30 प्रतिशत मुसलमान बनायेंगे 4 नये पाकिस्तान : शेख आलम टीएमसी नेता

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एक तरफ जहाँ बंगाल चुनाव अपने चरम सीमा पर पहुँचती जा रही है वही दूसरी तरफ हिन्दू मुसलमान भी अपने चरम सीमा पर है। इतिहासकार बताते है कि यह हालत 1943-44 के इलेक्शन मे भी था जब कांग्रेस और मुस्लीम लीग चुनाव में आमने सामने था और पाकिस्तान के हिस्से के मुसलमानों नें कांग्रेस को वोट दिया था जबकि हिन्दुस्तान के हिस्से के मुसलमानों नें जिन्ना को पाकिस्तान के नाम पर वोट दिया था। आज भी वही हालत है जहाँ एक तरफ पाकिस्तान के मुसलमान भारत से कोरोना वेक्सीन पाने के बाद मोदी मोदी कर रहा है वही दूसरी तरफ भारत के मुसलमान 4 और पाकिस्तान बनाने की बात कह कर उन लिबरल हिंदुओं के मुंह पर तमाचा मार दिया है जो उसे अपना समझते है।

टीएमसी के नेता शेख आलम के ब्यान ने एक बार फिर से राजनीतिक गलियारे में हंगामा मचा दिया है। शेख आलम ने अपने चुनावी भाषण में कहा है कि अगर 30 प्रतिशत भारत के मुसलमान एक साथ हो जाये तो चार पाकिस्तान और बना देंगें। हालाँकि कांग्रेस और वामपंथी सेक्यूलर पार्टियों में इससे कोई फर्क नही पड़ता है कि पाकिस्तान कितना बने। लेकिन बीजेपी और हिन्दुवादी संगठनों नें इसे आड़े हाथों लिया है।

इतिहासकार बताते है कि यह स्थिति लगभग वैसा ही है जैसा कि 1937 और 1943 के चुनाव में समय में था। उस समय भी पाकिस्तान के नाम पर ही वोट मांगे गये थे और इस समय भी वही हो रहा है। ऐसे ही मारकाट कि स्थिति उस समय में भी था और इस समय में भी है। इतिहासकार श्री कृष्णानन्द सागर बताते है कि उस समय में भी जिन्ना ने साफ कहा था कि हिन्दू मुसलमान एक साथ नही रह सकता है उसे मुसलमानों के लिए देश चाहिए। इसी के लिए नोआखली जैसा डायरेक्ट एक्शन भी किया गया।

सबसे बड़ी बात उस समय में पाकिस्तान के हिस्से के मुसलमानों ने जिन्ना को वोट नही दिया लेकिन इस समय कि भारत के मुसलमानों ने उसे वोट दिया और जब पाकिस्तान बन गया तो वहाँ गया भी नही। इस समय में भी यही हो रहा है। मुस्लिम लीग कांग्रेस को हिन्दुवादी पार्टी मानता था लेकिन कांग्रेस को तो सेक्यूलरिज्म का एक नशा था और उसने कभी अपने आप को हिन्दू के पक्ष मे रखा ही नही अपितु हिन्दुओं को और बेरियों में जकड़ दिया। जिसके कारण 40 लाख से ज्यादा लोगों को अपना जान गवाना पड़ा, महिलाओं और बच्चों को यातनाएँ झेलनी पड़ी। इसलिए मुसलमानों का तो ये सोची समझी योजना है और वह इसी योजना पर काम करते है। अगर कह रहे है तो चार पाकिस्तान बनेंगे।

जिस देश की हालत ये हो कि अपने देश के लोग बाहरी और बाहरी के लिए मरने मारने के लिए तैयार हो तो उसका क्या होगा। उत्तर प्रदेश में योगी मोदी बाहरी है और रोहिंग्या बंग्लादेशी यहाँ का है यह बात प्रदेश के पूर्व मुख्यमत्री कहते हो तो जान लिजिए कि मानसिकता क्या है। महाराष्ट्रा में बिहारी और पूर्विया बाहर के और बंग्लादेशी वहाँ के बसिंदे है। इसी प्रकार से बंगाल में योगी मोदी अमितशाह बाहर के और यशवंत सिंहा बंगाल के। इसके अलावा ढेरों रोहिंग्या मुसलमान और बंग्लादेशी बंगाल के है। जबकि देश की बटबारे इसी आधार पर हुआ था कि इस देश में मुसलमान नहीं रहेंगे।

देश के जनता एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी के तरफ शक भरी निगाहों से देख रहा है। कहीं ऐसा न हो कि भारतीय जनता पार्टी के सरकार भी 1947 के कांग्रेस की तरह ही निकले। ऐसे में जानकार बताते है कि हिन्दू को स्वयं से ही सतर्क रहना होगा। कोई भी सरकार इतने बड़े फौज से अकेले नहीं लड़ सकता है। क्योंकि कांग्रेस ने कभी हिन्दुओं का नेतृत्व नही किया। जबकि मुसलीम लीग उसे हिन्दुवादी पार्टी मानती थी, लेकिन कांग्रेस को तो सेक्यलरिज्म के नशा था।

श्री कृष्णानन्द सागर के द्वारा लिखित ग्रन्थ विभाजिन कालीन भारत के साक्षी जो कि 500 से ज्यादा लोगों से साक्षात्कार लेकर प्रकाशित किया जा रहा है। साक्षात्कार देने वाला व्यक्ति या तो स्वयं उस समय का भूक्तभोगी रहा है या उसके परिवारजन रहा है। यह कथा को सीधे प्रकाशित किया जा रहा है बिना किसी तोड़ मरोड़ के। जो कि भारत के सेक्यूलर के आंखो पर लगे भाईचारा वाले विश्वास को दूर करेगा और समझायेगा की भाई कौन है और चारा कौन है।

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