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चालान सिस्टम की नाकामी और परिणाम भुगतें देशवासी !

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बीते एक दशक से देश भर में यातायात नियमों और परिवहन नियमों को जमकर अनदेखी की गई। इसी के परिणाम स्वरूप देश की सरकार को टैक्स बनाने का उपाय सूझा सरकार को लगा कि टैक्स बढ़ाने से सब कुछ ठीक हो जाएगा। क्योंकि मोटर व्हीकल एक्ट 2019 अभी नया नया लागू हुआ है इसलिए ट्रैफिक पुलिस वाले भी फिलहाल खासे सक्रिय हैं। मुझे याद है की करीबन 1 से 2 दशक पूर्व जिस समय देश में प्रदूषण प्रमाण पत्र को अनिवार्य बनाया गया था तो लोगों में प्रदूषण प्रमाण पत्र बनवाने की होड़ लगी रहती थी

लोग घंटों लाइन में लगते थे और प्रदूषण प्रमाण पत्र हासिल करते थे लेकिन धीरे धीरे सिस्टम नाकारा होने लगा और लोगों ने प्रदूषण प्रमाण पत्र समेत अन्य नियम कानूनों की अनदेखी शुरू कर दी। अनदेखी इतनी बढ़ गई ट्रैफिक मैनेजमेंट से जुड़े पुलिसकर्मी चालान करने की बजाय वसूली करने में ज्यादा विश्वास करने लगे। ऐसा नहीं है कि वसूली अभी नया नियम लागू होने के बाद बंद हो गई है। कहावत है जिस तरह नया नया मुल्हा अल्लाह अल्लाह पुकारता है।

ठीक उसी तरह नया कानून लागू होने के बाद पुलिस वालों की सक्रियता भी बढ़ी हुई है और जमकर चालान काटे जा रहे हैं। आप लोग भी पुलिस की सक्रियता के परिणाम स्वरूप डरे हुए हैं। क्योंकि देश की मीडिया वर्तमान दौर में आम पब्लिक की बात करने से प्रेस कर रही है या यूं कहें की आम पब्लिक का साथ देने वाली मीडिया सीधे तौर पर सरकार और एक दल विशेष का गुणगान करने में मस्त है। समय बीतने के साथ ही कानून का पालन भी धुंधला पढ़ना शुरू हो जाएगा।


यातायात और परिवहन नियमों को बदलकर जुर्माने की राशि बढ़ा देना किसी समस्या का हल नहीं है। वर्तमान दौर में जरूरत है सिस्टम की नाकामी को सिस्टम की कार्यकुशलता में तब्दील करने की। बीते वर्षों में प्रदूषण की जांच करने वाले परिवहन विभाग से जुड़े अधिकारी सड़कों से नदारद दिखाई दिए। लेकिन ट्रैफिक पुलिस और साधारण पुलिस ने इस मामले में जरूरत से ज्यादा सक्रियता दिखाने का प्रयास किया जैसे मानो सारे कानूनों को पालन कराने की जिम्मेदारी उन्हीं की है। इस काम में जो सड़कों पर जिम्मेदारी और कर्तव्यनिष्ठा तो बेहद कम दिखाई दी लेकिन वाहन चालकों से अवैध वसूली अधिक दिखाई दी।


कानून की अगर बात करें तो मोटर परिवहन से जुड़े दो अलग-अलग विभागों के अलग-अलग कार्य होते हैं। एक विभाग जैसे हम ट्रैफिक पुलिस के नाम से जानते हैं का काम केवल यातायात के संचालन से जुड़ा है ट्रैफिक पुलिस यातायात नियमों के उल्लंघन करने के मामलों को देखती है।
दूसरा विभाग परिवहन विभाग होता है जिसका कार्य मोटरयान संचालन से संबंधित नियमों जिसमें वाहन के टैक्स फिटनेस इंश्योरेंस प्रदूषण चालक का लाइसेंस समेत अन्य दस्तावेजों की जांच का कार्य को देखना है।


लेकिन वर्तमान दौर में सिस्टम के नाकामी के कारण पुलिस और ट्रैफिक पुलिस से जुड़े लोगों का हर मामले में अनावश्यक हस्तक्षेप को सरकारी तंत्र का संरक्षण हासिल है। नियम कानून की अगर बात करें तो किसी भी पुलिसकर्मी को वाहन संचालन से संबंधी दस्तावेजों को सड़क पर खड़े होकर जांचने का अधिकार एवं इजाजत नहीं होनी चाहिए क्योंकि ट्रैफिक पुलिस से जुड़े कर्मचारियों का कार्य क्षेत्र संबंधित चौराहे से जुड़ा होता है। ठीक इसी तरह थाने और चौकी यानी कानून व्यवस्था से जुड़े पुलिसकर्मियों को भी वाहनों के दस्तावेज जांचने का अधिकार तब तक नहीं होना चाहिए जब तक कि कानून व्यवस्था से जुड़ी कोई समस्या नही हो।


इस मामले में परिवहन विभाग जिसे हम आरटीओ के नाम से जानते हैं को सक्रिय होने की जरूरत है। देश की जनता और सरकारों को इन दोनों के कार्यों पर विचार करने और पारदर्शिता लाने की जरूरत है ताकि कोई भी विभाग एक दूसरे के कार्य में हस्तक्षेप ना करें और जनता बिना वजह सरकारी अमले के उत्पीड़न शिकार ना हो

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