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दावा- स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की वजह से दो महीने में गई 72 बच्चों की जान

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मामला लखीमपुर खीरी के 5 ब्लॉकों का है, जहां पर यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार सितंबर में 7206 तो अक्टूबर 7684 में बच्चों का जन्म हुआ था. जिसमें से 2 महीने में 72 नवजात बच्चों की स्वास्थ विभाग की लापरवाही के चलते निमोनिया और अन्य बीमारियों की वजह से मौत हो गई.


लखीमपुर खीरी. यूनिसेफ (UNICEF) की एक रिपोर्ट (Report) में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जिले में स्वास्थ्य विभाग (Health Department) की लापरवाही (Negligence) के चलते पिछले 2 महीने में 72 नवजातों (Kids Death) की असमय मौत हो चुकी है. यूनिसेफ की रिपोर्ट आने के बाद जिले में हड़कंप मच हुआ है. हालांकि, अधिकारी अब लीपापोती में जुटे हैं.

इतने बच्चों की हुई मौत

मामला लखीमपुर खीरी के 5 ब्लॉकों का है, जहां पर यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार सितंबर में 7206 तो अक्टूबर 7684 में बच्चों का जन्म हुआ था. जिसमें से 2 महीने में 72 नवजात बच्चों की स्वास्थ विभाग की लापरवाही के चलते निमोनिया और अन्य बीमारियों की वजह से मौत हो गई. इस रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया. इस बारे में जिलाधिकारी शैलेंद्र सिंह ने बताया कि सितंबर माह में जन्मे 21 मेल और 7 फीमेल यानी 28 बच्चों की मौत हुई. इसी तरह अक्टूबर माह में 29 मेल और 15 फीमेल की डेथ हुई. अगर डेथ परसेंटेज की बात करें तो यह 0.49 परसेंट है.
जिलाधिकारी ने बताया कि जो होम बेस्ड न्यू बोर्न केयर होता है उसके तहत आशा और आंगनबाड़ी कार्यकत्री घर-घर विजिट करती हैं. इसके तहत प्रथम 42 दिनों में सात विजिट की जाती है. ये विजिट बच्चे के पैदा होते ही शुरू होती है और 42 दिन में सात विजिट होती है. अगर इस विजिट की बात करें तो यह परसेंटेज कम है. जहां तक मृत्यु की बात है अगर हम प्रदेश का औसत देखें तो 0.49 परसेंट काफी कम है. लेकिन इसको और बेहतर करने की आवश्यकता बनी रहती है. हम इसका प्रयास कर रहे हैं. कुछ दिक्कतें थीं, जिन्हें दूर कर लिया गया है. जैसे की बताया गया था कि टेम्परेचर लेने के लिए थर्मामीटर नहीं है. नए थर्मामीटर की खरीद कर ली गई है. विजिट परसेंटेज को बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं.

हालांकि यूनिसेफ की रिपोर्ट आने के बाद जब जिले में हड़कंप मचा तो आला अधिकारी अपनी लापरवाही को छुपाने के लिए लीपापोती में लग गए. विभाग की लापरवाही का अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि जिले में आशा बहुओं के पास बुखार नापने का थर्मामीटर तक भी मौजूद नहीं है. उपयोग में आने वाले अन्य यंत्रों के होने की आप उम्मीद ही नहीं कर सकते.

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