जिन्ना को पाकिस्तान के लिए और औवेसी इस्लाम के लिए वोट मिले।

Spread the love

आप जानकार हैरान होते होंगे की आखिर औवेसी और उनके पार्टी हिंदुओं से वोट क्यो नही मांगते है। तो आपकों बताना जरूरी है कि ओवेसी मुसलमान से भी वोट नही मांगते बजाय कि मुसलमान उनके पार्टी को इस्लाम के नाम पर वोट देते है। नेहरू ने भले ही सत्ता के लिए खेल खेला हो लेकिन जिन्ना इस्लामिक राष्ट्र के डायरेक्ट एक्शन जैसे जघन्य अपराध किया। लेकिन हाय रे गांधी की बुद्धि राम ने हर लिया। नोआखली के वो दर्दनाक खेल जो सिर्फ पाकिस्तान के लिए नही बल्कि काफिरों के साथ खेला गया था।

1937 में के असेम्बली चुनाव में देश की हालत कुछ ऐसे ही थे जैसे आज है। उस समय जिन्ना के द्वारा मुसलमानों से पाकिस्तान के नाम पर वोट मांगे गये थे और आज ओवेसी लोगों से इस्लाम के नाम पर वोट मांगते है। जिन्ना को यह फिक्र नही था कि कौन वोटिंग मुस्लिम लीग के लिए किया है उसको इस बात की फिक्र ज्यादा था उस समय की कौन पाकिस्तान के लिए वोटिंग कर रहा है। 1937 में जिन्ना के हालत भी ऐसे ही पतले थे जैसे कि आज ओवेसी के। लेकिन अगले सात साल में जिस प्रकार से उसने वापसी किया और कांग्रेस को त्याग चुके जिन्ना ने कांग्रेस को ही धुल चटा दिया था, हो सकता है कि आने वाले दिनों में ओवेसी भी कुछ ऐसा ही करे।

किसी ने ओवेसी को किसी हिंदू के मुहल्ले में वोट मांगते नही देखा होगा जिस प्रकार से हमारे हिंदू नेता के द्वारा मुस्लिम के दरवाजे पर नाक रगड़े जा रहे है। ओवेसी तो उस मुसलमान के दरवाजे पर भी जाना पसंद नही करता है जो कट्टर इस्लाम के समर्थक नही है। कौन उसको वोट देता है या कौन नही इसका तो ओवेसी जी पर कोई फर्क नही पड़ता है फर्क पड़ता है तो सिर्फ उसे कितने वोट मिले। सीट की गिनति कोई मायने नही रखते है।

पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना को बड़ा उम्मीद था कि पाकिस्तान के मुसलमान उनकों वोट देंगे, लेकिन उस समय हिन्दुस्तान और आज के पाकिस्तान में जिन्ना को मुंह के खानी पड़ी थी। लेकिन बिहार उत्तर प्रदेश और दूसरे हिंदी प्रदेश के मुसलमानों ने पाकिस्तान को लेकर जमकर वोटिंग किया। जिसका परिणाम था कि भारत को विभाजन करना पड़ा और लाखों लोग खासकर हिंदू मारे गये।

लेकिन सबसे बड़ी विडंबना जिन लोगों नें पाकिस्तान के समर्थन में जिन्ना को वोट दिया उनके पीढी आज भी भारत में ही रह रहे है। अब सवाल उठता है कि आखिर उन्होंने पाकिस्तान के पक्ष में वोट क्यों दिया। इसका साफ-साफ मतलब था कि उनको इस्लामिक राष्ट्र बनाना था लेकिन वहाँ जाना नही था। यही हालत आज भी है जो लोग ओवेसी को वोट दे रहे है उनका ओवेसी से कोई लेना देना नही है लेकिन उनका रिस्ता गजबा ए हिंद से है। दुनिया में भारत से ज्यादा सुन्दर और विविधता भरी को जगह नही है। यहाँ पर आर्थिक व्यवस्था से ज्यादा सामाजिक व्यवस्था कायम है।

अरब के लूटेरों नें बार-बार भारत को लुटने की कोशिश किया है लेकिन आज तक असफल रहा है। हालांकि यह कहना भी ठिक होगा कि भारत भूमि को कलंकित किया है। 6ठवीं शाताब्दी से ही उनका नजर भारत पर है और बार-बार प्रयास भी किया है। यही कारण है कि लगातार इस्लामिक संगठन बनाकर उनकों अरब से चंदा दिया जा रहा है।

सच जुवां पर आ ही जाता है।

आपको शायद याद होगा कि एक बार छोटे ओवेसी ने कहा था कि 15 करोड़ 100 करोड़ पर भारी है। इस बात का पूरे देश में विरोध हुआ था। लेकिन आपको जो करना है करे लेकिन छोटे ओवेसी को जो संदेश देना था उसने दिया। ये बात भी सही है।

आईये देखते है कैसे ? हमारे देश में सेक्यूलरिज्म का नशा जो हफीम के नशा से ज्यादा खतरनाक है और 50 करोड़ तथा कथित हिंदू उस नशे का शिकार है। उनकों ये ही नही पता की संसार में मात्र एक ही धर्म है वही भी सत्य सनातन। लेकिन यहाँ तो ‘सर्व धर्म संभाव’ का नशा है, क्या किसी को पता है कि धर्म का तात्पर्य किसी व्यक्ति के विचार से नही अपितु समस्त मानव व प्रकृति के कल्याण से है। लेकिन एक व्यक्ति के विचार को लेकर चलने वालों को धर्म की संज्ञा दी जा रही है जो कि दुखद है।

मै फिर लौटता हूँ । तो छोटे ओवेसी कहते है कि 100 करोड़ हिंदुओं पर 15 करोड़ मुस्लिम भारी है। बात तो ठिक भी है. क्योंकि 50 करोड़ हिंदुओं को सेक्यूलरिज्म का नशा लगा हुआ है। 20 करोड़ को अपने आपको विकसित प्राणी दिखाना है और उसकी होड़ में है। बच्चों को डाक्टर इंजिनियर बनाने की होड़ है लेकिन यह डिसाईड नही कर पा रहे है कि किसके डाक्टर बनाने है इंसान के या जानवर के । आज मानव इंसान रूपी भेडिये की तरह से है और उसके ईलाज करने के लिए तो जानवर के डाक्टर ही बनना पड़ेगा। 10 करोड़ को कुछ पता ही नही है दिन कमाया और रात में खाया । बाकि बचा 20 करोड़ तो उसका भी क्या भरोसा की मुकाबला कर भी पायेगा या नही इसलिए ओवेसी का यह कथन बिल्कुल सत्य है।

बिहार मे ओवेसी को 5 सीट मिले है। क्या उसने किसी से भी विकास के नाम पर वोट मांगे थे , नही उसने किसी से भी विकास के नाम पर वोट नही मांगे बल्कि उसे वोट दिया गया इस्लाम के नाम पर। उन पार्टी के वोट छिन लिया जो बिहार में अपने आपको मुसलमान और दलित के मसीहा कहते है। हैरानी इस बात की नही है कि ओवेसी जीता हैरानी इस बात कि है कि गैर बीजेरी के गढ़ मे जीता। इसका खामियाज उसी पार्टी को भुगतना पड़ा जो कटिया बद्धना भाई-भाई कहते है।

यहाँ पढ़े

नोआखली भाग -1

नोआखली भाग-2

नोआखली भाग-3

जल्द आ रहा है विभाजिन कालीन भारत

%d bloggers like this: