गाजियाबाद : डासना विधायक के धमकी के बाद हिन्दू संगठन का शांतिपूर्ण शक्ति प्रदर्शन।

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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित डासना मंदिर में हिंदू देवी देवताओं के साथ छेड़-छाड़ करने वालों का पिटाई के बाद उपजे विवाद और राजनीतिक दलों के हस्तक्षेप के बाद आज हिंदू संगठनों नें किया शांतिपूर्ण शक्ति प्रदर्शन। क्षेत्र के बीएसपी विधायक असलम चौधरी ने कहा था कि मै जुमें के नमाज के बाद मंदिर में जाकर बोर्ड हटवाऊँगा और मंदिर के महंत #यति_नरसिम्हानंद_सरस्वती को गुंडा माफिया और बदमाश कहने के साथ-साथ कहा था कि क्या मंदिर उसके बाप का है। यह तो हमारे पूरुखों की संपति है हम मंदिर भी जायेंगे और सबसे पहले मै इस बोर्ड को हटवाऊँगा ?

हिंदू संगठनों नें इस चुनौति को स्वीकार किया और उनके जुमे के नमाज के बाद विधायक असलम चौधरी का इंतजार किया। लेकिन बीएसपी विधायक असलम चौधरी मौके पर नही पहुँचे। हालाँकि इससे पहले ही उन्होंने एक टवीटर विडियों जारी कर अपनी बात स्पष्ट कर दी थी। उनका कहना था कि मेरा इरादा किसी का दिल दुखाने का नही था बल्कि शांति व्यवस्था को कायम रखने का था।

हालाँकि मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला गाजियाबाद प्रशासन ने क्षेत्र में धारा 144 लगा दिया था। लेकिन फिर भी बड़ी संख्या में हिन्दू संगठन से जुड़े लोग पहुँचे। सुर्दशन चैनल के संपादक सुरेश चाव्हान बिंदास बोल कार्यक्रम किया इसके साथ ही मंदिर को 25 लाख देने का घोषणा भी। उन्होंने कहा कि सुदर्शन राष्ट्र निर्माण में पूरा सहयोग करेगा।

हिन्दूवादी चेहरा और #उर्दू_शायर_तैफूल_चतुर्वेदी ने युवाओं को मुसलिम का बहिष्कार करने के बजाय उसको शुद्ध करने हिंदू बनाने का लक्ष्य दिया। उन्होंने कहा कि उनको पता है कि सभी लोग हिंदू ही थे कहाँ से उनकी शुरुआत है। लेकिन आप किसी गरीब मुसलमानों के पास चाहिए उसका क्या दुख तकलीफ है समझिये। हिंदू लड़के मुस्लिम लड़कियों से शादी करे और उनकों अपने घर मे लेकर आये। हमारा यही लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लड़की आपके घर में आयी है उसका पूरा सम्मान होना चाहिए, क्योंकि वो सबकुछ छोड़कर आपके घर आयी है।

भारत में समस्या सिर्फ हिंदू या मुसलमान नही है समस्या राजनीतिक गिद्ध है। जो हर हाल में शिकार करना चाहता है। इस मामले में भी यही हुआ है। अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे भीम आर्मी के पहुँचने के बाद ये मामला बढ़ा जिसे और आगे बढ़ानें अल्का लांबा नें भरपूर योगदान दिया। इस मामले में मिडिया का भूमिका को सबसे संदेहास्यपद बना दिया है जो टीआरपी लेने के लिए बिना किसी छानबीन के विडियों को चला दिया और इसे अन्तर्राष्ट्रीय मामला बना दिया। उसके बाद क्या था लगे हाथ बीएसपी के विधायक भी कुद पड़े और महंत को गाली-गलौच के साथ ही धमकी भी दे दी।

लेकिन बाद में ख्याल आया तो उन्होंने माफी मांगने की कोशिस की और एक और विडियों डालकर इल्जाम मिडिया के माथे पर लगा दिया। लेकिन इतने सारे मामले होने के बाद भी बहन मायावती चुप है। अब मिडिया को सोचना चाहिए किया क्या जो असलम चौधरी ने मिडिया पर इल्जाम लगाया है सही है अथवा मिडिया के कारनामें। खैर हिंदू संगठन इसे अच्छा मान रहे है और कह रहे है कि कम से कम हमे एकत्र होने का मौका तो मिला।

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