फ्री मे सेवा उस पर भी, हाँ हम है पत्रकार

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हां, हम पत्रकार हैं

आठ नहीं 24 घंटे वाला बेगार हैं, हां, हम पत्रकार हैं।
मजबूरी का हाल न पूछो, मजदूरों से बेकार हैं।
जॉब की गारंटी नहीं, एक शब्द पर टिकी करार है।
जिससे कोई न हो सके खुश, मिलती ऐसी पगार है।
चले थे शब्दों से व्यवस्था सुधारने और व्यवस्था से लाचार हैं।
आठ नहीं, 24 घंटे वाला बेगार हैं, हां हम पत्रकार हैं।


अपनी लाइफ की हो गई जैसी-तैसी,
मिलती कहां चैन, खबरों में आगे रहने की मची हाहाकार है।
आठ नहीं 24 घंटे वाला बेगार हैं, हां, हम पत्रकार हैं।
सम्मान उनको मिलता है जो सरकार से सेवा के बदले लेते पगार है।
हम फ्री मे सेवा देते है क्योंकि हम पत्रकार है।
फ्री सेवा के बदले मे मिलते हमे लातार है, कभी गाली तो कभी डंडे की मार है।

गुनाह मेरा इतना है कि आईना दिखा देते है
भूले भटके को रास्ता दिखा देते है।
गरीब मासूम को सरकारी तंत्र से लुटने से बचा देते।
पूरी बांट तो समाजवादी बन सकते है
लेकिन हम ऐसा नही करने को लाचार है
आठ नही 24 घंटे वाला बेरोजगार पत्रकार है।


मांग सकते नही और हमे कोई देना भी नही चाहता है।
अपनी भूख को भूल निकल पड़ते है
एक गरीब दूसरे गरीबो के बस्ती,
भूखों को भोजन मिले उनका अधिकार है।
हम भूखे ही सो जाते है क्योंकि हम
आठ नही 24 घंटे वाला बेरोजगार पत्रकार है।
कोई सेवा को किसी के लिए समाजसेवा रोजगार है।
हम अपनी कलम अपनी स्याही और अपनी पैसो से
बांटते अखबार है
आठ नही 24 घंटे वाला बेरोजगार पत्रकार है।

इसे खुब शेयर करना अगर यह बात दमदार

क्योंकि हम एक पत्रकार है

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