सता के नशे मे भाजपा नेता लाॅक डाउन, सोशल डिस्ंटेंसिंग नियमों का उड़ाया धज्जियाँ : पुरुषोत्तम नागर

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नोएडा सेक्टर 24 थाना के सामने आज दिन भर राजनीतिक हलचल बनी रही। यह हलचल भाजपा के नेता श्री नरेश शर्मा जो कि माननीय सांसद और पूर्व केन्द्रिय मंत्री महेश शर्मा जी के करीबी माने जाते है उनके गिरफ्तारी के बाद हुई। भाजपा कार्यकर्ता ने थाना के सामने धड़ने पर बैठकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी किया और जल्दी से रिहाई की मांग किया।

पार्टी कार्यकर्ता का कहना है कि उनको जान बुझकर फसाया गया है। उन्होने कुछ दिने पहले ही पुलिस के पोल खोले थे। जैसा कि एक टवीटर कई न्यूज पोर्टल के पोस्ट मे देखे गये है। लेकिन दूसरी तरफ पुलिस ने जो कारवाई की है वो लाॅक डाउन मे किरायेदार के साथ मार-पीट करने की है और किराया देने के लिए दबाव बनाने की है। माना जाता की लाॅक डाउन के कारण काम धंधा बंद होने के कारण किराया देने मे असमर्थ होने पर श्री नरेश शर्मा ने अपने पीजी ने रहने वाले लड़को के साथ मार-पीट किया।

जिलाध्यक्ष युवा कांग्रेस नोएडा पुरुषोत्तम नागर ने इस पर अपने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सत्ता की हनक व सत्ता के नशे में भाजपा नेताओं ने नोएडा थाना सेक्टर 24 के सामने लॉकडाउन मे सामाजिक दूरी ,धारा 144 के साथ कोविड 2019 के नियमों की धज्जियां उड़ाई है ।नोएडा की जनता योगी जी से पूछना चाहती है कि नियम व कायदे क्या सिर्फ आम लोगो के लिए है ,ये सब कुछ सामने देखते हुए भी पुलिस महकमा क्यों पंगु बना हुआ है ।इसी नोएडा पुलिस ने हमारे नेताओं पर फर्जी सोशल डिस्टनसिंग का मुकदमा दर्ज किया था।देश मे कानून सब के लिए बराबर है ,सत्ता धारी व आम जन मानस के लिये कानून अलग नही हो सकता ।

नोएडा पुलिस आज खामोश क्यों है?
अपने घर के अंदर मोदी जी भाषण नहीं जनता को राशन दो कहने पर नोएडा पुलिस ने सीटू जिलाध्यक्ष गंगेश्वर दत्त शर्मा पर एफ आई आर दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया था। इतना ही नहीं पुनः 22 मई 2020 को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर मजदूरों की मांगों पर घरों में ही रहकर विरोध करने के आव्हान पर सीटू जिलाध्यक्ष गंगेश्वर दत्त शर्मा व अन्य ट्रेड यूनियन नेताओं को 21 मई 2020 को आधी रात गिरफ्तार कर 32 घंटे थाने में बंद रखने के बाद रिहा करने वाली नोएडा पुलिस को आज सांप सूंघ गया जब सत्ताधारी भाजपा के कार्यकर्ताओं/नेताओं ने थाना सेक्टर 24 नोएडा पर सभी नियम कानूनों की धज्जियां उड़ा कर विरोध प्रदर्शन किया जमकर नारेबाजी की गई लेकिन प्रदर्शन करने वालों पर अभी तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है यही प्रदर्शन अगर मजदूरों ने किया होता तो नोएडा पुलिस मार-मार कर कितने के हाथ पैर तोड़ चुकी होती और गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कितने ही मजदूरों को जेल भेजा जा चुका होता है‌
नोएडा की जनता पुलिस से जवाब चाहती है क्या गरीबों के लिए अलग कानून है और बड़े लोगों के लिए अलग

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