फैक्ट चेक : आत्मनिर्भर भारत में रेहड़ी पटरी वालों की आत्मकथा।

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आत्मनिर्भर भारत में एक और आत्मनिर्भर वेंडर की व्यथा। नोएडा सेक्टर 135 में खाने पीने की दुकान लगाने वाले विकलांग वेंडर ने प्राधिकरण को पिछली साल सिंतम्बर में पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाया था लेकिन फरवरी 2021 तक भी उनका कोई सुनवाई नही है। लेकिन इस बार की फेक्ट चेक में फर्जी वेंडर की आत्मकथा है।

नोएडा प्राधिकरण को पत्र लिखकर मदद मांगने वाला वेंडर विकलांग है। खाने पीने की दुकान लगाकर अपना और अपने परिवार की भरण-पोषण करता है। लेकिन स्थानीय पुलिस और प्राधिकरण के लोगों के द्वारा बार-बार उसे प्रताड़ित किया जाता है , क्योंकि उसके पास वेंडर लाईसेंस नही है। वेंडर का कहना है कि आखिर मेरा सर्वेक्षण क्यों नहीं जा रहा है। पथ विक्रेत अनुज्ञा के कारण जीविका चलाने में कठिनाई हो रही है।

लेकिन यहाँ सच को कुछ और निकला है। रेहड़ी पटरी संचालक एसोसिएशि के महासचिव कहते है जब इनका फार्म ही जमा नही है तो सर्वे किस बात की होनी है। लेकिन प्राधिकरण के अधिकारी से इनका सांठ गांठ है । जब टाउन वेंडिंग कमेटी के सदस्य इन से फोन पर कान्टेक्ट किया तो इन वेंडर नें स्वयं स्वीकार किया कि यह किसी कंपनी में नौकरी करता है। इन प्राधिकरण के अधिकार अपने मेहरबानी से पत्र लिखकर फर्जी करवाने की कोशिश कर रहे है, लेकिन यह टाउन वेंडिंग कमेटी के अधिकार क्षेत्र में नही है। अधिकारी चाहे तो स्वयं उसे वहाँ बिठा दे लेकिन मै सर्वे नही करूंगा।

श्री गुप्ता ने बताया कि प्राधिकरण के उच्च स्तर और सामान्य स्तर के अधिकारी अपने जानने वालों के फार्म जमा कर रहे है जबकि प्राधिकरण के ही एक वरिष्ठ प्रबंधक राजीव त्यागी पत्र लिखकर कहते है कि अब सभी फार्म आनलाईन जमा किये जायेंगे। आखिर प्राधिकरण के द्वारा यह दोहरा रवैया क्यों अपनाया जा रहा है। ऐसे ही नोएडा सेक्टर 18 और सेक्टर 59 में भी इसी प्रकार से किया जा रहा है।

ये कोई पहली खबर नहीं है जब एक फर्जी वेंडर गुहार लगा रहा है। बहुत सारे फर्जी लोग प्राधिकरण के अधिकारी तथा सर्किल आफिसर के मदद से खुब फल फूल भी रहे है। जिसका नया नामकरण किया गया है रेहड़ी पटरी माफिया। लोग अपने जान पहचान की फायदा उठाकर प्राधिकरण से वेंडिंग जोन में जगह लेते है और फिर उसे किरायें पर लगाकर पैसा कमाते है।

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