योग का एक अंग जीवन का निर्माण करता है

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“अष्टांग योग” पर आर्य गोष्ठी सम्पन्न

अष्टांग योग जीवन को संवारता और समृद्ध बनाता है-योगाचार्य सौरभ गुप्ता

योग का एक अंग जीवन का निर्माण करता है-अनिल आर्य (सम्पादक,गुड़गांव टूडे)

गाजियाबाद,शुक्रवार,5 मार्च 2021,केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में “अष्टांग योग” पर आर्य गोष्ठी का आयोजन ज़ूम पर ऑनलाइन किया गया।यह कोरोना काल में परिषद का 183 वां वेबिनार था।

केंद्रीय आर्य युवक परिषद के प्रधान शिक्षक योगाचार्य सौरभ गुप्ता गाजियाबाद ने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में आज हमारे बीच कई प्रकार के रोग उत्पन्न हो गए हैं,जो शरीर और मन को पूरी तरह से जकड़ चुके है,आज भौतिक युग में प्रत्येक मानव दैहिक,दैविक और भौतिक दुखों से घिरा हुआ है।इन समस्याओं को दूर करने के लिए प्राचीन काल में ऋषियों ने योग विद्या का ज्ञान हम सभी को दिया,जो आज पूरे मनुष्य-जाति को लाभ पहुंचा रही हैं और इसी योग विद्या में अष्टांग योग का उद्देश्य जीवन को संवारना और समृद्ध करना है। अष्टांग योग का अभ्यास सम्पूर्ण विश्व को सदाचारी बनने की अहम संजीवनी बूटी है।उन्होंने कहा कि मनुष्य यदि अष्टांग योग के किसी एक भी अंग को पालन कर ले तो जीवन आनंदमयी हो सकता है।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि सांसारिक कार्यों की सफलता,उचित तथा नियमित दिनचर्या पर निर्भर है एवं प्रेत्यक योगभूमि का सेवन करने के लिए यम और नियम का आचरण करना अत्यावश्यक हैं।योगदर्शन और शास्त्रों में इनका विवरण किया भी है।हमे योगदर्शन में वर्णित अष्टांग योग को जीवन मे अपनाने का प्रयास करना चाहिए।

कार्यक्रम अध्यक्ष गुड़गांव टूडे के संपादक अनिल आर्य ने कहा कि सनातन संस्कृति वह संस्कृति है जिसमें मनुष्य के परिमार्जन के लिए अष्टांग योग यम,नियम, आसन, प्राणायाम,प्रत्याहार, ध्यान,धारणा,समाधि जैसे दिव्य नियम दिए गये हैं।हमें अपनी संस्कृति का पालन कर इन्हेंअपने जीवन का अंग बनाना चाहिए और प्रतिदिन योग करने का संकल्प लेना चाहिए।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद उत्तर प्रदेश के महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि अष्टांग योग के विभिन्न अंगों का अभ्यास योग साधक को साधना करने लिए आवश्यक होता है।इससे शरीर,मन की अशुद्धियाँ दूर होती हैं और क्रमशः अभ्यास से आध्यात्मिक उपलब्धियों की प्राप्ति होने लगती है।

गायिका दीप्ति सपरा,प्रवीना ठक्कर,बिन्दु मदान,रविन्द्र गुप्ता,कुसुम भण्डारी,संध्या पांडेय,सुदेश आर्या,सविता आर्या,ईश्वर देवी आर्या,विभा भारद्वाज,विजय हंस आदि ने अपने गीतों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस अवसर पर आचार्य महेन्द्र भाई,प्रेम सचदेवा,राजेश मेंहदीरत्ता,धर्मपाल आर्य,राम कुमार सिंह,आनन्द प्रकाश आर्य,डॉ रचना चावला, व्यायामाचार्य सूर्यदेव आर्य, योगाचार्य मनोज आर्य,अरुण आर्य,मनीषा आर्या,प्रगति,शिवम मिश्रा,पिन्टू आर्य आदि उपस्थित थे।

भवदीय,
प्रवीण आर्य,
मीडिया प्रभारी,
9716950820,991140442

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