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समाज के लिए बेहतर👌 है अंतर-जातीय और अंतर-धार्मिक विवाह👫”

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सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वह अंतर-धार्मिक और अंतर-जातीय विवाह के खिलाफ नहीं हैं। साथ ही कहा कि इस तरह की शादियों से समाजवाद को बढ़ावा मिलेगा। जस्टिस अरुण मिश्रा और एमआर शाह की पीठ ने कहा कि अगर दो लोग कानून के तहत शादी करते हैं तो हिंदू-मुस्लिम विवाह भी स्‍वीकार्य है। इसमें लोगों को क्‍या समस्‍या हो सकती है?

जस्टिस मिश्रा ने कहा कि अगर इस तरह की शादियों से जातीय भेद खत्‍म होता तो ये अच्‍छा है। कथित ऊंची और और नीची जातियों के लोगों के बीच विवाह होना चाहिए। ऐसी शादियां समाजवाद के लिए अच्‍छी हैं। पीठ ने कहा कि लिव-इन संबंधों को कोर्ट ने पहली ही स्‍वीकार्यता दे दी है। लिहाजा, अंतर-धार्मिक और अंतर-जातीय विवाह पर बहस की कोई जरूरत नहीं है।

पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ऐसे दंपतियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित कराना चाहता है्। हम ऐसी शादियों में महिलाओं के भविष्‍य को लेकर चिंतित हैं। हम उनके भविष्‍य को सुरक्षित करने की कोशिश करना चाहते हैं। पीठ ने ये सभी बातें छत्‍तीसगढ़ के एक व्‍यक्ति की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहीं। याची ने अपनी बेटी के अंतर-धार्मिक विवाह के खिलाफ याचिका दायर की थी। मामले में मुस्लिम युवक ने हिंदू लड़की से विवाह करने के लिए धर्म परिवर्तन कर लिया था।

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