यूपी के एक बड़े अफसर (जो कि मुस्लिम हैं) की पत्नी नाज़िया सिद्दीकी लिखती हैं

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पिछले महीने भर से साहब महाराजगंज, कुशीनगर, गोरखपुर, देवरिया और बलिया जिले के एक विशेष दौरे पर थे, मुझे भी साथ जाना पड़ा. वो तो वहां अपने काम में बिजी हो जाते थे और वहां के अलग अलग ऑफिसरों से मीटिंग करते थे व आवश्यक जानकारी जुटाते रहते थे, मैं रोजाना दिन में 4-5 घंटे के लिए आसपास के किसी गांव चली जाती थी, वहां के हालात समझने की कोशिश करती थी, लोगों से बात करती थी.
अब आप लोग चाहे मेरी इस बात के लिये बुराई करते रहो पर मैं वहां सरकारी गाड़ी में और दो हथियारबंद सुरक्षा कर्मियों के साथ ही जाती थी. पर इसी वजह से उन गांवों के लोग और खास तौर से महिलायें मुझसे बात करने में घबराते थे. फिर मैंने उन लोगों के बच्चों के लिये रोजाना 15-20 चॉकलेट, कुछ पेस्ट्री, कुछ साबुन, कुछ टीशर्ट ले जाना शुरु किया तो इन चीजों के लिये पहले बच्चे और फिर बच्चों के साथ बडों से भी बात करने का मौका मिला.

सचमुच अभी भी भारत के कुछ हिस्से ऐसे भी हैं, कुछ गांव इतने गरीब भी हैं कि वहां बमुश्किल 10% लोग ही ऐसे कपड़े पहने दिखे जो पूरी तरह से सही थे -कहीं कोई फटने का निशान नहीं था. अभी भी बहुत से लोग उस स्तर की गरीबी में जीवन व्यतीत कर रहे हैं जिसके बारे में दिल्ली लखनऊ जैसे बड़े शहरों में रह रहे हम लोग सोच भी नहीं सकते. फिर भी हम लोग पैट्रोल डीजल पर बढ़ते टैक्स पर आंसू बहाने लगते हैं, इनकम टैक्स में जितना हो सके -छुपाना चाहते हैं. कोशिश करते हैं कि कोई मंहगा सामान खरीदें तो GST न देना पड़े. जबकि हमारे दिये सब तरह के टैक्स से ही सरकार इन गांवों में गरीबों को विभिन्न सुविधायें दे पा रही है. सरकार सबको सरकारी नौकरी नहीं दे सकती, न ही सरकार हर जिले, हर तहसील में कोई बड़ी फैक्टरी ही खोल सकती है, सरकार केवल हर जगह बेहतर सड़क -बेहतर बिजली के साथ साथ बेहतर कानून व्यवस्था का इंतजाम ही कर सकती है, मिल या फैक्टरी तो कोई अम्बानी, कोई अडाणी, कोई टाटा, कोई बिडला, कोई डालमिया, कोई बाबा रामदेव ही लगायेगा, और तभी उस क्षेत्र का सही मायने में विकास हो सकेगा.. तभी वहां की गरीबी दूर होगी. और जब तक ऐसे गरीब इलाके हैं, तब तक सरकार की जिम्मेदारी है कि वहां के लोगों को मूल जरूरत की चीजों का इंतजाम करने में मदद करे, और इसी के लिये कोई दिल्ली में बैठा मोदी आपसे पैट्रोल डीजल पर ‘मोटा’ टैक्स वसूलता है. वह इस टैक्स के पैसे से कोई अय्याशी नहीं करता, अपने परिवार के कुत्ते बिल्लियों के नाम स्विस बैंक में करोड़ों डॉलर जमा नहीं करवाता, वो इन हमारे ही गरीब भाई बहनों की मदद करता है.

देखा तो पता चला, पूछा तो पता चला कि इन गांवों की अधिकतर गरीब महिलायें (और इनमें काफी मुस्लिम भी थीं) मोदी और योगी को किसी अवतार से, किसी मसीहा से कम नहीं मानतीं. सड़क बिजली और रोजगार तो मर्दों की जरूरत होते हैं, औरतों को तो सबसे पहले एक पक्का मकान, घर में ही टॉयलेट, लकड़ी की जगह गैस का चूल्हा, और यह भरोसा चाहिये कि बगल के इलाके का कोई दबंग या माफिया का आदमी उसको कभी भी शौच के लिये जाते समय नहीं धर दबोचेगा. कुछ औरतों ने दबी जबान में बताया कि गरीब औरतों को इस जिल्लत भरी मजबूरी (मुंह अंधेरे खेतों में शौच करने जाना) से अधिक डर लगता था कि कहीं कोई दबंग या दुष्ट कुछ गलत हरकत न कर जाये.

यूपी में गुण्डे बदमाश खत्म हो रहे हैं, गांवों में बिजली व सड़क पहुंच रही है, सस्ता राशन लोगों को मिल पा रहा है, टॉयलेट व घर मिल रहे हैं, और इसीलिये उन गरीब महिलाओं को भी पता है कि अगली बार भी वोट मोदी को ही देना है, अगली बार भी वोट योगी को ही देना है.

मोदी और योगी हमारे इस देश के वो दो सबसे प्यारे बेटे हैं जिन्हें देखकर देश की अधिकतर महिलाओं को अपने पिता, अपने भाई की याद आती है, किसी अवतार की याद आती है.

मोदीजी, योगीजी, सरकारें तो आप चला ही रहे हैं पर करोड़ों गरीब महिलाओं का यह भरोसा जो आपने पाया है -इसके आगे सचमुच दुनिया की कोई भी चीज मायने नहीं रखती. भगवान आपको हमेशा गरीब मां बहनों के जीवन बेहतर बनाने की ताकत देते रहें.

जय मोदी, जय योगी.

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