होम बायर्स के लिए असमंजस की स्थिति, रेरा के हस्तक्षेप सराहनीय

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नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के तीनों प्राधिकरण को मिलाकर लगभग 2800 के आस पास प्रोजेक्ट चल रहे है जिसमें से माना जा रहा है कि 50% से अधिक एनपीए हो चुका है। रेरा ने एक सराहनीय पहल करते हुए वर्तमान ने चल रहे आवासीय परियोजनाओं को लेकर कभी नया और सख्त नियम बनाये है। अब रेरा चल रहे परियोजना के निर्माण की गुणवता पर भी नजर रखेगी।

भविष्य मे शाहबेरी जैसी घटना न हो इसके मध्यनजर रेरा ने क्वालिटी कन्ट्रोल की जिम्मेदार अपने हाथ मे ले लिया है। इस कदम को राईज ने अच्छा पहल बताया है। लेकिन एक सवाल भी है कि आखिर यह नियम सभी परियोजनाओं पर लागु क्यों नही किया गया है ? संभवत: नया नियम जो बनाया गया है भविष्य मे आवासीय के साथ-साथ कमर्शियल तथा आईटी/आईटीज पर भी लागु किये जा सकते है।

तीनों प्राधिकरणो मे कुल मिलाकर 2800 के आस पास प्रोजेक्ट चल रहे है जिसमे से लगभग 50 % प्रतिशत परियोजना मे बिल्डर्स परियोजना को पूरा करने और जमीन की बकाया पैसे को देने की स्थिति मे नही है। 3-4 बार पहले ही भूमि बकाया के लिए समय ले चुका है साथ ही ओटीएस one time settlement) भी करवा चुकी है। इसके बाद भी बकाया देने मे नाकाम रही है।

लेकिन भविष्य मे आने वाली ऐसी समस्या से बचने के लिए परियोजना किस स्थिति मे है और परियोजना को पूरी करने मे लगे बिल्डर की क्या स्थिति है इसकी निगरानी करना बहुत जरूरी है। ताकि भोले भाले घर खरीदारों को सही स्थिति के बारे मे समय-समय पर जानकारी दिया जाना चाहिए। आज जब कि भोले-भाले घर खरीदार इस असमंजस मे है कि बांकी पैमैेट करना चाहिए या नही ? क्योंकि उनके पास बिल्डर के बारे मे कोई जानकारी नही है कि वह परियोजना को पूरा भी कर पायेगा या नही। इसलिए समय-समय पर इनकी आर्थिक हालात को भी खंगालते रहने की जरूरत है जो कि रेरा या किसी सरकारी संस्था के द्वारा किया जाना चाहिए और इसको आम जनता के सामने रखना आवश्यक है। जैसा कि ज्ञात हो रहा है कि अधिकतर बिल्डर ने परियोजना से बड़ी मात्रा मे पैसे निकाल लिया है और अब चाहता है कि ऐसे ही देरी होते रहे।

ऐसे मे कुछ महत्वपूर्ण बिंदूओ. पर जानकारी रखना ग्राहक के हित मे होगा।

क्या विकास प्राधिकरण के पास इस बात की कोई पुष्टि है कि बिल्डर्स भूमि बकाया का भुगतान करने और सभी मामलों में परियोजनाओं को पूरा करने के लिए सक्षम हैं? क्या बिल्डरों के पास पर्याप्त इन्वेंटरी है ताकि उनकी बिक्री के बाद वे उस जमीन का बकाया वापस करने की स्थिति में हों जो एक सार्वजनिक कोष है? क्या बिल्डर्स योजना विभाग के अनुमोदन के अनुसार परियोजनाओं का निर्माण कर रहे हैं? क्या प्राधिकरण के द्वारा चल रहे परियोजनाओं के प्रत्येक टॉवर और फर्श की निगरानी किया जा रहा है ? क्या इसका कोई रिकॉर्ड है?

जैसा कि कुछ परियोजनाओं में बिल्डरों ने टावरों की दूरी को बनाए नहीं रखा, अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण किया, 900 फ्लैटों की मंजूरी मिलने पर 1900 फ्लैटों का निर्माण किया? इस बात की संभावना है कि विभिन्न तकनीकी कर्मचारियों ने किसी परियोजना का दौरा नहीं किया है? इस बात पर से भी जाहिर है कि योजना विभाग ने आज तक स्टाम्प डयू्टी के लिए जानकारी साझा नही किया है जिसके कारण सरकार और प्राधिकरण को हजारों करोड़ की चुना लगा है।

क्या इन डिफॉल्ट करने वाले बिल्डरों के पास अनसोल्ड इन्वेंट्रीज़ का विवरण है? अगर कल परियोजना को पूरा नही कर पाता है तो घर खरीदारों के वसूली कैसे की जायेगी ? प्राधिकरण अपने भूमि का बकाया कैसे वसूल करेगा? क्या ये बिल्डर शपथपत्र पर आश्वासन देने के लिए असाइनमेंट और पोजीशन ले सकते हैं कि प्रोजेक्ट्स के अनुसार फिजिबिलिटी है और बिल्डर्स होम बायर्स को कानूनी रूप से कब्जा देंगे?

वर्ष 2016-17 में अपने पिछले सुझावों में, हमने सरकार को सलाह दी थी। के ऊपर। इन डिफ़ॉल्ट बिल्डरों से सभी आविष्कारों के ओवर-अथॉरिटीज और सेल्फ फाइनेंस स्कीम (SFS) या 20% + 30% + 50% के आधार पर सभी फ्लैट्स / इन्वेंटरी की मेगा सेल की योजना के बाद।

अब वर्तमान परिदृश्य में, इन ज्वलंत प्रश्नों को उठाए जाने की आवश्यकता है और जल्द से जल्द उत्तर दिए जाने की भी है क्योंकि घर खरीदार जो कि प्राधिकरण पर पर लोगो ने विश्वास किया है नही कि किसी बिल्डर पर। उनके लिए नोएडा और ग्रेटर नोएडा एक ब्रांड है।

रियल्टी क्षेत्र के निगरानी प्राधिकरण (RERA UP) इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे और इन प्राधिकरणों को दिशा-निर्देश जारी करेंगे कि वे इस व्यवहार्यता को गंभीरता से लें और उनका मूल्यांकन करें क्योंकि उन्हें इन बिल्डरों से भूमि बकाया राशि भी जमा करनी है जो एक बड़ी राशि है इन भूमि बकाया के संग्रह के बिना, बिल्डरों को पूर्णता / व्यावसायिक प्रमाण पत्र के पूरा होने की कोई संभावना नहीं है।

घर खरीदार के मामल मे एक बड़ा कदम उठाने की जरूरत है यह जिम्मेदारी भी है कि घर खरीदार के पैसों को सुरक्षित रखा जाय। अगर बिल्डर किसी परियोजना को पूरा करने मे सक्षम नही है तो उसकों तुरंत ब्लैक लिस्ट मे डालकर घर खरीदार को जानकारी दिया जाय की भविष्य मे ऐसे बिल्डर को पैमेंट न करे।

एश्युरड रिटर्न मे के झांसे मे लाखों निवेशक , इसकी होनी चाहिए निगरानी

आईटी और आईटीज के परियोजनाओं मे आकर्षक और एश्युरड रिटर्न देने के लालच देकर लाखों निवेशक के पैसे लगवावाए गये है। प्रमोटर्स के द्वारा दिये गये आकर्षक आफर के माध्यम से लाखों निवेशकों के खुन पसीने की कमाई डुबने के कगार पर है लेकिन हमारे तीनों प्राधिकरण के नौकरशाह, सरकार, ब्युरोक्रेट नींद से सोया हुआ है।

इस सेल के जरिये दिये जा रहे आकर्षक आफर एक धन जमा करने की योजना है जिसे तुरंत बन्द करना चाहिए लेकिन सेबी और आरबीआई भी इस पर चुप है। यह योजना एक नाॅन बैंकिंग फाईनेंस की योजना की तरह से है इसे आप पोंजी स्कीम भी कह सकते है। इसके माध्यम से बिल्डर और प्रमोटर्स ने इन्वेस्टर्स से मोटी रकम वसूल किया है।

बता दे कि आईटी और आईटीज के लिए सरकार ने बहुत सस्ती दर पर या कहे की कौड़ी के भाव मे जमीन अलाट किया है जिससे की आउटसोर्सिंग बढ़ाया जा सके। इसके माध्यम से लाखों के संख्या मे रोजगार सृजन किया जा सके। अब रेरा को भी मामले मे दखल देना चाहिए और सख्त नियम बनाने चाहिए। अगर सस्ती दर पर 5 एकड़ जमीन आईटी और आईटीज के लिए दिया गया है तो सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इसमे आईटी का ही काम हो। मिशन आजादी 2.0 के तहत इसे आवासीय या फिर कमर्शियल प्रयोग नही किया जाना चाहिए।

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