क्या प्रदेश की सरकार “भ्रष्ट्राचार” पर गठबंधन कर ली है ?

Spread the love

आज कल राजनीति के बाजार गर्म है। बस पोलिटिक्स , कोरोना वायरस और प्रवासी मजदूर जो अपने ही देश मे प्रदेशी बन गये उनके कंधे पर बंदूक रखकर पालिटिक्स करने मे छोटे से लेकर बड़े कोई भी पार्टी पीछे नही है। यह भी कहना उचित होगा की राजनीति अब शुद्ध व्यवसाय बन चुका है, इसमे अब किसी प्रकार के कोई भी “सामाजिक सरोकार” नही रहा है।

सोनिया गाँधी के द्वारा बुलाये गये विपक्ष की बैठक मे उत्तर प्रदेश के दो बड़ी पार्टी समाजवादी और बहुजन समाजवादी पार्टी के नही पहुँचने पर राजनीति मे हलचल शुरू हो गये है। यहाँ एक तरफ लोग इसे राजनीतिक स्टंट बता रहे है वही दूसरी तरफ कुछ लोग इसे भ्रष्टाचार से जोड़कर भी देख रहे है। कुछ लोगों का कहना है कि समाजवादी पार्टी कांग्रेस के पीछ लगू नही बनना चाहती है वही बहन मायावती को कांग्रेस के उदय से पार्टी के वोट बैंक खीसकने की डर सता रही है।

लेकिन राईज एनजीओ (RIGHT INITIATIVES for SOCIAL EMPOWERMENT) इसे भ्रष्ट्राचार से जोड़कर देख रहे है। उनका मानना है कि यह प्रदेश सरकार और विपक्ष के द्वारा किया गया भ्रष्ट्राचार गठबंधन है। बताते चले कि कल बीएसपी सुप्रिमों मायावती ने बस किराया को लेकर कांग्रेस पार्टी को खड़ी खोटी सुनाई थी। अपने टवीटर पर राजस्थान के कांग्रेस सरकार को अमानवीय और कंगाल बतायी थी।

क्या सरकार औऱ विपक्ष मे गठबंधन हो गयी है ?

2002 से लेकर 2017 तक प्रदेश मे पूरी तरह से भ्रष्ट्राचार के युग था। जिसमे हजारों करोड़ के भूमि घोटाला और निर्माण कार्य मे घोटाला होने की शंका है जिसके बारे मे सीएजी के रिपोर्ट भी बता रही है। हालाँकि अभी तक इसे सार्वजनिक नही किया गया है। नोएडा जो कि इस भ्रष्ट्राचार के लिए सबसे बड़ा अड्डा बना था। लगभग एक लाख करोड़ की घोटाला जो अफसर और नौकरशाह के मिलीभगत से किया गया। यादव सिंह उसका एक छोटा सा हिस्सा है बांकि बड़ी मछली अभी भी राजनीतिक मेहरबानी बचे हुए है।

नोएडा ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे तीनो प्राधिकरण के अधिकारी उस समय श्री रामा रमण थे। नोएडा के सभी निर्माण कार्य उस समय मे शुरु किये गये थे, जिसमे नोएडा सेक्टर 18 की सौंदर्यीकरण, बहुस्तरीय पार्किंग और नोएडा स्टेडिया 21A जिसकी शुरुआती लागत 90 करोड़ की थी लेकिन बनते बनते इसमें 350 करोड़ खर्च हो गये। बताया जा रहा है कि इसमे 35 प्रतिशत की रिश्वत फर्मूला भी काम किया था।

भ्रष्ट्राचार करने के नये नये तरीके का अंजाम दिया गया। जिसके तहत 4000 चौथे श्रेणी के कर्मचारी जो की ठेकेदारी के रूप मे दिखाया गया। माना जाता है कि कर्मचारी डयूटी पर नही था लेकिन उसको वेतन दिया गया। रोजगार देने के नाम पर यह भी एक बड़ा घोटाला है।

माननीय न्यायलय के आदेश अनुसार 21-10-2011 को जाँच रिपोर्ट देना था लेकिन सरकार के काम हमेशा देर से होते है लेकिन इतना देर भी हो ऐसा भी नही है। खैर 7 साल बाद भाजपा सरकार ने जाँच रिपोर्ट को माननीय न्यायलय के सामने प्रस्तुत किया। “खैर देर आये दुरुस्त आए” लेकिन जिला गौतमबुद्धनगर के जनता आज भी जानने के लिए इंतजार कर रही है कि रिपोर्ट मे क्या था और किसने जनपद के जनता को लुटा। । जिसमे अनुमान लगाया गया था कि सिर्फ नोएडा मे 30 हजार करोड़ की घोटाला की आशंका है। CAG AUDIT REPORT को सरकार ने अभी तक जनता के सामने नही रखी है।

यह एक अच्छा मौका है जब राजनीतिक मोल भाव किया जा सके। 2014 के बाद से समाजवादी पार्टी के नरम रूख और 2017 से बहुजन समाजवादी पार्टी इस नर्मी दिखा रही है। शायद यह भी एक कारण है कि प्रदेश के मुख्य विपक्षी पार्टी बोलने से बचती रही है। 22 दलों और कांग्रेस पार्टी कि द्वारा बुलाये गये बैठक में जाने के बजाय प्रदेश सरकार का पक्ष लिया। यह एक बड़ा कारण हो सकता है। लेकिन सबसे बड़ी बात है कि कोई भी पार्टी हो राजनीति मे समझौता करने से पीछे नही हटती। प्रदेश के योगी सरकार से जनता को बहुत उम्मीदे थी लेकिन कही -न-कही प्रदेश सरकार उस पर खड़ी उतरती नही दिख रही है। लाखों के संख्या मे मकान के खरीदार आज भी सरकार के तरफ आशा भरी निगाहों से देख रही है।

सवाल यह है कि आखिर सरकार रिपोर्ट को सार्वजनिक क्यों नही करना चाहती है ? जनपद के जनता को अधिकार है कि वो पूर्व मे हुए भ्रष्ट्राचार के बारे मे जाने।


                         

%d bloggers like this: