google.com, pub-3648227561776337, DIRECT, f08c47fec0942fa0

ब्रह्मा, विष्णु और महेश के अवतार हैं दत्तात्रेय, इस दिन को मनाई जाती है

Spread the love

हिंदू धर्म में कहा जाता है कि किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले भगवान की पूजा-अर्जना की जाती है. इसके बिना किसी भी कार्य को करना अशुभ माना जाता है. हिंदू धर्म में 33 करोड़ देवी-देवताओं को पूजा जाता है लेकिन उनमें से भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश को सबसे ऊंचा स्थान दिया गया है. इन्हीं तीनों देवों का अवतार भगवान दत्तात्रेय को माना जाता है. जिनकी पूजा हर साल आने वाली दत्तात्रेय जयंती पर की जाती है.

ब्रह्मा, विष्णु और महेश के अवतार हैं भगवान दत्तात्रेय

दत्तात्रेय जयंती इस साल 11 दिसंबर को पड़ रही है. भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश के तीनों अवतार भगवान दत्तात्रेय को गुरूदेवदत्त के नाम से भी जाना जाता है. भगवान दत्तात्रेय के बारे में कहा जाता है कि इन्होंने 24 गुरुओं से शिक्षा ली थी. ये महर्षि अत्रि और उनकी सहधर्मिणी अनुसूया के पुत्र थे. इनके दो भाई चंद्र देव और ऋषि दुर्वाशा थे. चंद्रमा को ब्रह्मा और ऋषि दुर्वाशा को शिव का रूप माना जाता है. दत्तात्रेय का जन्म हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा तिथि को प्रदोषकाल में हुआ था. इसलिए इस दिन को दत्तात्रेय जयंती के रूप में मनाया जाता है.

भगवान दत्तात्रेय की रोचक कथा

भगवान दत्तात्रेय के जन्म की कथा काफी रोचक है. इस कथा में कहा जाता है कि माँ अनुसूया ने ब्रह्मा, विष्णु, महेश जैसे पुत्र की प्राप्ति के लिए कड़े तपस्या में लीन हो गई थीं, जिसकी वजह से तीनों देवों की अर्धांगिनियां सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती को जलन होने लगी थी. इन तीनों ने अपने पतियों से कहा कि वे भू लोक पर जाकर देवी अनुसुया की परीक्षा लें. भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अपनी जीवनसंगिनियों के कहने पर पृथ्वी लोक चले गए. त्रिदेवों ने संन्यासी का वेश धारण करके अनुसुया के पास जाकर भिक्षा देने को कहा, साथ ही उन्होंने एक शर्त भी रखी कि वे भिक्षा तभी लेगें जब वह नग्ग अवस्था में होकर भिक्षा दें.

त्रिदेव की इन बातों को सुनकर माता अनुसुया हैरत में पड़ गई. उसके बाद थोड़ा संभलकर उन्होंने मंत्र का जाप कर अभिमंत्रित जल तीनों संन्यासियों पर पानी की छींटे डाले. पानी की छींटे पड़ते ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों ही शिशु रूप में बदल गए. माता अनुसुया ने शिशु रूप में लेने के बाद उन्हें भिक्षा के रूप में स्तनपान करवाया. उन्होंने अपने पति अत्रि से इन तीनों बालकों के बारे में बताया. इसके बाद अत्रि ने तीनों बालकों को गले से लगा लिया और अपनी शक्ति से तीनों बालकों को एक ही शिशु में बदल दिया. जिसके तीन सिर और छ: हाथ थे. अनुसुया और अत्रि से प्रसन्न होकर त्रिदेव ने उन्हें वरदान के रूप में दत्तात्रेय रूपी पुत्र प्रदान किया, जो इन तीनों देवों का अवतार था. दत्तात्रेय का शरीर तो एक था लेकिन उनके तीन सिर और छ: भुजाएं थीं.

%d bloggers like this: