वर्ष 2020 में कुल 2631 आटो/टैक्सी/ई-रिक्शा के ई-चालान व 2402 सीज

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नोएडा जिला गौतमबुद्धनगर जनपदीय पुलिस के द्वारा वर्ष 2020 में 2631 आटो, टैम्पो व ई-रिक्शा पर कार्यवाही करते हुए ई-चालान किया गया। जबकि इसी वर्ष के दौरान 2402 टैम्पो व ई-रिक्शा के विरूद्ध सीज करने का कार्यवाही किया । 2021 की जनवरी में कुल 133 आटो, टैम्पो व ई-रिक्शा के विरूद्ध ई-चालान और 57 को सीज किया गया।

आईजीआरएस से मांगे गये जानकारी और जनपदीय यातायात पुलिस के द्वारा दिए गये जानकारी से यह आकड़े सामने आये है। आवेदक रमन कुमार के द्वारा मांगे गये जानकारी मे इस बात का खुलासा किया गया है। हालांकि यह जानकारी अधूरा है और आगे की जानकारी परिवहन विभाग से मांगी गयी है।

आवेदक नें आईजीआरएस के माध्यम से जानकारी मांगा कि नोएडा स्मार्ट सिटी में चल रहे आटो/टैम्पो/ई-रिक्शा में कितने सवारी बैठाने की अनुमति है। जैसा की देखा जाता है कि 3 सीटर सवारी आटो /टैम्पो में 10 सवारी आमतौर पर बिठाये जाते है। जिसमें 8 पीछे और 2 आगे ड्राइवर के सीट पर। जिससे ड्राइवर को गाड़ी चलाने में दिक्कत होता है और कई बार नियंत्रण खो बैठता है। ड्राईवर समेत 11 लोग सवारी आटो में होते है। वही शहर में चल रहे ई-रिक्शा में भी 5-6 सवारी होते है। कभी-कभी तो ई-रिक्शा में भी 8 सवारी बिठा लिये जाते है।

दूसरी जानकारी किराये को लेकर मांगी गयी जिसका उत्तर नही दिया गया। बताया गया कि यह परिवहन विभाग का मामला है। जिसमें रिजर्व आटो रिक्सा के किराये को लेकर था। नोएडा में कही भी आटो किराये मीटर के अनुसार नही चलाये जाते है, आदमी को देखकर मनमाने तरीके से किराये मांगे जाते है। 10 किलोमीटर के लिए कोई 250 तो कोई 200 मांगते है और कुछ लोग 100-120 में चलने को तैयार हो जाते है। ऐसे में जानने की कोशिश किया गया कि क्या इनके लिए कोई किराया सिस्टम है महाराष्ट्रा के तौर पर।

चालानी तथा सीज करने की कार्यवाही की जानकारी देते हुए नोएडा पुलिस नें बताया है कि सवारी किराया निर्धारण का कार्य यातायात पुलिस के द्वारा नही किया जाता है। लेकिन यह जबाब भी अपने आप में एक सवाल है। क्या ओवरलोडिंग भी नोएडा यातायात पुलिस के द्वारा नही देखा जा रहा है।

नोएडा पुलिस ने हाल ही एक बड़ी कारवाई करते हुए कई आटो को सीज किया तथा ई-चालान भी किया। इसके साथ ही नोएडा यातायात पुलिस अब शहर में चलने वाले आटो को कलर कोडिंग कर उसके रूट निर्धारित करेगी। जिसके की आसानी से ट्रैस किया जा सके की कौन किस रूट का सवारी ले रहा है। इसके साथ ही सवारियों के साथ आटो/टैम्पो चालकों के व्यवहार को लेकर भी जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया है।

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