केंद्र ने दी किसानों को बड़ी सौगात, फसलों की खरीद पर 85% तक बढ़ाई MSP, देखें लिस्ट

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कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक में MSP की नई दरें घोषित करने का निर्णय हुआ है.

केंद्र के तीन कृषि बिलों के खिलाफ जारी किसान प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Union Minister Narendra Singh Tomar) ने आज बुधवार को महत्वपूर्ण घोषणा की. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने धान, मक्का, बाजरा और सोयाबीन सहित 22 फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ा दिया है. इसके मुताबिक 2021-22 के लिए घोषित नई दरों के बाद धान सामान्य (Paddy Normal) की खरीद का मूल्य प्रति क्विंटल 1940 रुपए हो गया है. इसमें 72 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोती हुई है. धान ग्रेड ए (Paddy Grade A) की खरीद भी 72 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी के साथ 1960 रुपए प्रति क्विंटल हो गई है.

उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक में ये निर्णय लिया है. कृषि मंत्री के मुताबिक सबसे अधिक बढ़ोतरी तिल (Sesame) की एमएसपी में हुई है. इसकी खरीद पर रिकॉर्ड 452 रुपए प्रति क्विंटल बढ़े हैं. नए दरों के बाद तिल की खरीद अब 7307 रुपए प्रति क्विंटल में होगी. कृषि मंत्री ने कहा कि बाजरा जो 2020-21 में 2150 रुपए प्रति क्विंटल था, वो अब 2250 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है. इसके अलावा उड़द जैसी दालों की कीमतों में 300 रुपए की बढ़ोतरी के साथ 6,300 रुपए प्रति क्विंटल हो गई है.

इसी बीच किसान आंदोलन का प्रमुख चेहरा भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने कृषि और स्थानीय किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Bengal CM Mamata banerjee) से मुलाकात की. मुलाकात के बाद टिकैत ने कहा कि हमें मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि वह किसान आंदोलन का समर्थन जैसी करती थी वैसे ही करती रहेंगी. इसके लिए हम उनका धन्यवाद करते हैं. पश्चिम बंगाल (West Bengal) को मॉडल स्टेट के रूप में काम करना चाहिए और यहां के किसानों को अधिक लाभ मिले हम यही चाहते हैं.

इससे पहले प्रदर्शनकारी किसानों ने प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन का विरोध किया था. किसानों ने कहा कि पीएम ने अपने संदेश में कहीं भी तीनों कृषि कानूनों और देश में चल रहे किसान आंदोलन का जिक्र तक नहीं किया. एसकेएम के नेताओं ने कहा कि आंदोलन में अब 500 से ज्यादा किसान साथी शहीद हो चुके हैं. जहां एक तरफ देश का किसान बाजार में मिल रही कम कीमतों के कारण भारी नुकसान उठा रहा है, तो वहीं सरकार सिर्फ और सिर्फ अपने अहंकार के कारण इस आंदोलन को इतना लंबा खींच रही है.

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