दो महीने से वेतन नही मिलने पर एंबुलेंस चालकों ने जताया नाराजगी

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इस समय में देश विकराल स्थिति मे है और कोरोना अपना पैर पसारता जा रहा है। प्रशासन लगातार इस वैश्विक संकट ने निकलने की कोशिश मे जी जान से लगी है।

एक तरफ प्रधानमंत्री राष्ट रक्षक के नाम पर ताली और थाली बजबाते है और पूरा देश उनके एक इशारे पर अपन बालकनी मे उतर आते है।

इससे से मेडिकल और सुरक्षा मे लगे लोगों की हौसला जरूर बढा है लेकिन क्या इतना ही काफी है उनके लिए।

नोएडा के सरकारी अस्पताल के लिए एंबुलेंस चलाक प्राईवेट रखे गये है। GVK कंपनी को कान्ट्रेक्ट दिय़ा हुआ है। जो पिछले दो महीने से चालक और सेवा मे लगे लोगों के उनका वेतन नही दे रहा है।

मै सवाल बात पर नही उठा रहा हूँ की वो प्राईवेट है , मेरा सवाल यह भी नही है कि वो कौन सी कंपनी है ?

मेरा तो बस इतना कहना है की जब देश में दहशत की माहौल है , हर तरफ कोरोना ही कोरोना है। तब भी अगर डाक्टर के साथ कंधा से कंधा मिलाकर चलने वाले इन चालकों सुविधा से मुक्त क्यों रखा जा रहा है।

इनके पास सुरक्षा किट नही है । हर समय पैसेंट को लेकर आते । ऐसे मे जब इनके संक्रमित होने की खतरा ज्यादा रहता है । क्योंकि ये लोग अपने साथ जिंदा और मुर्दा दोनो लेकर चलते है।

बात सिर्फ इतना नही है कई कई महीनों तक इनको सैलरी नही दिये जाते है।

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