3 महीने में सुपरटेक एमराल्ड के दोनों टाॅवर गिराएं, निवेशकों का पैसा 12% ब्याज के साथ लौटाए: सुप्रिम कोर्ट

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नोएडा सेक्टर 93 की एमराल्ड की 40 मंजिला बिल्डिंग को और 3 महीने के अन्दर गिराने का आदेश देश के सबसे बड़ा न्यायलय नें दिया है। इसके साथ ही निवेशकों के पैसे को 12% ब्याज सहित लौटाने के लिए भी बिल्डर को कहा गया है। 40 मंजिला बने इन दोनों टाॅवर में एक-एक हजार फ्लैट है।

सुप्रिम कोर्ट नें कहा कि जब नक्शा पास हुआ था उसके बाद प्राधिकरण से दोनों टाॅवरों की अनुमति नही ली गई थी। यह टाॅवरों नियमों का उल्लंघन करके बनाया गया है। सुप्रिम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचुड़ और एमआर शाह की बैंच नें यह फैसला सुनाया है। कोर्ट नें बिल्डिंग को ध्वस्त करने के साथ ही निवेंशकों के पैसे 12 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने के लिए कहा है। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि बिल्डिंग को गिराते हुए आस-पास के में बने फ्लैटों को सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। ताकि किसी को भी किसी प्रकार से क्षति न हो।

इसके अलावा सुपरटेक की तरफ से आरडब्लूए को 2 करोड़ का हर्जाना भी देना होगा।

24 फ्लोर की मंजूरी लेकर 40 फ्लोर बनाए गए। आरडब्लूए से नही लिया गया अनुमति

नोएडा प्राधिकरण ने 2006 में सुपरटेक को 17.29 एकड़ जमीन (लगभग 70 हजार वर्ग मीटर) जमीन सेक्टर 93 ए में आवंटित की थी। इस सेक्टर में एमेराल्ड कोर्ट ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट के तहत 15 टाॅवरों का निर्माण किया गया था। जिसके लिए प्रत्येक टाॅवर में 11 मंजिल बनाने की अनुमति ली गई थी। 2009 में नोएडा प्राधिकरण के पास सुपरटेक बिल्डर ने रिवाइज्ड प्लान जमा किया।

नये प्लान के मुताबिक एपेक्स व सियान नाम से दो टाॅवरों के लिए एफएआर खरीदा गया। बिल्डर नें दोनों टाॅवरों के लिए 24 फ्लोर का प्लान प्राधिकरण से मंजूर करा लिया। लेकिन बिल्डर का मन तो इतने से भी नही भरा और बिल्डर नें 40 फ्लोर के हिसाब के 857 फ्लैट बनाने शुरु कर दिए। जिसमें से लगभग 600 फ्लैट बुकिंग हो गई और ज्यादातर फ्लैट कि रकम भी जमा करानी शुरु कर दी।

11 मंजिल टाॅवर के बीच जब बनने लगे दो ऊँचे टाॅवर

सेक्टर 93 ए के परिसर में सभी 15 टाॅवर 11 मंजिल के बने है लेकिन जब इन टाॅवरों के बीच दो ऊँचे टाॅवर बनने लगे। जिसे देखकर आरडब्लूए नें विरोध किया। मामला हाईकोर्ट में पहुँचा और बताया गया कि जिस एरिया में यह टाॅवर बनाया जा रहा है बिल्डर इसको ग्रीनरी एरिया बताया था। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि यूपी अपार्टमेंट एक्ट की शर्तों के तहत कम से कम 60 प्रतिशत बायर्स का अनुमति लेना जरूरी था जो कि नही लिया गया है। बिना बायर्स के सहमति के इसका अप्रुवल नही दिया जा सकता है। साथ ही यह बात भी सामने आयी कि बिल्डिंग का बेस 24 मंजिल के हिसाब से बनाया गया है लेकिन अब उसे 40 मंजिल का बनाया जा रहा है।

हाईकोर्ट ने 2014 में दिया था गिराने का आदेश

इस मामले में चल रही सुनवाई के दौरान 11 अप्रैल 2014 को हाईकोर्ट नें दोनों टाॅवरों को गिराने का आदेश दिया था। उस समय एपेक्स 21 मंजिस और सियान 17 मंजिल बन चुकी थी। इसके साथ ही न्यायलय में घर खरीदारों तथा निवेशकों को दो विकल्प दिया था। जिसमें 14% ब्याज के साथ रिफंड करने या फिर दुसरे प्रोजेक्ट मे शिफ्ट करना शामिल था।

बिल्डर नें खटखटाया सुप्रिम कोर्ट का दरबाजा

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ बिल्डर नें सुप्रिम कोर्ट के दरवाजा खटखटाया। सुप्रिम कोर्ट नें बिल्डिंग गिराने के आदेश पर स्टे लगा दिया। बिल्डर का कहना था कि पूरा बिल्डिंग को गिराना अव्यवहारिक है। इसमें जितने तक अनुमति है उसे कैसे गिराया जा सकता है। जिन बायर्स नें फ्लैट बुक किये है उनके हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

इसी सुनवाई के दौरान सुप्रिम कोर्ट नें नोएडा प्राधिकरण पर भी सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि नोएडा प्राधिकरण तो भ्रष्ट्राचार में डुबी हुई है। इसके चेहरे से ही नही बल्कि आंख, नाक और कान से भी भ्रष्ट्राचार टपकता है। खैर अब 3 महीने के अन्दर ही दोनों टाॅवरों को ध्वस्त करने का आदेश दिया गया है ।

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