आपसी सहमति से ही बन सकता है मंदिर।

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    तो लोकसभा चुनाव से पहले कुछ नहीं होगा अयोध्या में राम मंदिर का।
    प्रधानमंत्री के 95 मिनट के इंटरव्यू पर सिर्फ यही नया।

    वर्ष 2019 के पहले दिन एक न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साफ कर दिया कि अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बनाने के लिए केन्द्र सरकार कोई अध्यादेश नहीं लाएगी। प्रधानमंत्री ने यह बात तब कही है जब कुछ दिन पहले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवात ने मंदिर निर्माण पर कानून बनाने की बात कही थी। अब कुछ लोग प्रधानमंत्री के बयान को संघ से टकराव वाला मान लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं है। प्रधानमंत्री ने संघ को भरोसे में लेकर ही ऐसा बयान दिया है। प्रधानमंत्री के बयान से अब यह साफ हो गया है कि मई में होने वाले लोकसभा चुनाव से पूर्व मंदिर निर्माण पर कुछ भी नहीं होगा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में 4 जनवरी में सुनवाई होनी है, लेकिन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पहले ही कह चुके हैं कि यह मामला प्राथमिकता वाला नहीं है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में वर्षों लग सकते हैं। 4 जनवरी से जो सुनवाई होगी, उसमें सबसे पहले एक संवैधानिक पीठ बनाने की बात है। यह जरूरी नहीं कि 4 जनवरी को संवैधानिक पीठ बन ही जाए, हो सकता है कि सुनवाई टल जाए। यानि पिछले कुछ माह से मंदिर निर्माण को लेकर जो शोर गुल हो रहा था वह बेकार रहा। विश्वहिन्दू परिषद ने तो धर्म संसद कर सरकार पर दबाव भी बनाया, लेकिन प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही सरकार कोई कार्यवाही करेगी। असल में कोर्ट के फैसले से पहले केन्द्र सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है। जब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी तीन तलाक का बिल राज्यसभा में स्वीकृत नहीं हो रहा है, तब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले अयोध्या में राम मंदिर का बिल कैसे स्वीकृत हो सकता है। हालांकि लोकसभा के चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा को इस मुद्दे पर विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। लेकिन फिलहाल सरकार संसद में परेशानी से बच गई है। देश के वर्तमान हालातों से अध्यादेश लाकर अयोध्या में मंदिर का निर्माण आसान नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंदिर निर्माण के पक्ष में आ जाए, तब भी मंदिर आसानी से नहीं बन सकता। अयोध्या में मंदिर निर्माण हिन्दू और मुस्लिम समुदायों के प्रतिनिधियों की आपसी सहमति से ही बन सकता है। इसके लिए आर्ट आॅफ लिविंग के प्रणेता श्रीश्री रविशंकर, शिया वक्फ बोर्ड के प्रतिनिधियों आदि को प्रयास जारी रखने चाहिए। देश में हिन्दू और मुसलमानों के बीच आपसी सद्भाव बना रहना चाहिए। यदि यह सद्भाव बिगड़ता है तो देश की एकता और अखंडता खतरे में पड़ जाएगी। अच्छा हो कि मंदिर निर्माण का विवाद दोनों समुदायों के धर्मगुरुओं और विद्वानों पर छोड़ दिया जाए।
    विहिप नाराजः
    प्रधानमंत्री ने मंदिर निर्माण के मुद्दे पर जो राय व्यक्त की उससे विश्वहिन्दू परिषद नाराज है। विहिप के नेताओं का कहना है कि न्यायालय में यह मामला गत 70 वर्षों से लटका पड़ा है। ऐसे में सरकार को कानून बनाकर ही अयोध्या में मंदिर का निर्माण करना चाहिए। नेताओं ने कहा कि प्रयागराज में जो कुम्भ होने जा रहा है उसमें मंदिर निर्माण को लेकर आंदोलन चलाए जाने का निर्णय लिया जाएगा। नेताओं ने कहा कि देश भर के साधु संतों में रोष व्याप्त है।
    कुछ नया नहीं:
    प्रधानमंत्री के 95 मिनट के इंटरव्यू में राम मंदिर को छोड़ कर कोई नई बात सामने नहीं आई। इंटरव्यू की सभी बातें नरेन्द्र मोादी विभिन्न मंचों पर पहले भी कह चुके हैं।


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