इकलौते लूम के सहारे चल रहा है मेरा प्यार “शालीमार”.

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इकलौते लूम के सहारे चल रहा है मेरा प्यार “शालीमार”..?
भीलवाड़ा/मांडल राजमार्ग पर कोठारी नदी की पुलिया के भदालीखेड़ा क्षेत्र में चल रहे शालीमार सूटिंग्स प्रा.लि के विवादित निर्माण कार्य ने प्रशासन की कार्यशैली को संदेह के दायरे में ला दिया है।युद्धस्तर पर बेरोकटोक चल रहे निर्माण को रोकने के लिए जिला प्रशासन को ज्ञापन और शिकायतें मिलने पर भी कार्रवाई नहीं हुई है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उद्योग को आवंटित इस करोड़ों की जमीन पर तय शर्तों की पालना नहीं हुई और कुछ समय पहले ही इसमें बेनामी सौदेबाजी से सरकार को राजस्व की भारी क्षति पहुंचा कर भूमि को बचाने का जोड़तोड़ हुआ है।भूआवंटनकर्ता को राजस्व मंडल से मिली सशर्त छूट के मुताबिक यहां 13 जून 19 तक प्रॉडक्शन चालू करना था लेकिन यहां पर न तो बिजली कनेक्शन है नहीं उद्योग को चलाने वाले अन्य साधन-संसाधन।महज एक शेड में रखे लूम के सहारे उद्योग चलाने के नाम से संबद्ध बोर्ड को दीवार से टिका रखा है।
शेड के बगल में चलने वाले निर्माण कार्य के बारे में वहां मौजूद कामगार बता रहे थे कि जल्दी ही यहां कारखाना चालू हो जाएगा।उन्होंने इस लूम को चलते भी नहीं देखा।

शालीमार सूटिंग्स प्रा.लि.के अतीत को खंगालने पर कई सनसनीखेज तथ्य सामने आए हैं।उद्योग का पंजीयन करने वाले जिला उद्योग केंद्र में पंजीयन बाद की सूचना अनुपलब्ध है।एक क्लर्क ने बताया कि जिला प्रशासन ने सूचना मांगी है।विभाग नेभी एक नोटिस 25 जुलाई को पंजीयनकर्ता को भिजवाया है।जिसकी सूचना मिलते ही प्रशासन को सूचना भेज दी जाएगी।उद्योग चले या नहीं चले?कौन मालिक है या मालिक बदल गया।इससे हमारा कोई मतलब नहीं।ये बता पल्ला झाड़ रहे जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक ने तहसीलदार भीलवाड़ा से पत्रांक 1967/68 दि,11-6 -19 को वस्तुस्थिति रिपोर्ट मांगी।तहसीलदार ने इस पर आरजिया पटवारी को जांच के लिए लिखा।पटवारी ने 5 जुलाई19 को मौका रिपोर्ट तहसीलदार को दे दी। परंतु तहसील से रिपोर्ट अब तक जिला उद्योग केन्द्र न पहुंच सकी।पटवारी की ये रिपोर्ट बिजली कनेक्शन की फाईल में कैसे जा लगी ?

सवाल यह कि तय समय में इस भूमि पर उद्योग चलने के लिए एक नहीं अनगिनत सरकारी औपचारिकताओं की जरूरत रही होगी?फिर जिला प्रशासन उद्योग केन्द्र के भरोसे क्यों है?जीएसटी, पॉल्यूशन ,लेबर डिपार्टमेंट जैसे ढेर सरकारी विभाग हैं जहां उद्योग चलाने वाले के जूते घिस जाते हैं।शालीमार प्रा.लि.तय शर्तों के पैमाने पर खरा है तो उद्योग केन्द्र और प्रशासन इस उद्योग को नियमतः चलाने में सहयोगी क्यों नहीं बन रहा है?गलत है तो तत्काल निर्माण रोकने में क्या दिक्कत आ रही है?
इनका कहना है…?
नए निदेशक रवींद्र चौधरी का कहना है कि सब कुछ नियमों के तहत हो रहा है।
बिजली कनेक्शन नहीं हो रहा है।फाईल चलाई जिसे अजमेर भेज दिया गया है। डीजी सेट की मदद से इसे चलाने की कोशिश की, पर प्रशासनिक मदद नहीं मिल रही है।
–अशोक जैन,स्वतंत्र पत्रकार 9414211451

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