2022 तक गरीबों को अपना मकान कैसे , जब 3 लाख घर खरीदारों को नही मिला न्याय

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बहुत पहले एक हिंदी फिल्म का गाना था “जरा धीरे चलो साजना, हम भी पीछे है तुम्हारे” योगी सरकार भी बांकि सरकारों की तरह घोषणा पर घोषणा किए जा रही है। लेकिन उसका धरातल पर सच क्या है यह जानने की कोशिश करते है ।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नें रविवार कहा कि वर्ष 2022 तक उत्तर प्रदेश के हर गरीब के पास अपना मकान होगा ? जाहिर सी बात है कि 2022 मे इलेक्शन है तो हर गरीबों को अगर मकान मिल जाये तो निश्चित ही वोट बैंक भी बढ़ेंगे और प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री और सतासीन पार्टी में विश्वास भी बढेंगे। लेकिन यह घोषणा जमीनी स्तर पर एक स्वप्न जैसा लग रहा है जिसे पूरा कर पाना संभव नही है।

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अगर हम नोएडा ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे की बात करे तो यहाँ लगभग 2 लाख सेे ज्यादा लोग है जो 10 साल से अपने घर का इंतजार कर रहे है। अपने जीवन भर की जमा पूंजी बिल्डर के हवाले कर दिया है। उसके बाद आज भी अपने फ्लैट के इंतजार में मारे-मारे फिर रहे है। क्या ये 2 लाख लोग गरीब नहीं है ? क्या इन लोगों को उनका हक नहीं मिलना चाहिए ? जो थोड़े बहुत लोगों को फ्लैट मिला भी है उसका रजिस्ट्री नही हो सकता है , क्योंकि बिल्डर , नौकरशाह, अफसर और नेता मिलकर बड़ा घोटाला किया हुआ है। प्राधिकरण का पैसा बांकि है, ऐसे में जब तक प्राधिकरण का पैसा बिल्डर नही देगा प्राधिकर रजिस्ट्री के लिए नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट नही जारी करेगा।

जब सर्टिफिकेट जारी नहीं करेगा रजिस्ट्री नही किया जायेगा। क्षेत्र के अधिकतर प्रोजेक्ट फैल हो चुका है, या यह कहे कि बिल्डर इसे पूरा ही नही करना चाहता है। क्योंकि सरकार में उसका सांठगाठ है और सुबह शाम सचिव स्तर के लोग के साथ बिल्डर चाय पीते है।

ऐसे यह नियम भी कोई कारगर नही है। अन्यथा नोएडा सेक्टर 81 में लोगों ने सरकार जमीन को बेच दिया। प्राधिकरण तो कुंभकरण है जो कभी कभी जगती है और जब जगती है तो कारवाई करने पहुँचती है। जब पहुँचती है तो पता चलता है कि सारा खेल ही खत्म है। ऐसा नहीं कि इस खेल के लिए प्राधिकरण जिम्मेदार नहीं है। लेकिन है भी तो कौन क्या करेगा ? जब सईयाँ भये हवलदार तो डर काहे कि ? शाहबेरी मेें कोर्ट के स्टे आर्डर के बावजूद लगातार रजिस्ट्री किया जा रहा है। हिंडन में अतिक्रमण का सिलसिला जारी है। कहानी तो बहुत है अगर पूरा सुनाने लगा तो महीनों गुजर जायेंगे। इसलिए आते है मुख्य मुद्दे पर

देश के प्रधानमंत्री ने जनता को विश्वास दिलाया था कि 2022 तक देश के सभी गरीबों को मकान दे दिया जायेगा। कई बार हमने नोएडा ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे को लेकर पीएम ग्रिवेन्स से जानकारी मांगी की अभी तक यहाँ पर कितने मकान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाये गये है। कोई जबाब नही दिया गया जबकि 2021 के भी 3 महीने गुजर चुके है।

आखिर उन 2 लाख घर खरीदारों का दोष क्या है ? आप गरीबों को मकान देंगे बात सही है लेकिन जिसमें आपको और आपके बिल्डर को अपने जीवन के जमा पूंजी देकर अपने आपको कंगाल कर लिया है उसका क्या दोष है ? बस यही दोष है कि उसने बिल्डर पर विश्वास किया और छत पाने के लिए प्रयास किया, जिसकों राजनीति से संरक्षित बिल्डरों नें लूट लिया और अब उनकों न्याय देने वाला कोई नही है।

2012 में माननीय उच्च न्यायायलय के निर्देशन में मास्टर प्लान बना था कि 20-25 % मकान EWS/LIG बनाये जाएंगे। जिसे शहरी गरीब रेहड़ी पटरी वालों, औद्योंगिक मजदूरों को दिए जायेंगें। लेकिन उन सभी को बिल्डरों कों दे दिया गया और बिल्डरों घर खरीदारों को बेच दिया। गरीबों के हक को घर खरीदारों को बेच दिया गया। न गरीबों को मिला न घर खरीदारों को , लेकिन बिल्डर ने माल कमाया और निकल लिया।

माननीय न्यायालय नें एक मुख्य सचिव स्तर की जांच कराने का निर्देश दिया था। मामला औद्योगिक भूमि को आवासीय में बदलकर बिल्डर को बेचने का था। किसानों नें 64.5 का मुआबजा का मांग किया था। जिसके बाद जांच की आदेश हुई थी। लेकिन सपा सरकार के 5 साल और अब बीजेपी सरकार के 4 साल गुजर जाने के बाद मामला जस-का-तस बना हुआ है। सीएजी आडिट कराया गया लेकिन उसका भी कोई रिपोर्ट साझा नही किया गया है आज तक।

प्रदेश के पुलिस तंत्र में सुधार जरूर है लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई भी सुधार नही किया जा रहा है। भ्रष्ट्राचार की जड़ इतनी मजबूत है कि उसे हिलाना भूकंप लाने के बराबर होगा। सरकारी -काम काजों में कोई बदलाव नहीं है सिर्फ माफिया बदल गया है सता के साथ-साथ। गरीब पहले भी परेशान था और आज भी है। आज भी रेहड़ी पटरी वालों से वसूली किया जा रहा है वहाँ भी रेहड़ी पटरी माफिया सक्रिय है।

सवाल उठता है कि क्या योगी सरकार ऐसे नौकरशाह के बल पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हर गरीब को छत मिल पायेगा ? योजनाओं का लाभ भी मिलीभगत से ही दिया जा रहा है। जो जितना चापलुस होगा उसको उतना लाभ होगा। मजदूर तो पहले भी फुट-पाथ पर था और आज भी है। नोएडा शहर के कन्सट्रक्शन मजदूर के द्वारा बनाये गये झुग्गी को राजनीतिक तरीके से कब्जा कर लिया जाता है और फिर उसे किराये पर लगा दिया जाता है। जबकि उस झुग्गी का मजदूरों से कोई भी लेना देना नही होता है। उसमें लोग किराये पर रहते है, उसके नाम पर एनजीओ चलाये जाते है और सरकार से लाखों रुपये ऐठ लिए जाते है। शहर के खुबसुरती में चार चांद लगाते है लेकिन सरकार के पास कोई योजना नही होता है जो इनको हटा सके। मजदूर तो आते है और काम खत्म करके चले जाते है।

नोएडा सेक्टर 15,16,17,18 में बने झुग्गी, सेक्टर 8 इन सभी का रिकार्ड जांच किया जाये तो एक भी कन्सट्रक्शन ंमजदूर नही मिलेंगे। सरकार जब तक कछुए की चाल से योजना बनाती है तब तक यह समस्या हाथी की तरह से खड़ी हो जाती है। राजनीतिक दखलंदाजी इसका मुख्य कारक है।

हम तो चाहते है कि योगी आदित्यनाथ जो कि पुलिस व्यवस्था में सुधार कर देश में अपना नाम ऊंचा किया है , प्रशासनिक स्तर पर भी सुधार करे। नोएडा प्राधिकरण जो कि भ्रष्ट्राचार के भंडार है कभी उसमें भी झांके और जो संदिग्ध है उसको बाहर निकालें। उन 2 लाख गरीबों को भी उसका हक दे। उन्होने जीवन भर के कमाई बिल्डरों के हाथ लुटाई है। उम्मीद है कि प्रदेश सरकार इस विडियों को देखने के बाद संज्ञान लेगी औऱ लोगों को उसका हक दिलवायेगी।

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