वैक्सीन की खाली शीशी से बना दी 80 हजार डोज, प्रधानमंत्री ने लिया संज्ञान।

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केरल में नर्सो नें कोरोना से जारी संघर्ण के बीच एक अनूठा काम किया है। वहाँ पर नर्सो ने खाली शीशी को फेका नही, बल्कि उसको जमा किया और उसमे आखिरी में जो थोड़ी दवा बच जाती है, उससे 80 हजार डोज तैयार कर दिया।

आप समझ सकते है कि 80 हजार लोगों के लिए उम्मीद का किरण है जगा वाली नर्सों को पूरा देश सम्मान कर रहा है। स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस पर संज्ञान लिया और इस अनूठे कार्य के लिए केरल के नर्सो का दिल आभार व्यक्त किया। नरेन्द्र मोदी ने लोगो को इनसे प्रेरणा लेने की सलाह भी दिया है।

आपको बता दे कि एक तरफ जहाँ केरल के नर्स ने 80 हजार डोज अपने अथक प्रयास से तैयार कर लोगो के सामने मिशाल पेश किया है। वही 36 हजार से ज्यादा इंजेक्शन पंजाब के नदियों मे फेके जाने को लोग हत्या करार दे रहे है। 36 हजार इंजक्शन जो कि रेमडेसिविर का था, जिसके लिए पूरे भारत लाईन में लगा हुआ है वो भी बिना किसी उचिक प्रेस्क्रिप्शन के। कही न कही इस इंजेक्शन का फेका जाना एक साजिश का हिस्सा होगा।

दूसरी महत्वपूर्ण बात जहाँ बांकि राज्य के सरकारों ने लाखो डोज अपने अव्यवस्था के कारण बर्बाद किया है वहाँ इस 80 हजार डोज का बचाया जाना काविले तारीफ है।

वास्तव में केरल और कर्नाटक ने नर्सिंग के क्षेत्र में काफी काम किया है। इन दोनों राज्यों में नर्सिंग के लिए सैकड़ो स्कूल कालेजस है। वहाँ पर प्रशिक्षित होकर महिला तथा पुरुष दोनों तरीके के नर्स पूरे दुनिया में अपने सेवाएँ दे रहे है। बल्कि यहाँ कहना होगा कि दुनिया के कई अलग अलग देशों में भी सेवा कार्य कर रहे है। निसंदेह इसके पीछे अच्छी आर्थिक पैकेज और अच्छी जीवन पद्धति भी है। लेकिन इन सबसे ज्यादा इनके पीछे एक सेवा भावना भी है।

हालाँकि भारत में आज भी सेवारत नर्स और डाक्टर जरूरत से बहुत कम है। यह बात महामारी से उपजे इस संकट के समय साफ साफ झलकने लगा है। हमारे यहाँ पर 483 लोगों पर एक नर्स है। एक शोध के अनुसार देश में 20 लाख नर्सों और 6 लाख डाक्टरो की कमी है। महामारी ने इस बात को लेकर काफी ध्यान खिचा है। जरूरत है ध्यान दिये जाने की।

हम सब जानते है कि डाक्टर को देवदूत कहा जाता है। चिकित्सीय पेशे की सेवा भावना को देखकर इस पेशे को पवित्र पेशा भी कहा जाता है। चिकित्सीय पेशे में डाक्टर के साथ-साथ नर्सों की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। क्योंकि दिन रात मरीजों की परिचर्चा में नर्स ही लगी रहती है। डाक्टर तो कुछ समय के लिए आते है। इसलिए नर्सों के बिना चिकित्सा की कल्पना भी नही की जा सकती है। इसलिए पूरी दुनिया में आज नर्सिंग पेशे को सम्मान के सात देखा जाता है।

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