नोएडा ग्रेटर नोएडा के ग्रुप हाउसिंग में बने EWS/LIG : राईज

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नोएडा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण इस क्षेत्र को इंडस्ट्रीयल बनाने के बजाय इसे कमर्शियल औऱ आवासीय बनाने की खेल कर रही है। यहाँ पहले से ही आवासीय के लिए अतिरिक्त भूमि का उपयोग किया जा चुका है जिसके लिए सीएजी आडिट की गयी है। हालाँकि सीएजी रिपोर्ट अभी तक जनता के सामने नही आये है लेकिन निश्चित ही इसमें बड़ा खेल खेला गया है जिसमें राजनीतिक के सभी टीमों के लोग शामिल है। अगर यहाँ पर गरीबों के लिए मकान बना भी दिया गया तो गरीब को कितने मिल पायेंगे।गरीबों के नाम पर शांपिंग कम्पलेक्स वाले ही इसको अपना गोदाम बना लेंगें। जिसको दिये जायेंगे वही भी पैसे के लालच में किराया पर लगाकार फिर से झुग्गी झोपड़ी बना लेंगें।

अब पीएम आवास योजना को जामा पहनाने के लिए बिल्डर को 10 प्रतिशत कमर्शियल कंप्लेक्स बनाने की इजाजत दी जायेगी। जिससे बिल्डर मोटी कमाई कर सके। इसके अलावा कमर्शियल कंपलेक्स के ऊपर बनाये जायेंगे गरीब और शोषित वर्गों के लिए मकान जिसके लिए बिल्डर को भूमि आवंटन किए जायेंगे। गरीबों के लिए मकान बने या न बने लेकिन शांपिंग कंपलेक्स जरूर बनेंगे। जैसे नोएडा ग्रेटर नोएडा में स्पोर्टस सिटी के साथ खेल खेला गया है। बिल्डरों ने 30% हाउसिंग तैयार कर ग्राहकों से पैसा ले लिया है लेकिन स्पोर्टस सिटी नही बनाया गया। जिस पर बिल्डर को 400 करोड़ की लागत लगानी थी। ऐसे मे बिल्डर को कंपलीशन सर्टिफिकेट मिलेंगे नही और नही तो घर खरीदारों के रजिस्ट्री हो पायेंगे। यह खेल है जिसमें शासन प्रशासन राजनीतिक सभी लोग फिल्डिंग करने में लगे है।

अब ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाने वाले बिल्डर को 10 प्रतिशत कमर्शिल उपयोग के लिए लैंडयूज करने की अनुमति दी जाएगी जो कि अभी तक सिर्फ 1 प्रतिशत थी इसके बदले में बिल्डर को ग्रुप हाउसिंग में 35 % मकान EWS बनाकर देना होगा जिसके एवज में सरकार के तरफ से उनकों 2.5 लाख का अनुदान दिये जायेंगे। जिसमें पहले दो मंजिल तक कमर्शियल शांपिंग कम्पलेक्स बनाए जाएंगे उसके ऊपर गरीबों के लिए EWS मकान बनाने की योजना है। जो कि 250 से 300 वर्गमीटर के बीच का होगा। यह मकान गरीब वर्ग को 6 लाख में दिये जायेंगे जो कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आयेंगें।

क्या इस योजना के लिए अलग से जमीन आवंटित किए जायेंगे ?

नोएडा ग्रेटर नोएडा में पहले से ही 20-25 प्रतिशत EWS मकान बनाने की योजना है जो कि माननीय उच्च न्यायालय के देखरेख में मास्टर प्लान 2021 का हिस्सा है। जिसके लिए बिल्डर को पहले ही अतिरिक्त एफएआऱ दिया गया था। लेकिन आज तक योजना का पता नही चला कि यह एफएआऱ किसकों दिए गये थे और अभी तक उस पर निर्माण कार्य क्यों नहीं किए गये है। वह जमीन किसके पास में है। आखिर क्यों नही उसी जमीन का उपयोग कर लिया जाता है जिस पर एनसीआर प्लानिंग बोर्ड भी सहमत है और मास्टर प्लान में दिखाया गया है। लेकिन प्राप्त जानकारी के मुताबिक नोएडा सेक्टर 145-152 व 154 में जमीन का चयन करेंगी।

कुछ सुझाव और कुछ आपतियाँ

नोएडा शहर के वरिष्ठ नागरिक व अधिवक्ता श्री अनिल के गर्ग (RISE) RIGHT INITIATIVE FOR SOCIAL EMPOWERMENT ने अपने कुछ सुझाव और कुछ आपतियाँ दिये है जो इस प्रकार से है। उनका कहना था कि सरकार क्यों नही पहले से चल रहे प्रोजेक्ट या कमर्शियल शांपिग कंपलेक्श पर अतिरिक्त एफएआर देकर वहाँ पर भी इन मकानों के बनवाये जा सकते है इसके लिए अलग से जमीन देने की क्या जरूरत है। जब नोएडा में पहले से ही आवासीय औऱ कमर्शियल ज्यादा बने हुए है तो और आवंटन की क्या जरुरत है।

आवासीय परियोजना में प्रत्येक टावर पर दो मंजिलों की वृद्धि की अनुमति क्यों नही दी गई

सरकार और प्राधिकरण क्यों नहीं पहले से चल रहे परियोजनाओं पर दो मंजिल अधिक बनाने की अनुमति दे रही है ? पहले से बने शांपिंग कम्पलेक्स के ऊपर भी अतिरिक्त एफएआर देकर इन के ऊपर गरीबों के लिए EWS बनाना चाहिए। अगर हम 10000 Sqmts का उदाहरण लेते हैं। ग्रुप हाउसिंग की जमीन पर 10000 वर्गमीटर पर 0.25 एफएआर बढ़ाने की जरूरत है। अर्थात। अधिक अनुमत FAR 2500 Sqmts होगा या 27000 Sqfts के बारे में कह सकता है। अब बिल्डर को लगभग 300 Sqfts के प्रत्येक फ्लैट का निर्माण करना होगा। इस प्रकार से 90 फ्लैट बनेंगे। उत्तर प्रदेश में अधिक एफएआर 3.50 से 4.00 तक की अनुमति दे सकते हैं। 0.50 की वृद्धि तब हमें पीएमएवाई के लिए 180 फ्लैट मिलेंगे। आज तक, हमारे एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने तीनों प्राधिकरणों के काम की निगरानी नहीं की है।

माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की अनुपालना में एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के रिकमंडेशन के अनुसार .21.Oct.2011 को ग्रेटर नोएडा की सभी परियोजनाओं में कमजोर धारा गृह उपलब्ध कराना था। संभवतः, अधिकारियों ने बिल्डर्स को अतिरिक्त / क्रय योग्य एफएआर बेच दिया। एफएआर को 2.75 से बढ़ाकर 3.50 कर दिया गया, लेकिन एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की सिफारिश की परवाह नहीं की। ये तथाकथित अधिकतम बिल्डर्स इस एफएआर का इस्तेमाल करते थे और फ्लैटों को होम बायर्स को बेचते थे और स्टांप ड्यूटी का भुगतान नहीं करते थे, क्यों? जो स्टैम्प ड्यूटी का एक बड़ा घोटाला है। लेकिन सब चुप हैं, क्यों? इसलिए, हम अपने सभी संबंधित अधिकारियों नौकरशाही राजनेताओं से अनुरोध करते हैं कि वेकर सेक्शन हाउसिंग एंड अथॉरिटीज के लिए एक सक्रिय पहल करें ताकि किसी भी भ्रष्टाचार और अनियमितता से बचने के लिए अपने अधिकारों के लिए एक व्यावहारिक योजना बनाई जाए।

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