रियल्टी सेक्टर के बिजनस गुरु रावर्ट बाड्रा

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आप अगर रियल स्टेट बिजनेस में है तो आपको रियल्टी सेक्टर के बिजनस गुरू रावर्ट बाड्रा के बारे में जरूर जानना चाहिए और उनसे मिलना चाहिए। रावर्ट बाड्रा पूर्वती कांग्रेस सरकार मे सरकार को रिमोट से चलाने वाली महिला और वर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी के दामाद है। प्रियंका गाँधी के हस्बैंड है। पति इसलिए नही कह रहा हूँ, कि क्रिश्चियन में पति शब्द का कोई महत्व नही होता है। अगर उनकी वाईफ प्रियंका गांधी की बात करे तो वही भी वर्तमान में कांग्रेस के महासचिव औ यूपी के प्रभारी है। अब यह बताना तो ठिक नही होगा यूपी के प्रभारी है या यूपी के योगी सरकार पर भारी है।

पिछले दिनों हाथरस मामले को लेकर काफी चर्चा मे रही थी। इसके अलावा पिछले साल कोरोना के समय मे बस पालिटिक्स के समय में भी काफी हाईलाइटेड रही थी। कोरोना के समय में पलायन कर रहे मजदूरों के लिए 2 हजार बसों का इंतजाम करने में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा था। हालांकि बाद में पता चला था कि जिस बस का नंबर दिया गया था वो बस नही स्कूटर और माल ढोने वाली छोटा हाथी का नंबर निकला।

सबसे बड़ी बात बार्डर पर खड़ी 2 हजार बस और उसके ड्राइवर और कंडक्टर बिल्कुल मि0 इंडिया के तरह था , जो कि मिडिया को दिखाई नही दिया। हो सकता है उसको देखने के कांग्रेस मार्का वाली चश्मे की जरुरत थी जो कि मिडिया वालों के पास में नही थी। वो चश्मा सिर्फ कांग्रेस वालों से पास में ही मौजूद था, जब कि प्रशासन बार-बार उनसे पुछ रहा था कि दिखाओ बस कहा है। अब अगर मिडिय़ा या यूपी सरकार को नही दिखाई दिया तो इसका मतलब ये तो नही है कि हम प्रियंका गांधी के अथक प्रयासों को नकार दिया जाय।

2 हजार बसों के नंबर लिखने में सड़क पर खड़े होकर ये काम कार्यकर्ताओ नें किया होगा। यह भी तो हो सकता है जिसने लिस्ट बनाये हो उसका आंख लग गया हो और उसने स्कूटर और नंबर लिख दिया हो। ऐसा भी तो हो सकता है कि नंबर नोट करने के लिए जिस रखा गया था वो बीेजेपी और आर एस एस के आदमी हो और जानबुझकर बस के जगह पर स्कूटर के नंबर लिख दिया हो।

प्रियंका जी यूपी को लेकर हमेशा अलर्ट रहती है, आप हाथरस के मामला को ही ले लिजिए। इतना लंबा पैदल यात्रा पर निकल पड़ी थी हाथरस के बेटी को न्याय दिलाने।

अब आप ये भी कह सकते है कि जब प्रियंका जी हाथरस पैदल जा सकती है तो टिकरी बार्डर पर गाड़ी से ही चली जाती। बंगाल के बेटी के लिए भी दो शब्द बोल देती। लेकिन ऐसा नही किया।

लेकिन यहाँ पर आपको यह समझने की जरूरत है कि हरेक पार्टी कि अपनी वोट बैंक पालिटिक्स होते है, कहाँ जाना है कहाँ नही जाना है, खासकर ऐसे मामले में अपने राज्यों में नही जाते है, जहाँ पर उनकी पार्टी के सरकार चल रही हो।

क्योंकि कोई भी पार्टी अपने नेताओं के विफलताओं को अगर दिखा दिया तो ये बात जाहिर है कि वोट बैंक खिसकने का डर लगा रहता है , खासकर अगर मामला विशेष वर्ग से जुड़ा हो। ऐसे मामला तो देश में प्रदेश में हर रोज होते है 88 होते है यानि हर घंटे में 3-4। लेकिन नेता तो वही जाते है जहाँ उनको राजनीतिक लाभ मिले। आखिर प्रियंका गांधी भी तो एक राजनीतिक दल के महासचिव है, जाहिर सी बात है कि वही जायेंगे जहां राजनीतिक फायदा होगा।

खैर यह तो था रावर्ड बाड्रा के वाइफ और राहुल गांधी के सिस्टर प्रियंका गांधी की तारीफ में लेकिन मै जो बताने जा रहा हूँ वही खास है क्योंकि यह जानकारी रावर्ट बाड्रा से जुड़ा हुआ है।

जैसे कि पहले ही बता दिया कि रावर्ट बाड्रा एक बड़े बिजनस मैन है। रियल स्टेट सेक्टर मे उनका बड़ा नाम है, इसके पीछे जितना रावर्ड बाड्रा का हाथ है उससे ज्यादा केजरीवाल मोहल्ला क्लीनिक वालों की हाथ है। अगर केजरीवाल 165 पेज की जमीन घोटाला वाली बात नही करता तो शायद लोगों को इतने बड़े बिजनेस गुरु के बार में पता भी नही चलता।

हरियाणा के एक अफसर अशोक खेमका ने लैंड कंसोलिडेशन डिपार्टमेंट का चार्ज छोड़ते वक्त रॉबर्ट और भारत की एक अग्रणी रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ के बीच गुड़गांव जिले में हुई ज़मीन सौदे की म्यूटेशन को रद्द कर दिया। अपनी रिपोर्ट में खेमका ने कहा कि यदि सही तरीके से जांच हो तो हरियाणा की काँग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान 20 हजार करोड़ से 350 हजार करोड़ तक का जमीनों का घोटाला निकल कर सामने आ सकता है।

2014 चुनावों के दौरान अमेरिका के एक प्रतिष्ठित अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपी खबर के अनुसार, वाड्रा ने 2007 में एक लाख रुपये के साथ अपने व्यापार की शुरुआत की, लेकिन 2012 में उनकी संपत्ति 300 करोड़ से भी अधिक की हो गई। अर्थव्यवस्था में छाई मंदी के समय में एसी वृद्धि आश्चर्यजनक थी।

अगर आप रियल स्टेट बिजनस से जुड़े है तो आपको यह ट्रीक आपको जरूर सीखना चाहिए। मि0 बाड्रा 5 एकड़ जमीन 15 लाख में खरीदा। यह सौदा डीएलएफ कंपनी से किया गया और इसके लिए 15 लाख की लोन भी डीएलएफ कंपनी ने ही दिया। ठीक 3 साल बाद उसी कंपनी ने यानि की DLF नें मि0 वाड्रा से 47 करोड़ मे खरीद लेता है।

यह कमाल के बिजनस ट्रीक्स सिर्फ और सिर्फ रावर्ट बाड्रा के पास ही था और आज भी उनके पास ही है। जीरो निवेश पर 47 करोड़ का फायदा। लेकिन बड़ी बेरूखी के साथ कहना पर रहा है कि सरकार ने यह ट्रिक्स उन युवाओं के लिए नही लिया जो हर रोज जेएनयू मे रोजगार को लेकर धरना प्रदर्शन करते है और बेरोजगार होने के कारण वामपंथी और चाइना के चाटुकारिता भी। बाड्रा को सरकारी मेहमान भी नही बनाया गया आज तक। भारत सरकार को चाहिए कि इस बिजनस ट्रिक्स का इस्तेमाल किया जाय।

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