“नशा मुक्त या नशा युक्त” सरकार ही शराब माफिया है ?

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जहरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या 70 पहुँची। कांड के मुख्य आरोपी पर 50 हजार का ईनाम।

अलीगढ़ में एक बार फिर से शराब का कहर रविवार को भी जारी रहा। इस जहरीली शराब को पीकर मरने वालों के संख्या 70 के आस-पास पहुँचा है वही प्रशासन इसे 25 बताने में लगा है। मुख्य आरोपी को पुलिस नें तीन दिन के रिमांड पर भेज दिया है। शुक्रवार को जिले में शराब का यह खेल शुरु हुआ था जिसे अब जाकर प्रशासन ने बंद करा दिया है।

कोरोना के समय से सबसे ज्यादा और अति आवश्यक माने जाने वाले शराब की दुकान खोली गयी थी। भले ही रेहड़ी पटरी, ठेली खोमचा और छोले भटूरे की दुकान प्रशासन नें बंद रखी हो लेकिन शराबी की दुकान खोली गयी। क्योंकि लोगों के घरों में सब्जी से ज्यादा शराबों की आवश्यकता है। जबकि कई विशेषज्ञ ने वेक्सीनेशन के बाद शराब पीने कों मना किया है, यह भी बताया गया है कि शराब पीने से इस वेक्शीनेशन को लगाने का कोई लाभ नही होगा। लेकिन सभी राज्यों को शराब की दुकान खोलना पड़ता है क्योंकि इनके पास फ्रि में बांटने के लिए अधिक राजस्व की जरूरत पड़ती है।

शरार का बड़ा माफिया तो स्वयं सरकार है।

हमारे सरकार यह वादा करके चुनाव लड़ती है कि हम देश को राज्य को और समाज को नशा मुक्त बनायेंगे। युवओं को भविष्य उज्जवल होगा, लेकिन उसी चुनाव में कार्यकर्ताओं को और वोटर को दारू पिलायी जाती है। पीने वालों मे अफसर से लेकर पत्रकार तक शामिल होते है, जो आम वोटर की बात तो छोड़ ही दीजिए।

इस देश की हालत अगर देखे तो ऊपर से नीचे तक सब एक जैसा ही है। कार्पोर्टर कंपनियाँ जो ज्यादातर समाजिक सेवा से जुड़े रहते है। बच्चों के शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी विषयों को लेकर एनजीओं चलाते है। सरकार से टैक्स छूट के हजारों करोड़ ढकार लेते है। कैंसर के मरीजों के लिए डोनेट करते है। लेकिन अपने ही कंपनी के कर्मचारियों को शराब पिलाते है। जबकि सरकार खुद प्रचार प्रसार करता है, शराब से कैंसर होता है और लिवर किडनी खराब होते है।

देखिये सोशल मिडिया से कुछ जनता के राय

सरकार का विभाग बीड़ी-सिगरेट बनाने का लाइसेंस देता है, दूसरा विभाग अप्रत्यक्ष रूप से बीड़ी सिगरेट का प्रचार-प्रसार करता है, तीसरा विभाग बीड़ी सिगरेट को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताता है और संविधान भारत को नशा मुक्त और शराब मुक्त बनाने का निर्देश देता है।

अश्विनि उपाध्याय वरिष्ठ अधिवक्ता सुप्रिम कोर्ट

मैंने कहीं पढ़ा था कि भारत में प्रति वर्ष 10 लाख लोग सिगरेट, तम्बाकू छोड़ देते हैं… क्योंकि ऐसा करने के लिए वे जिन्दा ही नहीं बचते हैं! ”आज से तंबाकू का सेवन नहीं करेंगे”, #WorldNoTobaccoDay पर आपकी यह प्रतिज्ञा मेरे और आपके परिवार के लिए सबसे बड़ा उपहार होगी। नवनीत त्रिपाठी

मद्य की सरकारी बिक्री के बारे में कभी आप विचार व्यक्त नहीं करते । मदिरा को हिन्दू-धर्म,इस्लाम,ईसाई धर्म में भी निषिद्ध किया गया है तथा संविधान में भी इस पर रोक है। सरकारें धन के लिए बेशर्मी से हर गाँव में मदिरा बेचकर निरपराधों की लोगों का जीना दूभर किया है। इस पर भी कभी बोलिए । दिनेश इंदौरिया

सरकार का 1 विभाग बीड़ी-सिगरेट बनाने का लाइसेंस देता है दूसरा अप्रत्यक्ष रूप से बीड़ी सिगरेट का प्रचार-प्रसार करता है तीसरा विभाग बीड़ी सिगरेट को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताता है संविधान नशा मुक्त और शराब मुक्त बनाने का निर्देश देता है ऐसा 74 साल से हो रहा है @narendramodi

कितना बड़ा बिरोधाभास है अपने ये कानून लेकिन किसी कोई दिक्कत नहीं है केवल दिखाने के लिए, जहर बेचना जरूरी है क्यों ममुक्त भी कर सकतें है कोई दिक्कत नहीं है फिर लेकिन मंशा वही है : डा0 रिषि लाल गौर

यह सब बाते क्या सरकार को नही पता है अगर नही तो सत्ता में रहने का अधिकार नही है अगर हाँ तो सबसे बड़ा माफिया सरकार है, जो राजस्व के लिए जनता को जहर बेच रही है। मरे या नही मरे, लेकिन जिसका आत्मा मर जाय उसे जीवित कैसे कह सकते है। जितना पीकर नही मरता है उससे ज्यादा पीकर दूसरे को मार देता है।

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