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सरकार लाचार , कम होगी चालान की दरे.

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विशाल इंडिया संवाददाता रमन झा


कुछ साल पहले ही एक फिल्म दिखाया गया था , शायद फिल्म की नाम भी ” राजनीति” ही था। जिसमे एक डायलाॅग जो बहुत मशहूर हुआ  था। “अभी तो हाथ की मेंहदी भी नही सुखी थी उससे पहले ही मांग उजड़ गया।” 

गुजरात सरकार के द्वारा कुछ ऐसा की काम किया गया है। बी जे पी शासित राज्य गुजरात मे जुर्माने की राशी को 90 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है , वही अब केजरीवाल सरकार भी इसकी तैयारी कर ली है, और काूननी सलाह लिया जा रहा है। यानी राजनीतिक के लिए कुछ भी करेंगे वाली स्थिति आन पड़ी है। देखते देखते ही सभी सरकारें अपनी राजनीति बचाने के लिए इस कानून की विसर्जन करेंगे.

आज की वर्तमान स्थिति मे सरकार की हालात भी कुछ ऐसा ही है। अभी तो मोटर व्हीकल एक्ट अपना रंग भी नही दिखा पाया है कि सरकार इसकों बदलकर फिर से वही लाना चाहती है। इतने दिनों के कड़े फैसले के बाद यह सरकार के लिए सबसे कमजोर कदम माना जा सकता है। नये नये प्रयोग करने के माहिर मोदी सरकार आखिर बैकफुट पर खड़ा होकर स्टेट ड्राइव क्यों खेलना चाहती है। 

सराकर के कड़े फैसले की सभी सभ्य समाज मे तारीफ की गई थी । हालाँकि उनकों भी परेशानी की सामना करना पड़ रहे। पेट्रोल पंप पड़ लगी लम्बी लाइन इस तरफ इशारा करने लगा था की लोगों कानून की सम्मान करते हुए उसका पालन करने का मन बना लिया है। 

आखिरी सरकार की जिम्मेदारी सड़क दुर्घटना कम करना है या सरकार बचाना है। जनता मे तो मिला जुला असर है लेकिन राजनीतिक गलियारे ही सबसे अधिक दूखी है। सख्त कानून से इनके चम्मचे चाटूकारों को ही सबसे अधिक परेशानी हो रही है।  अगर सरकार को लगता है की पुलिस गलत कर सकती है तो मिडिया हायर  करे सरकार । फिर चलान किसे काटना है और कौैन काट सकता है इसकी जागरुकता मिडिया के माध्यम से जनता के बीच मे लाना चाहिए । 

इस प्रकार के कानूनी बदलाव से सरकार तथा कानून खुद ही कटघरे मे है , क्या जुर्माने की राशी बढ़ाने से पहले इस पर विचार नही किया गया था। अगर विचार किया गया था तो कोई भी सरकार इसमे बदलाव न करे ऐसी व्यवस्था क्यों नही किया गया। या फिर इस पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाकर क्यों नही देखा गया।

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