डासना: काफिर के मंदिर और मजहबी शांतिदूत, वसीम रिजवी का गला 11 लाख की

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डासना मंदिर का मामला दिन-व-दिन उलझता ही जा रहा है। नकली कहानी पानी पीने से शुरू होने के बाद मामला को अन्तर्राष्ट्रीय मामला बना दिया गया। यहाँ यह भी कहा जाना ठीक होगा कि इस देश के लिए वामपंथ एक जहर है। तथाकथिक पत्रकार जो कि अन्तर्राष्ट्रीय चैनल में काम करते है उनकों सिर्फ और सिर्फ पैसे और ऐसो आराम से मतलब है। जबकि एक पत्रकार के लिए यह जानना ज्यादा जरूरी होता है कि दूसरा पक्ष क्या है।

एक पक्ष की पत्रकारिता और सोशल मिडिया की रिपोर्टिंग जिसमें युृट्यूबर सिर्फ अपना पैसा बनाने और सब्सक्राइबर को बढ़ाने के लिए समाज मे नफरत फैला रहे है। ज्यादा से ज्यादा लाईक और सब्सक्राइब तो चाहिए ही चाहिए उसके अलावा 45% अपने आपको पत्रकार कहने वाले लोग एक विशेष मजहब के है। एक तो उनकी अखबारें छपती नहीं है अगर छपती है तो उनके अखबार पर आम एक महीना नजर रखिये तो आपको साफ-साफ नजर आयेगा कि इस अखबार का समाज के कोई लेना देना नही है। एक दो खबर अगर उसने लगा भी दिया तो मजबूरी में किसी से खर्चा लेना होता है।

अगर हम सिर्फ दिल्ली की बात करें तो 600 से ज्यादा अखबार रजिस्टर्ड है। छपते कितने है इसका तो भगवान ही मालिक है। लेकिन वर्तमान के दिल्ली सरकार खुब दबाके पैसे दे रही है सिर्फ इसलिए कि उनका वोट बैंक बना रहे। अधिकतर लोग दिल्ली से उर्दू अखबार चलाना पसंद करते है बजाय कि हिंदी। कारण वही है सरकार को एक मजहब विशेष का वोट चाहिए। यहाँ हमे यह भी देखना होगा कि दिल्ली में 98% लोग उर्दू पढ़ना लिखना नहीं जानते है। फिर लोग दिल्ली से उर्दू अखबार क्यों चलाना चाहते है। इसके अलावा दिल्ली के आस-पास के अखबार भी दिल्ली की खबरे छापती है। जिस जिलें भर के स्टेट में 600 से ज्यादा सिर्फ अखबार वाले हो वहाँ भी सच की सच और झूठ नहीं बताया जा रहा है। क्योंकि इनमें से 45% किसी खास एजेंडे पर काम में लगे है। इसके अलावा कुछ पार्टी प्रचारक है। जो थोड़ा बचता है उन्हें पत्रकारिता के बारे में कोई ज्ञान नहीं है बस यु-ट्यूब चलाना है। कुछ ज्ञानी पत्रकार बंधु उनका अपना ही लक्ष्य और विचारधारा है वामपंथ के नाव मे सवार है। सबसे ज्यादा मजबूरी हिंदी अखबार वालों की है इसलिए उनका कोई धर्म नही है।

चलिये आते है डासना मंदिर के उन्ही सवालों पर कि आखिर तौसिफ को यादव नें मारा क्यों ? तो बात ये है कि इस 14 साल की लड़के को तो काफिरों के मंदिर में जाकर उल्टी सीधी हरकते करनी थी जैसा उसे सिखाया गया होगा। गलती तो यादव का है जिसने इस नाबालिग को मारा। मंदिर के बाहर लगे 3 पानी के नलके उसे नहीं दिखा। गेट पर लगे बोर्ड उसे नहीं दिखा। जिसमें साफ-साफ लिखा है मुसलमान को मंदिर में आना वर्जित है। लेकिन 500 मीटर मंदिर के अन्दर उसे शिवलिंग दिखा जिस पर उसे टायलेट करना था। इसी बीमारी को शायद जेहाद कहते है। इस बीमारी में अंधा हो जाता है और उसे सिर्फ चोरी डकैती , मार काट के अलावा कुछ नही दिखता है।

चलिये आते है नाबालिग वाली बात है। आखिर 14 साल के बच्चे नाबालिग कैसे हो जाते है और हमारे कानून में उसे विशेष छुट क्यों दिया जाता है। जब एक 65 साल के बुढ़ा मौलवी 9 साल की लड़की से शादी करता है क्या उस समय वह लड़की बालिग रहती है। क्या इस जुर्म के लिए कोई सजाए मौत का प्रावधान है। अरे 9 साल की लड़की के लिए नही उस बुढ़े मियाँ जी के लिए। अगर किसी भी मजहब में बच्चे बढ़ाने के लिए 9 साल की लड़की की शादी की जाती है तो उस मजहब के 14 साल के लड़के को भी बालिग मानी जानी चाहिए।

अब बात कर ले वसीम रिजवी जी का।

इनका जान तो खतरे में है। आखिर इन्होंने दुनिया के सबसे शांतिप्रिय मजहब के मजहबी विश्वास को ठेस पहुँचाने का काम जो किया है। इन्होंने कुरान शरीफ से उन 26 आयत को हटाने की पेटीशन भारत के सर्वोच्चय न्यायालय में जो डाल दिया है। इन्होंने पेटीशन डाला शांति समाज के लोग गला काटने का फरमान दे दिया। 11 लाख का ईनाम भी रखा गया है। एक बात और कहना चाहता हूँ अगर आप लोग सहमत हो तो । वसीम रिजवी को जलील और जाहिल कहने वाले एक वकील जिसका औकात रिजवी के सामने ढेले भर की नही है। फतवा जारी कर गला काटने और 11 लाख के ईनाम देने वाले भी एक वकील है। लेकिन उसका विश्वास भारत के संविधान में नही बल्कि मजहबी किताब में है।

चलिये एक बात बताईये अगर किसी नें देशभक्त रिजवी का गला भी काट दिया जैसा कि रिजवी नें कहा है कि तुम ये मत समझों की हाथ सिर्फ तुम्हारे पास है हाथ हमारे पास भी है और गिरेबान तुम्हारे पास भी है। किसी नें अगर इनका गला बाकई काट भी दिया तो 11 लाख कौन देगा। अगर उसे किसी नें 11 लाख दे भी दिया तो वो 11 लाख का करेगा क्या ?

अभी हाल फिलहाल में ही दिल्ली में 26 जनवरी को 2.5 करोड़ डालर के चक्कर में झंडा लगा दिया उससे क्या हिंदुस्तान उसका हो गया। लेकिन उसके बाद उस खालिस्तानी का हाल किसी नें पूछा है। इन 11 लाख लेने वालों का भी तो यही होगा। उत्तर प्रदेश है और निश्चित तौर पर उत्तर प्रदेश पुलिस गाड़ी पलटने और हर रोज चिडियाँ मारने के आदि है। योगी जी ने भी तो कहा है कि पुलिस अपराधियों के गोली चलाने का इंतजार नहीं करेगा। उसके बाद यह भी कहा है कि अपराधी सोच ले कि उसे रहना कहाँ है और जाना कहा है। प्रदेश में रहना है तो मानसिकता ठीक रखे।

एक बात और ये ईनाम देने वाली बात कहाँ से आती है अगर वकील साहब में है हिम्मत तो उसे जाकर कोर्ट में मुकाबला करना चाहिए। मै देश के बीजेपी सरकार से भी सवाल करना चाहता हूँ कि देश संविधान से चलेगा या सरिया है। 70 साल तक लोग राम पर सवाल उठाते रहे किसी नें किसी का गला काटा क्या ? तो फिर बीजेपी प्रवक्ता शाहनबाज हुसेन ने क्यों विरोध किया ? ये बीजेपी का लाईन है या उनका अपना? क्योंकि उनका अपना हो सकता है । बीजेपी को भी इस पर जबाब देना चाहिए। विश्व शांति के बात करने वाले हमारे प्रधानमंत्री को खुलकर इस बात की समर्थन करना चाहिए । क्योंकि मंथन के बाद ही विष या अमृत निकलता है।

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