गोल्फर अर्जुन भाटी : नोएडा के सचिन तेंदूलकर माने जाते है भाटी

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खेल दुनिया में हलचल मचाने वाले गोल्फर अर्जुन भाटी का नाम कोई नया नही है। नोएडा के रहने वाले गोल्फर अर्जुन भाटी (उर्फ नोएडा के सचिन) उस समय मिडिया के सुर्खिया बटोरा जब अपने 8 साल के खेल में जीते गए 102 ट्राफी लोगों को दे दिया और उससे होने वाले कमाई कोरोना काल में दान कर दिया। पीएम केयर में 4 लाख 30 हजार का दान दिया जिससे सुनकर अर्जुन के दादी ने कही थी तू बिल्कुल वही अर्जुन है।

करीब 150 गोल्फ टूर्नमेंट खेल चुके 15 साल के अर्जुन ने साल 2019 में कैलिफॉर्निया में जूनियर वर्ल्ड गोल्फ चैंपियनशिप जीता। इससे पहले वह साल 2016 में अंडर-12 और 2018 में अंडर-14 किड्स गोल्फ वर्ल्ड चैंपियनशिप जीत चुके हैं।

गोल्फर स्वयं तो दान किया इसके अलावा समय दान भी दिया। उन्होने पीएम केयर में दान करने वालों के लिए मेंहमान नवाजी करने का भी फैसला किया। जिससे कि अधिक से अधिक पैसे पीएम केयर में दान करवाया जा सके। इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी सोच और धैर्य किसी सच्चे खिलाड़ी में ही हो सकता है। जिसको लेकर स्वयं भारत के प्रधानमंत्री ने इस गोल्फर की तारीफ की।

6 साल की उम्र में अपने खेल कैरियर की शुरुआत करने वाले अर्जुन की निगाह हमेशा चिड़िया की आंखो पर रहते है, यही कारण है कि अभी तक 102 से ज्यादा खिताब हासिल किया। अर्जुन भाटी बताते है कि उन्होंने इस खेल को मजे में लिया था उस समय इस खेल का इतना प्रचलन भी नही था। सबसे बड़ी बात पहले ही दिन खेलते हुए चोट भी लगा, इसके बावजूद भी कदम पीछे हटाने के आगे बढ़ता ही गया।

डीडी भारती के कार्यक्रम मेहमान का हिस्सा बने गोल्फर अर्जुन भाटी , बताते है कि किस प्रकार से उनको पहले टुनामेंट खेलने के लिए संघर्ष करना पड़ा। गोल्फ टुनामेंट के लिए 1 महीने पहले ही एन्ट्री बंद हो चुका था लेकिन मै उस दिन पहुँचा जिस दिन टुनामेंट हो रहा था। मुझे प्रतियोगिता में शामिल करने से मना किया क्योंकि एन्ट्री पहले ही बंद हो चुका था, लेकिन वहाँ के लोगों ने कहा कि पहली बार कोई लोकल गोल्फ खेलने आया है, या तो इसे खेलने दिया जाय या फिर टुनामेंट ही कैंसिल होगा।

अर्जुन नें बड़ी बेबाकी से कहा कि किस प्रकार से खेल के साथ-साथ शिक्षा भी आपके लिए महत्वपूर्ण है। क्योंकि शिक्षा से ही आपके आदत और आपके व्यवहार में सुधार आते है। मेरे परिवार वालो का इच्छा था कि मै क्रिकेटर बनू या फिर कोई और खेल को चुन लूं। क्योंकि उस समय में गोल्फ किट बहुत ज्यादा खर्चीला होता था। मेरे परिवार में मेरे लिए बहुत ही संघर्ष किया है , मेरा पहला मैच कैलिफोर्निया में 2015 में था।

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