एक महंत को गुंडा बदमाश और माफिया कहना क्या सभ्य समाज की पहचान है?

Spread the love

गाजियाबाद : डासना मंदिर विवाद अब अपने चरम पर पहुँच चुका है। जहाँ एक तरफ मुसलमान इसको अपने ताकत आजमाईश के रूप में देख रहे है वही दूसरी तरफ हिंदू सनातन धर्म के लोग भी इसे अपने स्वाभिमान की बात मानकर चुनौति को स्वीकार किया है। डासना के विधायक असलम चौधरी नें कहा कि हम मंदिर में भी जाएंगे और बोर्ड भी हटायेंगें। इसके साथ ही विधायक जी नें महंत को गुंडा बदमाश और माफिया बता दिया । यहाँ तक कह दिया कि मंदिर क्या उसके बाप की है ? यह तो हमारे पूरुखों की है ?

बस यही एक बात मुझे अच्छी लगी है : विडियों में

इसके बाद सनातन के जाने माने चेहरा और उर्दू शायर तुफैल जी नें जो कहा आपको उसे भी पूरा पूरा सुनना चाहिए।

हम भी तो यही कर रहे है कि आपके पूरखे हिंदू थे। बस इतनी सी बात समझने में इतनी देर क्यों लगी है। आईये सनातन धर्म में आपका स्वागत है । कीजिए घर वापसी।

तिरंगा फिल्म में एक डायलाँग है जो आज की इस विडियों पर बहुत सटीक बैठता है। गेंडा स्वामी मै तो सोचा की तुम मर्दों की तरह से लड़ोगे लेकिन तुमने अधूरे में ही हथियार डाल दिया।

अब विधायक असलम चौधरी कह रहे है उनका मकसद शांति व्यवस्था कायम रखना था मिडिया नें उनके ब्यानों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया है। ये सवाल तो मिडिया वालों के कीजिए लेकिन ये तो बताना ही पड़ेगा की आवाज आपके ही थे या उसे भी किसी नें डब्ब कर दिया । जिसमें आज खुलेआम एक महंत तो गाली दे रहे है। जितने आपको वोट नही मिले होंगे उसके 10 गुणा ज्यादा महंत जी के शिष्य है। विधायक जी कह रहे है कि हमारा मकसद किसी के दिल को ठोस पहुँचाना नही था अगर किसी के दिल को ठेस लगा है तो माफी चाहता हूँ।

ठीक है हिंदू समाज ने आपको माफ भी कर दिया तो आप पर कैसे भरोसा कर ले कि आप महंत को पिटवाओगे नही। जैसा की आपने विडियों में कहा है ? आपने आसिफ को तो कुछ नही कहा जो हिंदुओं के भावनाओं को ठोस पहुँचाया है जिसके लिए उसका पिटाई किया गया। मंदिर आपके पूरुखों के है। मै भी मानता हूँ तो ये सनातन धर्म भी तो आपके पूरुखों का ही है। तैफुल जी भी तो यही कह रहे है आप घर वापसी कीजियें।

%d bloggers like this: