सीएजी: पूरानी फाइले तलब, बिल्डर और प्लानिंग से जुड़ा है गायब।

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खबरो से खबर: उत्तर प्रदेश के आर्थिक राजधानी नोएडा, ग्रेटर नोएडा में औद्योगिक भूमि को आवासीय बना कर बिल्डर को बेच दिया गया। बिल्डर, अफसर, प्रमोटर्स , नौकरशाह और राजनीतिक से जुड़े कुछ लोगों नें सत्ता की आड़ में मोटी मलाई पायी। लेकिन सत्ता में सब एक जैसा माननीय न्यायालय में मामला होने के बावजूद किसी भी राजनीतिक पार्टी के लोगों नें इस पर ध्यान नही दिया है, बजाय इसके आज भी मोटी मलाई छांटी जा रहा है। जो पहले बीएसपी में था वो पिछले सरकार में एसपी में और अब बीजेपी में।

नोएडा ग्रेटर में हुए भूमि घोटाला जो कि लगभग 30 हजार करोड़ की बताया जा रहा है लेकिन अगर सही अनुमान लगाये तो यह घोटाला और भी बड़े है। जिसकों लेकर प्रदेश सरकार की सीएजी आडिट किया जा रहा है। इससे पहले माननीय न्यायालय के निर्देशन में एक मुख्य सचिव स्तर की जांच की आदेश दिया गया लेकिन आज तक उसे नही करवाये गये। हालांकि उसके एक झलक उस समय में देखने को जरूर मिला था जब शहर के एक प्रतिष्ठित अखबार ने ग्रेटर नोएडा और नोएडा का जायजा लेने आये अधिकारी के माध्यम से एक खबर छापी थी जिसमें बड़ा घोटाला का अनुमान था। लेकिन सत्ता के आगे किसकी बस चले। सत्ता का इतिहास तो हम सभी जानते है। ज्यादा लिख सकते नही है क्योंकि आये दिन पत्रकार पर भी हमले हो रहे है।

एक बार फिर से सीएजी टीम दोनों प्राधिकरण नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा में डेरा डाल चुकी है लेकिन उनको कुछ भी हासिल नही हो रहा है । आधा दर्जन की सीएजी टीम पुरानी फाइलों को खंगालने में जुट गई है। सीएजी टीम पहले भी आई थी वर्ष 2019-20 की आडिट करने के लिए लेकिन प्राधिकरण के टीम कई पूरानी फाइलों को मुहैया नही करायी थी। एक बार फिर से आडिट टीम उसी फाइल को ढुढ़ने में लग गयी है जो पिछली बार भी गायब थी।

यह फाइल बिल्डर और प्लानिंग विभाग से जुड़ी हुई है। आडिट टीम प्लानिंग विभाग से जुड़ी फाइलों को मांगे है जिससे कि बिल्डरों को भूमि आवंटन में किस तरह की गड़बड़ी है इसकी जांच कर सके और अपनी रिपोर्ट शासन को दे सके।

आपको बता दे कि नोएडा प्राधिकरण और ग्रेटर प्राधिकरण के प्लानिंग एवं फाईनेंस विभाग पर लगातार सवाल उठते रहे है। इससे पहले एआईजी स्टाम्प ने भी सवाल उठाया था । बार-बार हजार करोड़ की स्टाम्प की चोरी और सरकार को चुना लगाया जैसे समाचार प्रकाशित किया गया। लेकिन उसके बावजूद भी इन दोनों विभाग में मौज है। आज तक बिल्डर को कितना एक्सट्रा एफएआर दिया गया इसके बारे में कोई भी जानकारी स्टाम्प विभाग को नही दिया गया है। हालांकि जब विशाल इंडिया पत्रकार एआईजी स्टाम्प से जानना चाहा, तो उन्होने बताया कि “अभी तक सिर्फ नोएडा प्राधिकरण 12 करोड़ की स्टाम्प की जानकारी उपलब्ध करायी है।” जबकि 2015 में एक बोर्ड मिटिंग में पूर्ण जानकारी देने की बात की गयी थी।

लगातार खबरे मिल रही थी कि जल्द ही योगी सरकार सीएजी आडिट रिपोर्ट विधान पटल पर रखेंगी। लेकिन लगता है वो दिन अभी आये नही है या फिर राजनीतिक सांठगांठ कर इसे 2022 तक लटकाने की सरकार की मंसूबा हो। क्योंकि राजनीति में तो सिर्फ दिखाने के लिए दुश्मनी है असल दुश्मन तो जनता है जिसे बरगला कर सता पाना होता है

नोए़डा शहर के वरिष्ठ नागरिक व अधिवक्ता श्री अनिल के गर्ग (RIGHT INITIATIVE FOR SOCIAL EMPOWERMENT) लगातार इन मुद्दो को उठाती रही है। उनका कहना है कि आखिर वो फाइल गयी कहाँ ? क्या इसे जमीन खा गया या आसमान निगल गया ? या फिर इसे जानबुझकर गायब कर दिया गया हो या जला दिया गया हो। यहाँ तो कुछ भी संभव है नोएडा प्राधिकरण के इंजिनियरिंग डिपार्टमेंट में आग लगती है सैकड़ो फाईल जल गये लेकिन उसकी जांच रिपोर्ट आज तक नही आयी है। कई बार इस मामले में मुख्य सचिव, एनसीआर प्लानिंग बोर्ड को लिख चुके है , प्राधिकरण की तो बात ही निराली है।

मनोरंजन पार्क को लेकर भी सवाल उठाये है कई बार । उनका कहना है कि आखिर ” मनोरंजन पार्क” के लिए सस्ती दर पर थोक भूमि का आवंटन किए गए जो कि कमर्शियल विभाग के द्वारा आवंटित किया गया क्यों? लेकिन बिल्डर ने आवासीय तो बना लिया लेकिन स्पोर्टस सिटी पर कोई ध्यान नही दिया गया। जबकि शर्त के अनुसार पहले स्पोर्टस सिटी का निर्माण होना था। इस प्रकार से ग्रीन एरिया का भी उलंघन किया गया है, लेकिन इस पर कोई ध्यान नही दे रहा है सब नशे में है। बड़ी भूमि के रूप में (100 एकड़) ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के वाणिज्यिक विभाग द्वारा मनोरंजन मनोरंजन पार्क के विकास के लिए आवंटित किया गया था, लेकिन डेवलपर्स द्वारा टाउनशिप (ग्रुप हाउसिंग और विला) के रूप में विकसित किया गया है? प्राधिकरण द्वारा बहुत ही रोमांचक खेल खेला गया है

बिल्डर तथा प्रमोटर्स मिलकर बड़ा खेल खेला है। प्राधिकरण से सस्ते में जमीन ले लिया। स्पोर्टस सिटी बना नही उसे आवासीय बना दिया। उस आवासीय को बेच दिया गया। जिन लोगों नें खरीदा उनको उनका मालिकाना हक तब तक नही मिलेगा जब तक की बिल्डर स्पोर्टस सिटी और मनोरंजन पार्क बनाकर नही देता है। बिल्डरों नें प्राधिकरण को जमीन का पैसे नही दिया है, जब तक जमीन का पैसा प्राधिकरण को नही दिया जायेगा तब तक रजिस्ट्री नही हो सकता है। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड तो एक पोस्ट आफिस के भूमिका में है और रेरा भी इस पर ठीक से निगरानी नही कर रहा है।

खैर हम तो इंतजार करेंगे तेरा कयामत तक खुदा करे कि कयामत हो और तू आये। सीएजी को पूरानी फाइल मिले जो और सीएजी आडिट रिपोर्ट सब्मिट करे। आरोप प्रत्यारोप का दौर खत्म हो। क्योंकि पत्रकार भी बड़े परेशान आत्मा होते है और कयामत तक पीछा करते है, शायद कुछ हाथ लग जाये। सीएजी को चाहिए कि अगर फाइल नही मिलता है तो आमने सामने बिठाकर पूछताछ करे और जिस बिल्डर के फाइल नही मिल रहे है उनके प्रोजेक्ट पर ताला लगाने की सिफारिश करे। शायद बिल्डर महाराज उनको स्वयं ही फाइल लाकर दे देंगे।

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