धर्मांतरण और घर वापसी, हिंदू, क्रिश्चियन और मुस्लिम

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धर्म ( पालि : धम्म ) भारतीय संस्कृति और भारतीय दर्शन की प्रमुख संकल्पना है। ‘धर्म’ शब्द का पश्चिमी भाषाओं में किसी समतुल्य शब्द का पाना बहुत कठिन है। साधारण शब्दों में धर्म के बहुत से अर्थ हैं जिनमें से कुछ ये हैं- कर्तव्य, अहिंसा, न्याय, सदाचरण, सद्-गुण आदि। धर्म का शाब्दिक अर्थ होता है, ‘धारण करने योग्य’ सबसे उचित धारणा, अर्थात जिसे सबको धारण करना चाहिये। हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, जैन या बौद्ध आदि धर्म न होकर सम्प्रदाय या समुदाय मात्र हैं। “सम्प्रदाय” एक परम्परा के मानने वालों का समूह है। ऐसा माना जाता है कि धर्म मानव को मानव बनाता है।

आज मैं आपको धर्मांतरण और घर वापसी के तीन विडियों दिखाने वाला हूँ। जिसे देखकर आप स्वंय ही समझ जायेंगे। इसके बाद भी नही समझ पाये तो आपको शायद ही कोई समझा पाये।

पहला विडियों है क्रिश्चिय धर्म को अपनाने की प्रक्रिया। आप देखकर समझ जायेंगे की किस प्रकार से पूरे नौटंकी बना रखा है। दूसरी सबसे अहम बात ये पढे लिखे मिशनरी जो आत्मा को नही मानते वह भी यहाँ पर आत्मा की बाते कर रहे है। शायद उनको भी समझ में नही आ रहा है कि वो कर क्या रहे है।

ये दूसरा विडियों पाकिस्तान की जहाँ पर एक हिंदू का धर्मांतरण कराया जा रहा है। आप स्वयं देखिये क्या इस जाहिलियत तरीके से कोई धर्म को स्वीकार कर सकता है। कोई धर्म को धारण कर सकता है क्या ? यह सीधा सीधा मानव को एक राक्षसी प्रवृति दिया जा रहा है।

तीसरा तरीका है धर वापसी का। आप स्वयं देख लिजिये।

एक विडियों और दिखा रहा हूँ जिसमें क्रिश्चियन से सनातन में लौटे व्यक्ति अपना अनुभव साझा किया है।

चौथा विडियो जिसमें धर्मांतरण के लिए प्राप्त फंड का कुछ विवरण दिया गया है, जो कि विदेशो से मिल रहे है। यह तो कुछ प्रतिशत है इसके सैकड़ो गुणा तो पता ही नही चलता है। जिसके बल पर जाहिल जिहादी मुक बधिर बच्चों को भी नही छोड़ रहे है।

आज धर्मांतरण की चर्चा तारों तरफ है लेकिन बड़े बड़े मिडिया हाउस चुप है। इसका कारण है या तो उनको इससे टीआरपी नही मिलते है या फिर चुप रहने की कीमत मिलते है। लेकिन कुछ चैनल है जो लगातार इन पर बहस करते है, जिसमें सुदर्शन चैनल प्रमुख है और मै उस चैनल के पूरी टीम को नमन करता हूँ। क्योंकि आज के समय में भी जिस पर टीआर पी नही मिलता हो उस पर चैनल लगातार काम कर रही है। जबकि बिना टीआर पी के किसी चैनल को चलाना संभव नही हो पाता है। ऐसे असंभव कार्य को सुदर्शन चैनल ने कर दिखाया है।

क्योंकि हिंदुओं को तो सिर्फ चैनल की शोर शराब पसंद है इसके अलावा उनमें इतनी अशिक्षा भर चुकी है । यहाँ यह भी कहना होगा कि हिंदू बिछाए गए जाल सोशल मिडिया में उलझ गया है। उसे सिर्फ ट्वीटर ट्रैण्ड चलाने और फेस बुक लाईक करने के अलावा कुछ समझ में नही आ रहा है कि हम इस हालात से निपटे। हम समझदार हिंदुओं से आग्रह करते है कि इस विडियों को ज्यादा से ज्याद शेयर करे और जब भी आपको समय मिले तो सुदर्शन और आस्था जैसी चैनलों को देखो।

नमस्कार

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