हिण्डन की थमी रफ्तार, क्या हिण्डन है बीमार। हिंडन नदी एक परिचय

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कालूवाला खोल अर्थात हिण्डन नदी सहारनपुर जनपद में कालूवाला खोल नामक शिवालिक की पहाड़ियों से प्रारम्भ होती है। यह बरसाती नदी है तथा इसमें छोटी छोटी अन्य सहायक धाराएं भी आकर मिल जाती हैं। सहारनपुर में उतर प्रदेश व उत्तराखंड की सीमा को बांटने वाली शिवालिक वन मण्डल की पहाडियों के दक्षिण की ओर ढलान पर कालूवाला खोल व कोठरी मिलान से जो धारा बहकर चलती है उसको बरसनी नदी के नाम से जाना जाता है। बरसनी में कुछ छोटी धाराएं/स्रोत, छज्जेवाली, पीरवाली, सपोलिया, कोठारी व अंधाकुन्डी एक निश्चित दूरी पर आकर मिलती रहती है।

इस स्थान पर शिवालिक आरक्षित वन मण्डल भी है जिसके अंतर्गत मोहण्ड, शाहज़हाँपुर व शाकुम्भरी वन क्षेत्र आता है। शिवालिक पहाडियों की चोटी से उतर प्रदेश की ओर ढलान से लेकर आरक्षित वन क्षेत्र की सीमा समाप्त होने तक की दूरी क़रीब 15 किलोमीटर है। इस दूरी में हिण्डन नदी के दोनों ओर पहाड़ व घना जंगल है।

इन पहाडों पर होने वाली वर्षा का पानी हिण्डन की मुख्य धारा में आता है। इसके अतिरिक्त वृक्षों की जड़ों से रिसने वाला पानी भी धीरे-घीर मुख्य घास में मिलता रहता है। बरसात के समय इन सभी धाराओं में भरपूर पानी आता है यही पानी बहते हुए नीचे तक जाता है।

इन सभी धाराओं के मिलन से जो नदी बनती है वही हिण्डन है, जोकि पुरका टांडा गांव से बहने वाली धारा को कमालपुर गांव के निकट मिला देती है। पुरका टांडा गांव के जंगल से बरसात के समय जो पानी एकत्र होकर बहता है वही उसे एक छोटी नदी का रूप देता है। पुरका टांडा गांव के जंगल में सिंचाई विभाग द्वारा पानी एकत्र करने के लिए छोटे चैकडैम भी बनाए गए हैं।

यह धारा सहारनपुर जनपद के ही कमालपुर गाँव के जंगल में जाकर कालूवाला की पहाडियों से साफ शुद्ध पानी लेकर आने वाली कालूवाला खोल की धारा अर्थात हिण्डन में मिल जाती है। इस स्थान पर पर 30% पानी कालूवाला खोल की धारा से आता है जबकि क़रीब 10 प्रतिशत पानी ही पुरका टांडा गांव से निकलने वाली धारा से आता है। उपरी क्षेत्र में बसे गाँव के निवासी व वन गुर्जर हिण्डन को वहां कालूवाला खोल, बरसनी व मुलेरिया आदि नामों से भी पुकारते हैं लेकिन वे यह भी बताते हैं कि ये हमारे बोलने के नाम हैं, वास्तव में यह हिण्डन नदी ही है।

हिण्डन नदी का उद्गम सहारनपुर जनपद के पुरका टांडा गांव को माना जाता रहा है लेकिन ब्रिटिश गजेटियर व सेटेलाइट मैपिंग के अनुसार हिण्डन का उद्गम स्थल सहारनपुर जनपद के मुजफ्फराबाद ब्लॉक स्थित शिवालिक पहाड़ियों के ढलान कालूवाला खोल दर्ज है। हिंडन नदी सहारनपुर जनपद से प्रारम्भ होकर मुजफ्फरनगर, शामली व गाज़ियाबाद से होते हुए करीब 355 किलोमीटर का सफ़र तय करके अंत में गौतमबुद्ध जनपद में हिण्डन नदी से पूर्वी दिशा की ओर बसे तिल्वाडा गाँव से करीब 500 मीटर दूर तथा हिंडन नदी से पश्चिमी दिशा की ओर बसे मोमनाथल गाँव से करीब एक किलोमीटर दूर जंगल में जाकर यमुना नदी में समाहित हो जाती है। हिंडन व उसकी सहायक नदियों के कुल बहाव क्षेत्र में इन नदियों के दोनों किनारों पर करीब 872 गाँव मौजूद हैं।

हिंडन नदी से जुड़े प्रकृति प्रेमी हिंडन की निर्मलता और अविरलता के लिए सभी सात जनपदों के जिला प्रशासन सहित समाज के विभिन्न तबकों – उद्योगों, स्वयं सेवी संगठनों, व्यापारियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ मिल कर सतत प्रयास कर रहे हैं.

हिंडन नदी – हिंडन को प्रदूषण मुक्त करने के लिए एनजीटी ने शुरू किये प्रयास, पर्यावरण विशेषज्ञों ने जन सहभागिता को बताया अहम

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने हिंडन नदी के साथ साथ काली नदी को भी स्वच्छ बनाने की कवायद शुरू की है. मेरठ में कमीश्नर के रूप में कार्य करते हुए डॉ प्रभात कुमार ने हिंडन नदी को निर्मल करने के लिए मुहिम शुरू की थी, जिसमें उनके साथ साथ मेरठ, सहारनपुर, बागपत सहित अन्य स्थानों से भी लोग जुड़े और नदी के लिए स्वच्छता अभियान चलाये थे. ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के अंतर्गत हिंडन नदी को साफ करने के लिए यह ‘हिंडन सेवा कार्यक्रम’ कमिश्नर डॉ प्रभात कुमार के नेतृत्व में चलाया गया था. उन्होंने काफी सक्रियता व सजगता से इस कार्यक्रम का संचालन किया और इसके अंतर्गत हिंडन व उसकी सभी सहायक नदियों को सम्मिलित किया गया था.
नमामि गंगे अभियान के अंतर्गत यमुना की प्रमुख सहायक हिंडन नदी को भी शामिल किया गया है. हिंडन की अविरलता को बनाए रखने में बाधा उत्पन्न कर रहे कारखानों और नालों की पुष्टि कर उनपर रोक के आदेश राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा दिए गये थे. परन्तु आईआईटी रुड़की की जुलाई माह में जारी रिपोर्ट से यह साफ़ हुआ है कि आज भी मुज्जफरनगर के नालों से हिंडन नदी में भारी मात्रा में कैंसरकारक रसायन उडेला जा रहा है. वर्ष 2017 में हिंडन नदी में यह मात्रा 0.50 (सहारनपुर) मिलीग्राम प्रति लीटर थी और उसके बाद से यह लगातार घटते हुए शून्य हो गयी.
विगत वर्ष उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से मार्च, 2019 तक प्रदेश की सभी नदियों की जलीय गुणवत्ता से संबंधित रिपोर्ट जारी की गयी है, जिसमें मेरठ की काली नदी एवं हिंडन नदी में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा शून्य बताई गयी है. मुख्यतः सहारनपुर जिले में शिवालिक पहाड़ियों के ढलान कालूवाला खोल से प्रवाहित होने वाली हिंडन नदी यमुना की प्रमुख सहायकों में से एक है और मुजफ्फरनगर, मेरठ, शामली, बागपत, गाज़ियाबाद आदि जनपदों में बहते हुए बहुत से विषाक्त नाले हिंडन में गिराए जा रहे हैं.
यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में गंगा, वरुणा, काली, रामगंगा, सई, हिंडन, गोमती, सरयू, घाघरा, बेतवा, यमुना सहित अन्य कुछ नदिकाओं से भी आंकडें जुटाए गए हैं. इस रिपोर्ट के अंतर्गत जिन पैमानों पर नदी जल गुणवत्ता की जाँच की गयी, वें इस प्रकार हैं..
1. ऑक्सीजन डिमांड (डीओ)2. बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीडीओ)3. टोटल कोलीफोर्म4. फीकल कोलीफोर्म
गंगा-यमुना के दोआब में सहारनपुर जनपद से प्रारम्भ होकर मुजफरनगर, शामली, मेरठ, बागपत व गाजियाबाद से होते हुए अंत में जब हिण्डन नदी गौतमबुद्धनगर जनपद के तिलवाड़ा गांव से पश्चिम व मोमनाथल गांव से पूर्व में यमुना में मलीन होती है तो इसमें बहते हुए काले रंग के बदबूदार पानी को देखकर कोई कह नहीं सकता है कि यह एक जीवित नदी है. सेटेलाइट मैपिंग व ब्रिटिश गजेटियर के आधार पर देखें तो हिण्डन का उद्गम मुजफराबाद जनपद में शिवालिक हिल्स बताया जाता है, हिण्डन नदी सहारनपुर जनपद से प्रारम्भ होकर गौतमबुद्धनगर जनपद में जाकर यमुना में समाहित हो जाती है. काली पश्चिम, कृष्णी, धमोला, पांवधोई, नागदेव, चाचाराव, सपोलिया, अंधाकुन्डी व स्रोती जैसी अन्य छोटी धाराएं मिलकर हिण्डन को नदी बनाती हैं. उद्गम से यमुना में समाहित होने तक हिण्डन की कुल लम्बाई करीब 355 किलोमीटर है.
हिण्डन व उसकी सहायक नदियों जैसे काली, कृष्णी आदि में बहते अत्यधिक प्रदूषित पानी के कारण नदी किनारे बसे गांव-कस्बों का भूजल भी जहरीला हो चुका है. सैंकड़ों गांवों में जल जनित गंभीर बीमारियां पनप रही हैं. सैंकड़ों लोग जनजनित जानलेवा बीमारियों के कारण असमय काल के मुंह में समा चुके हैं. कुछ किसान हिण्डन व उसकी सहायक नदियों में बहने वाले जहरीले पानी से जाने-अनजाने अपनी फसलों की सिंचाई भी करते हैं, जिस कारण से जहां उनके खेतों की कृषि मिट्टी में परसिसटेंट आर्गेनिक पाल्यूटेंटस जैसे तत्व पाए गए हैं वहीं उस मिट्टी में पैदा हुई सब्जियां व अन्य फसलों में भी कीटनाशकों के तत्व मिले हैं.
राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के आदेश के पश्चात् हिण्डन व उसकी सहायक नदियों के किनारे बसे गांवों से सैंकड़ों की संख्या में हैण्डपम्प उखाड़े जा चुके हैं. जिन नदियों के किनारे सभ्यताएं बसती थीं वहां भयंकर जल प्रदूषण की त्रासदी के कारण बस्तियां उजड़ने की कगार पर हैं. नदी में प्रदूषण का प्रतिशत इतना है कि नदी के पानी को छूना तो दूर उसके पास खड़ा होना भी दूभर हो चला है. बुजुर्गों के अनुसार जिस नदी के पानी की तली में पड़ा हुआ सिक्का दिखता था उस पानी को हाथ में लेने पर अब हाथ की रेखाएं भी नहीं दिखती हैं.
नदियों की निर्मलता और अविरलता बनाये रखने के लिए सरकार के साथ साथ समाज को भी जागरूक होना होगा. समाज आगे आये और मिलकर नदियों के उद्धार के लिए कार्य करे तो निश्चित ही बात बनेगी, यह मानना है नीर फाउंडेशन के निदेशक रमन कांत का, जिन्होंने काली नदी को उसके उद्गम स्थल पर ग्रामीणों के साथ मिलकर पुनर्जीवित किया है. साथ ही उन्होंने हिंडन की स्वच्छता को लेकर भी बहुत से प्रयास किये हैं.
इनके साथ साथ वरिष्ठ पर्यावरणविद अनिल जोशी और जल पुरुष राजेन्द्र सिंह ने भी कहा कि नदियों को जीवनदान देने के लिए जनसहभागिता की आवश्यकता है, आम जनता की मुहिम को जन आन्दोलन में तब्दील करना होगा, तभी नदियों के प्रति जन जन में अवचेतना आयेगी.

लेकिन हजारों प्रयास के बाद भी यह सवाल बांकि जीवित है और बार बार पूछता है क्या बीमार हिण्डन का कुछ ईलाज किया गया है। उसकी स्थिति में कुछ बदलावा आया है , तो शायद यही कहेंगे नही। बजाय इसके की कुछ सुधार हो हिण्डन और अधिक बीमा है और कुछ सालों में इसका अस्तित्व ही समाप्त हो जाये ऐसा भी अब लगने लगा है। सरकारे योजना बनाती है और योजना के नाम पर करोड़ों डकार जाना कोई नई बात तो नही है। सरकार के महकमे को जिम्मेदारियाँ दी जाती है उसके बाद भी अतिक्रमण और खनन रूकने का नाम नही है। जिम्मेदार अधिकारी नौकरशाह को सिर्फ कुछ दिनों के लिए सस्पेंड कर दिये जाते है। राजनीतिक दल एक पदयात्रा निकालती है लेकिन उनकों नदी के नाम तक का पता नही होता है। नमामि गंगे में हिण्डन को भी शामिल किया गया लेकिन हालात तो बद-से बदतर होती जा रही है क्या इससे नमामि गंगे की असफलता के तौर पर नही देखा जाना चाहिए।

आज के लिए बस इतना ही अगले एपिसोड में फिर एक नए विषय के साथ आपसे मिलूंगा। अगर आपके आस-पास या जेहन में भी कोई ऐसा विषय है जिसे अनदेखी किया जा रहा है तो आप हमारे कमेंट बाक्स में लिखे मोबाईल नंबर सहित। विडियों के नीचे लिंक में मेल आईडी भी दिया गया है उस पर भी आप अपना विषय रख सकते है।

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