गाजियाबाद: जीडीए 20-30% तक कम करेगा प्रॉपर्टी के रेट

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गाजियाबाद: जीडीए मार्केट में अपनी प्रॉपर्टी की डिमांड बढ़ाने के लिए उसकी कीमत कम करने जा रहा है। इस समय जीडीए की 6500 के आसपास ऐसी प्रॉपर्टी हैं, जिन्हें खरीदार नहीं मिल रहे हैं। इन संपत्तियों को बेचने के लिए पहले भी कई कदम उठाए जा चुके हैं, लेकिन ये बिक नहीं सकीं।

मार्केट रेट से 20-40% अधिक है कीमत

जीडीए ने इसके लिए प्रॉपर्टी विभाग से एक प्रस्ताव मांगा है, जिसमें अधिकारी बताएंगे कि यह कीमत किस प्रकार और कितनी घटानी चाहिए। अथॉरिटी ने 2015 में अपनी कॉलोनियों में जमीन के सेक्टर रेट फ्रीज कर दिए थे, जिन्हें दो वर्ष पहले फ्री किया गया। इसके चलते प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ गई। कई जगहों पर अथॉरिटी की प्रॉपर्टी के रेट, मार्केट रेट से 20 से 40 प्रतिशत तक अधिक हैं।

नहीं मिल रहे खरीदार

जीडीए के मुताबिक तमाम उपाय अपनाने के बाद भी शहर में उसकी करीब 6500 प्रॉपर्टी के लिए ग्राहक नहीं मिल रहे हैं। इन उपायों के तहत तीन बार इन संपत्तियों को नीलामी और 6 बार पहले आओ-पहले पाओ स्कीम के तहत बेचने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली।

घटा सकते हैं चार्ज

अभी जीडीए अपनी प्रॉपर्टी पर 15 प्रतिशत सुपरविजन चार्ज और इतना ही एडमिनिस्ट्रेटिव चार्ज लेता है। ये दोनों चार्ज पूरी तरह समाप्त करने या फिर इन्हें कम करके प्रॉपर्टी की कीमत घटाने की योजना बनाई जा रही है। इससे ही कीमतें काफी कम हो जाएंगी और जीडीए प्रॉपर्टी की सेल बढ़ा सकेगा।

बोर्ड में जाएगा प्रस्ताव

जीडीए प्रॉपर्टी की कीमत कम करने के लिए प्रस्ताव तैयार जल्दी ही फाइनल कर लेगा। अगले महीने संभावित बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव को पेश किया जाएगा। बोर्ड अगर इस प्रस्ताव को पास करता है तो शासन की मंजूरी के पास इसे लागू कर देगा।

क्या होगा फायदा

जीडीए का सेक्टर रेट और डीएम की ओर से घोषित जमीन का सर्किल रेट बराबर हैं। एडमिनिस्ट्रेटिव और सुपरविजन चार्ज के नाम पर 30 प्रतिशत तक प्रॉपर्टी और महंगी हो जाती है। अगर जीडीए ये चार्ज कम करता है, तो लोगों को सस्ती प्रॉपर्टी मिल सकेगी और डिमांड भी बढ़ेगी। जीडीए को मिलने वाले पैसे से शहर का विकास भी हो सकेगा।

जीडीए की प्रॉपर्टी की कीमत कम की जाएगी। इस प्रस्ताव को जल्द ही संभावित बोर्ड की बैठक में पेश किया जाएगा। कीमत कम होने से प्रॉपर्टी की डिमांड बढ़ेगी और इसके बिकने से जीडीए को भी पैसा मिलेगा, जिसे अन्य योजनाओं में लगाया जाएगा। -कंचन वर्मा, वीसी जीडीए

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