हाईकोर्ट के फैसले के बाद नगर निगम अजमेर होटल इन जैसे मामलों में क्या निर्णय लेगा ? मिलीभगत से हुई है सीज मुक्ति।

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    राजस्थान पत्रिका समूह के सम्पादक गुलाब कोठारी की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने हाल ही में जो फैसला दिया है, उससे अजमेर नगर निगम द्वारा लिए गए अनेक निर्णयों पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। ताजा उदाहरण नगर निगम कार्यालय की नाक के नीचे बने होटल अजमेर इन का है। निगम ने 21 मार्च 2016 को इस होटल की चैथी और पांचवीं मंजिल को अवैध मानते हुए सीज कर दिया था। होटल मालिक श्रीमती सुधा राठौड़ और उनके पति चन्द्रशेखर राठौड़ पर यह भी आरोप रहा कि होटल के निर्माण में सेटबैक नहीं छोड़ा गया। निगम ने 12 सितम्बर 2017 को एम्पावर्ड कमेटी की बैठक बुलाई और स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुख शासन सचिव के पत्र के आधार पर होटल को सीज मुक्त करने का निर्णय ले लिया। साथ ही सेटबैक के नियमन का मामला राज्य सरकार को प्रेषित कर दिया। निगम में इस तरह के अनेक मामले हैं। निगम ने जितनी भी सम्पत्तियों को अवैध मानते हुए सीज किया, उन सभी को स्वायत्त शासन विभाग के अधिकारियों ने सीज मुक्त करने के आदेश दिए। हालांकि सभी आदेशों में गुलाब कोठारी के प्रकरण का हवाला देते हुए नियमों की पालना करने के निर्देंश दिए गए। चूंकि यह सब मिलीभगत का खेल रहा इसलिए अवैध काॅम्पलैक्स धड़ल्ले से शुरू हो गए। अब जब हाईकोर्ट का ताजा आदेश आ गया है तब होटल अजमेर इन जैसे निर्णयों पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा है कि जिन भवन मालिकों ने सेटबैक नहीं छोड़ा है, उनका भवन किसी भी स्थिति में नियमित नहीं हो सकता है। कोर्ट ने पूर्व के मास्टर प्लाॅन की पालना करने के आदेश भी दिए हैं। गम्भीर बात यह है कि अजमेर में तो अभी तक मास्टर प्लाॅन भी मन्जूर नहीं हुआ है। अधिकांश काॅम्पलैक्स आवासीय नक्शों पर ही बने है। सेटबैक नहीं छोड़ने की समस्या तो अधिकांश काम्पलैक्सों में है। देखना होगा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद अजमेर नगर निगम होटल अजमेर इन जैसे मामलों में क्या कार्यवाही करता है। क्या ऐसे सभी मामलों में सीज की कार्यवाही फिर से की जाएगी। जानकारों की माने तो होटल अजमेर इन की ऊंचाई के मामले में भी नियमों की अनदेखी हुई है।

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