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चतुर्थ विद्यापति स्मृति समारोह नोएडा सेक्टर 107 मे.

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नोएडा सेक्टर 107 स्थित महर्षि आश्रम मे विद्यापति स्मृति समारोह का आयोजन किया गया। भारतीय मिथिला सहयोग समिति नोएडा के द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम मे नोएडा , दिल्ली तथा इसके आस पास रहने वाले अप्रवासी मिथिला समाज के लोगो ने भाग लिया।

कार्यक्रम मिथिला के महान काव्य रचायिता विद्यापति जी के स्मृति के रुप मे मनाया गया। इस अवसर पर मैथिल संगीत तथा काव्य से जुड़े लोगों ने अपने अपने स्वर के माध्यम से लोगों के मन को मोह लिया। इस कार्यक्रम मे देश तथा मैथिली के जाने माने कलाकारों ने संगीतमय घटा विखेेरा। विद्यापति के द्वारा रचित नचारी ” गे माई हम नही रहब आजु आंगन ज शिव होयता जमाय” तथा ” जनकपुर के जनक लली जनक के हम संतान छी ” जैसे गीतों की शानदार प्रस्तुति दिया।

प्रमुख कलाकार के माधव राय, जुली झा, धीरज मिश्रा जी, शभु शिखर, विकाश झा, देवानन्द झा , कल्पना मिश्रा , पूजा मिश्रा , स्वीटी ठाकुर एवं कई अन्य प्रसिद्ध कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम मे पधारे सभी अतिथि महानुभावों को मिथिला के सभ्यता एवं संस्कृति मे शान समझे जाने वाले पाग पहनाकर सम्मानित किया गया। भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा नोएडा के अध्यक्ष श्री चमन अवाना, नोएडा के विधायक पंकज सिंह जी के बड़े भाई तथा वाइस चांसलर श्री सी एम झा ने अपना गरिमामयी उपस्थिति दिया।

विद्यापति भारतीय साहित्य की भक्ति परंपरा के प्रमुख स्तंभों में से एक और मैथिली भाषा के सर्वोपरि कवि के रूप में जाने जाते हैं। इनका संस्कृत, प्राकृत अपभ्रंश एवं मातृ भाषा मैथिली पर समान अधिकार था। विद्यापति की रचनाएँ संस्कृत, अवहट्ट, एवं मैथिली तीनों में मिलती हैं। इनके काव्यों में मध्यकालीन मैथिली भाषा के स्वरूप का दर्शन किया जा सकता है। इन्हें वैष्णव और शैव भक्ति के सेतु के रुप में भी स्वीकार किया गया है।

मिथिला के लोगों को ‘देसिल बयना सब जन मिट्ठा’ का सूत्र दे कर इन्होंने उत्तरी-बिहार में लोकभाषा की जनचेतना को जीवित करने का महती प्रयास किया है। मिथिलांचल के लोकव्यवहार में प्रयोग किये जाने वाले गीतों में आज भी विद्यापति की श्रृंगार और भक्ति रस में पगी रचनाएँ हैं। पदावली और कीर्तिलता इनकी अमर रचनाएँ हैं।

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