क्या फेयर एंड लवली नें काली भैस को गोरी कर दिया ?

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आजकल बाबा V/S आईएमए का विवाद जोड़ों पर है। कई लोग इसे आयुर्वेद V/S एलोपैथ भी कह रहे है। बात यही तक नही रूकी है लोग इसे सनातन धर्म को और क्रिश्चियन धर्मांतरण से जोड़कर भी देख रहे है। जहाँ बाबा लगातार बालिंग कर रहे है वही अब आईएमए अब बैकफुट पर आकर खेलने लगी है। देश में सभी के पास स्वतंत्रता का अधिकार है , बाबा रामदेव भी शायद इसी दायरे में आते होंगे। उनके पास भी अभिव्यक्ति का अधिकार अवश्य होंगे।

ऐसे में क्या ऐलोपेथिक पर सवाल उठाना अभिव्यक्ति के अधिकारों का उलंघन है, अगर नही तो फिर किस लिहाज से बाबा रामदेव पर 1 हजार करोड़ का मानहानि किया गया। जबकि मानहानि का केस बनता है नही है। बाबा रामदेव नें कोई पहली बार इस तरह कि बात नही किया है। क्या यह बात सच नही है कि ज्यादातर लोगों की मौत रेमडेसिविर और दूसरे स्ट्रायड इंजेक्शन लगाने के कारण हुई है। आक्सीजन एक कारक था और है लेकिन आक्सीजन से ज्यादा बड़ा रोल यह इंजेक्शन और दवाईयों का रहा है।

बात इतने तक नहीं है पहली लहर के बाद बड़ी संख्या में लोग अवसाद में चले गये , जिसके कारण आत्महत्या करने वालों के संख्या अचानक ही बढ़ा था। कई बार इसको संज्ञान में लाने की कोशिश किया गया। लेकिन एलोपैथ के नशे में चुर सरकार और सरकारी संस्थानों नें कभी इस पर ध्यान नही दिया। जब आपके पास एलोपैथी में ईलाज था तो आपने लोगों को काढा पीने के लिए क्यों कहा ? अगर आपने काढा पीने के लिए कहा तो निश्चित तौर पर यह मान लेना चाहिए कि आयुर्वेद में दम है। देश-विदेश के कोविड सेंटर मे लगातार योग अभ्यास करवाया जा रहा है। सबको पता है कि योग अभ्यास से आक्सीजन की पूर्ति किया जा सकता है। फिर भारत में लगातार हो रहे योग का विरोध का कारण क्या है ? योग भारत के संस्कृति है, योग भारत के सभ्यता है, योग भारत के जीवन पद्धति है।

सोशल मिडिया भी आजकल इस बात पर अपना पूरा रूख अख्तियार किये हुए है। एक तरफ जहाँ आईएमए को धर्मांतरण का केन्द्र बताया जा रहा है वही दूसरी तरफ उसके अस्तित्व पर भी सवाल उठाये जा रहे है। इसके साथ ही अब लोग कांग्रेस के स्थापना और आईएमए का स्थापना को एक दूसरे से जोड़कर देख रहे है। जिसे आज तक हम सरकारी संस्था समझते रहे है वह सरकारी नही एक निजी एनजीओ निकला।

बाबा की दवाई कोरोनिल पर शुरु से ही विवाद रहा है। जब शुरु में इसे लांच करने की कोशिश की गयी तो हर संभव प्रयास किया गया कि इसको रोका जाय। इसके बावजूद बाबा रामदेव नें कोरोनिल को लांच कराने मे सफल रहे। यह लांचिंग देश के उसी मिडिया चैनल पर बैठकर किये गये थे जिस पर बैठकर आज बाबा पर सवाल उठाये जा रहे है। खैर विवादों से तो बाबा का नाता रहा है। दूसरी बात आज विवाद एक बड़ा एटवरटाइजमेंट का तरीका है। इतना एडवरटाईजमेंट तो सभी चैनल को 24×7 चलाया जाय तो भी नही होगा। क्योंकि अक्सर आपने देखा होगा कि जिस फिल्म के लिए विवाद उठा वह सबसे ज्यादा देखा गया। इसलिए अब हर फिल्म में विवादित कंटेन्ट डाल दिये जाते है।

इस विवाद में बाबा रामदेव ने 25 सवाल पूछे थे, लेकिन अभी तक किसी का भी जबाब नही मिला है। निश्चित तौर पर बाबा रामदेव के सवालों का जबाब एलौपैथ के पास नही होगा। क्योंकि एलौपैथ के पास किसी भी चीज का परमानेंट समाधान नही है। दूसरी बात ऐलौपैथ कट और किल के सिद्धान्त के साथ चलता है।

या काट दो या मार दो। दुनिया में सबसे ज्यादा महंगा ईलाज ऐलौपैथ मे है जैसा कि आमिर खान के एक कार्यक्रम में बताया गया, और बाबा रामदेव भी वही बात कह रहे है। आखिर एक पानी के बोतल जो सिर्फ वाष्पीकरण करके बेचा जाता है जिसके लिए हजारों रुपये वसूल लिये जाते है। यहाँ यह बताना होगा कि यह पानी ग्लुकोज के तरह लोगों को एक्सट्रा चढ़ा दिया जाता है। आखिर इस पर सवाल क्यों नही उठना चाहिए कि पानी में क्या है जो हजार रुपये के बेचे जाते है और गरीब मरीजों के साथ लुट किया जाता है।

आखिर ब्राण्डेड कंपनी और जेनेटिक में भाव में इतना फर्क क्यों है जबकि जो साल्ट उसमें है वही साल्ट उसमें भी है। ऐसे में क्या बाबा रामदेव के बात को सही नही माना जाना चाहिए कि ऐलोपैथ ड्रग्स माफियाओं का सिस्टम बनकर रह गया है। क्या आज की ऐलोपैथी लैब से ज्यादा एडवांस पूराने जमाने के नारी वैध नही था जो नब्ज देखकर ही बीमारी बता दिया करता था। 2 पुरिया देकर भेज दिया करता था और उसी से स्वस्थ्य हो जाया करते थे। आज भी पाक शास्त्र सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है जिसे कीचन क्लिनिक भी कहा जाता है। आयुर्वेद के हिसाब से सारा जड़ी बुटी आपके रसोई मे है जिससे ईलाज हो सकता है, तो करने में हर्ज क्यों,

बाबा ने ईमेरजेंसी में एलौपैथ के ईलाज से परहेज नही बताया है, लेकिन जब फेयर एंड लवली लोगों को गोरा बनाने के नाम पर ठगता है तो उस पर सवाल क्यों नही उठाना चाहिए। अगर पहले मिट्टी से हाथ धोने से ही कीटाणु मर जाते थे तो साबुन क्यों बनाया गया, अगर साबुन से कीटाणु मर जाते है तो फिर हैंड सेनेटाईजर क्यो ? अगर सेनेटाइजर से ही कीटाणु मर जाता होगा तो फिर बार-बार पानी बहाने की जरुरत क्यों ? क्या आईएमए बतायेगा कि अभी तक कितने काले भैस को फेयर एंड लवली लगातार गोरा किया गया है।

योगी, रामदेव अब सीसीएसयू के कोर्स में शामिल किये गये।

योग साधक व भारतीय संस्कृति के लिए एक बार फिर से गर्वान्वित होने का क्षण है। क्योंकि चौधरी चरण सिंह विश्व विद्यालय में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ के ‘हठ योग का स्वरूप और साधना’ को पाठक्रम मे शामिल किया गया वही योग गुरू बाबा रामदेव की पुस्तक ‘योग साधना एवं योग चिकित्सा रहस्य’ पढ़ाये जायेंगे।

रविवार को दर्शनशास्त्र विषय की बोर्ड आफ स्टडीज(बीओएस) में इन दोनों पुस्तक को शामिल कर लिया गया। यह माना जा रहा है कि वर्तमान समय में दोनो ही चर्चित है शख्शियत है और इनका योगदान समाज के लिए अति महत्वपूर्ण है। इसके अलावा जग्गी वासुदेव की ईशा क्रिया के साथ ओसो को भी कोर्स का हिस्सा बनाया गया है।

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