रेमडेसिविर के मांग करने वाले बाबा को ढुढिये और मोदी सरकार को अन्तर्राष्ट्रीय साजिश करने वालों के लिए इंजेक्शन बनाने मे सहयोग कीजिए।

नमस्कार

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