विचार नहीं छिपते

4 months ago Vatan Ki Awaz 0

विचार नहीं छिपते
महाभारत काल की बात है । अज्ञातवास में पांडव रुप बदलकर ब्राह्मणों के वेश में रह रहे थे । एक दिन मार्ग मे उन्हें कुछ ब्राह्मण मिले । वे राजा द्रुपद की पुत्री द्रौपदी के स्वंयवर मे जा रहे थे । पांडव भी उनके साथ चल पड़े । स्वंयवर में एक धनुष को झुकाकर बाण द्वारा निशाना लगाना था । वँहा आए समस्त राजा निशाना लगाना तो दुर, धनुष को झुका भी नही सके । लेकिन अर्जुन के साथ हो गया । तत्पश्चात पांडव द्रौपदी के साथ लेकर अपनी कुटिया मेँ आ गए ।

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एक ब्राह्मण दवारा स्वंयवर मे विजयी होने पर राजा द्रुपद को बड़ा आश्चर्य हुआ । वह अपनी पुत्री का विवाह अर्जुन जैसे वीर युवक के साथ करना चाहते थे । अत: राजा द्रुपद ने पाड़वों की वास्तविकता का पता लगाने के लिए राजमहल मे भोज का कार्यक्रम रखा और उसमे पाडंवो को बुलाया । राजमहल को कई वस्तुओं से सजाया गया था । एक कक्ष में फल ,फुल ,आसन आदि ब्राह्मणो के उपयोग की वस्तुएं तथा दुसरे कक्ष मे गाय ,रस्सियां ,बीज आदि किसानों के उपयोग की सामग्री रखवाई । तीसरे कक्ष में युध्द में काम आने वाले अस्त्र – शस्त्र रखवा दिए ।
भोजन करने के बाद सभी लोग अपनी पंसद की वस्तुएं देखने लगे । ब्राह्मण वेशधारी पांडव सबसे पहले उसी कक्ष में गए जंहा अस्त्र – शस्त्र रखे थे द्रौपदी के पिता राजा द्रुपद बड़ी बारीकी से उनकी गतिविधियां देख रहे थे । वे समझ गए कि ,” सच बताइए , आप ब्राह्मण हैं या क्षत्रिय । आपने ब्राह्मणों के समान वस्त्र जरुर पहन रखे हैं परंतु आप लोग है क्षत्रिय ।“
युधिष्ठिर हमेशा सच बोलते थे । उन्होने स्वीकार कर लिया कि वे सचमुच क्षत्रिय हैं और स्वयंवर मे जीतने वाला अर्जुन है । यह जानकर राजा द्रुपद खुश हो गए ।
व्यक्ति अपना वेश भले ही बदल ले लेकिन उसके विचार आसानी से नहीं बदलते । हम जीवन मे जैसे काम करते है , वैसे ही हमारे विचार रहते है ।

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