बढ़ती जनसंख्या की बोझ तले दबे अर्थव्यवस्था। 2% टांजेक्शन टैक्स लगाने की मांग

Spread the love

भारत में एक तरफ जनसंख्या बढ रही है तो दूसरी तरफ आय कम होती जा रही है। आमदनी अट्ठनी और खर्चा रुपया हो चुका है। जिसके -कारण हर भारत सरकार को हर साल 7-8 लाख करोड़ रूपया रिजर्ब बैंक और दूसरे बैंक से कर्ज लेने के लिए विवश होना पड़ता है। पिछले विच वर्ष में ला्ॅक डाउन के कारण यह स्थिति और बद से बदतर हुई है। दूसरे तरफ वोट बैंक के नाम पर फ्रि में बांटने वाली स्कीम भी भस्मासूर की तरफ भारत के अर्थ व्यवस्था को अपने गिरफ्त में ले लिया है। लाॅक डाउन के कारण सरकार को राजस्व कम प्राप्त हुई है और खर्च ज्यादा जिसके कारण राजकोषीय घाटा और भी बढा है।

जाने माने अधिवक्ता अश्वनि उपाध्याय जो कि पीआईएल मैन आफ इंडिया के नाम से जाने जाते है उनका सरकार को सलाह है कि भारत सरकार इम्पोर्ट टैक्स को छोड़कर सभी टैक्स को हटा दे। जिसमें इन्कम टैक्स और जीएसटी भी शामिल है। अब आपके मन में यह विचार उठ रहा होगा कि आखिर ये कैसा सुझाव है। तो आपको बता दूं कि उन्होने भारत सरकार को डायरेक्ट टैक्स लगाने का सलाह दिया है। उनका कहना है कि अगर सरकार सभी ट्रांजेक्शन पर 2% का टैक्स लगा दे तो सरकार का राजकोषीय घाटा समाप्त हो जायेगा।

वर्ष 2019-20 के दौरान बैंक के माध्यम से 3475 लाख करोड़ का ट्रांजेक्शन किया गया। इसमें से सरकार और बैंक के बीच का लेन-देन 1275 लाख करोड़ को अगर कम कर देते है। तो शेष राशी 2200 लाख करोड़ बचती है जो कि आम लोग, व्यापारियों के बीच लेन-देन किया गया। सरकार अगर सीधे-सीधे 2% की बैंकिंग ट्रांजेक्शन टैक्स लगाने पर 44 लाख करोड़ रुपये की राजस्व की प्राप्त होगा। जबकि पिछले वित वर्ष के दौरान 41 लाख करोड़ की प्राप्ति सरकरा को हुआ।

अगर 100 रुपये से बड़ा नोट और 5 हजार से ज्यादा की ट्रांजेक्शन (कैश) लेन-देन बंद होना चाहिए। जिससे कैश लेन-देन बंद हो जायेगा और बैंक से लेन-देन बढेगा। जब यह ट्रांजेक्शन बढता है तो सरकार इस पर 2% के बजाय 1% किया जा सकता है।

100 रुपया का नोट और 5000 से ज्यादा के कैश लेन देन बंद होने पर कालाधन, भ्रष्ट्राचार, हवाला कारोबार , आतंकवाद मानव तस्करी , नशा तस्करी जैसी समस्या बहुत हद तक समाप्त हो जायेगा। इसके साथ ही राजनीति स्वच्छ हो जायेगी और माफियाओं के कमर टुट जायेंगे।

जातिवाद, माओवाद, नक्सलवाद, अलगावबाद, आतंकवाद जिसका फंडिग हवाला के जरिये होता है। यह सब कालाधन के माध्यम से किया जाता है। अगर 100 की नोट और 5 हजार से ज्यादा लेन देन कैश होने पर लगा दिया जाय तो काफी समस्या का समाधान हो जायेगा। इसके साथ ही 50 हजार से ज्यादा के लेन-देन पर आधार कार्ड जरूरी कर दिया जाना चाहिए। जिससे घुसखोरो, जमाखोरो, मुनाफाखोरो, मिलावटखोरो , मानव तस्करों और काले कुबेरो के कमर टुटेगा और यही होनी भी चाहिए।

ज्ञात हो कि बाबा रामदेव भी रामलीला ग्राउण्ड से इस तरह के टैक्स की मांग कर चुके है। ऐसा टैक्स निश्चित तौर पर सरकार को राजस्व बढाने और राजकोषीय घाटा कम करने के साथ-साथ महंगाई दर कम करने में भी निश्चित रूप से मदद मिलेगा। फिर कोई 15 की नारियल 150 की नही बेचेगा।

%d bloggers like this: