संस्कारित एवं देशभक्त युवकों का निर्माण करेगा आर्य समाज-अनिल आर्य

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यज्ञोपवीत व युवा संस्कार का भव्य उदघाटन

संस्कारित एवं देशभक्त युवकों का निर्माण करेगा आर्य समाज-अनिल आर्य राष्ट्रीय अध्यक्ष’

संस्कारित युवा पीढ़ी ही राष्ट्र की धरोहर – प्रवीण आर्य

ग़ाज़ियाबाद,रविवार,09-08-2020 को केन्द्रीय आर्य युवक परिषद नन्द ग्राम शाखा गाज़ियाबाद के तत्वावधान में युवा संस्कार अभियान के अन्तर्गत युवकों व युवतियों को सी-503,नन्द ग्राम में यज्ञ के दौरान यज्ञोपवीत धारण कराया गया।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने ऑनलाइन अपने संदेश में कहा कि व्यक्ति का निज जीवन समाज के लिये आदर्श होना चाहिये, आपके जीवन को देखकर ही व्यक्ति आपके अनुगामी बनेंगे।उपनयन का अर्थ है समीपता को प्राप्त करना,आचार्य की समीपता को प्राप्त करके बालक शिक्षा द्वारा अपने जीवन को समुन्नत करता है,शिक्षा व्यक्ति को काम करने में समर्थ बनाती है।उपनयन संस्कार जीवन निर्माण की आधारशिला है यज्ञोपवीत के तीन धागे स्वजीवन को समुन्नत बनाना तथा राष्ट्र के लिये भावी सन्तति समुन्नत बना कर देने के व्रत का प्रतीक हैं।प्रत्येक भारतीय का यह संस्कार होना चाहिये जिससे राष्ट्र में सद्चरित्र शिक्षित नागरिक उपलब्ध हो सकें।

यज्ञ के ब्रह्मा श्री प्रवीन आर्य ने यज्ञोपरांत युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुये कहा कि यज्ञ से त्याग व उपकार की भावना जागृत होती है यज्ञोपवीत हमारी पुरातन गौरवशाली संस्कृति का आधार है।यज्ञ में युवाओं ने भाग लेकर महर्षि दयानन्द के पदचिन्हों पर चलने,नशा मुक्त समाज की स्थापना करने,एवं बीड़ी -सिगरेट, अंडा मांस,शराब तथा गुटके से दूर रहने का संकल्प लिया।

परिषद के प्रधान शिक्षक सौरभ गुप्ता ने कहा कि धर्म समाज को जोड़ता है,तोड़ता नही,वैदिक धर्म सर्वे भवन्तु सुखिनः की बात करता है।पारिवारिक सद्भावना के बिना जीवन सफल नहीं हो सकता,समाज का उत्थान-राष्ट्र का उद्धार नहीं हो सकता।श्रेष्ठ संस्कारों से ही युवा पीढ़ी उत्थान के शिखर पर पहुंच सकती है। उन्होंने बताया कि 8 अगस्त से 22 अगस्त तक 70 ऑनलाइन कार्यक्रमों के माध्यम से युवा पीढ़ी को संस्कारित करने का लक्ष्य है।

समारोह के मुख्य अतिथि नन्दग्राम आर्य समाज के प्रधान प्रेमपाल आर्य ने कहा कि सदा से ही युवा पीढ़ी समाज सुधार करती आई है ओर आज भी करना होगा समाज में फैली हर बुराई को दूर करने का बीड़ा उठाना होगा।अब चाहे वे बुराईयाँ दैहिक हों,दैविक हों,मानसिक हों,सामाजिक हों, भौतिक हों या फिर राजकीय हों, आज कल के युवकों को हम शिक्षा तो दे रहे हैं पर दिशा नहीं आज युवकों को सही दिशा का ज्ञान अपने कर्तव्यों का ज्ञान सुचारू रूप से होना बहुत आवश्यक है।

इस अवसर पर मुख्य रूप से सुरेश प्रसाद आर्य,गौरव गुप्ता, प्रगति,विकास,हन्नी,सत्यम,बिन्नी कुमार आदि उपस्थित हुए।

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