2020: नेता जी सुभाष चंद्र बोस जयंती, जाने खाश बाते।।

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर 23 जनवरी को सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है. इससे पहले भी 2014 तक 23 जनवरी को नेताजी की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश दिया जा रहा था. परंतु वर्ष 2015 से 2019 तक इस दिन मिलनेवाली छुट्टी बंद हो गयी थी. मुख्यमंत्री ने इसकी समीक्षा करते हुए इस वर्ष 23 जनवरी के दिन कार्यपालक आदेश के तहत सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है, बता दें स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाने वाले सुभाष चंद्र बोस को प्यार से लोग नेताजी कहकर बुलाते थें। देशप्रेम से भरे नेताजी की जयंती हर साल 23 जनवरी को मनाई जाती है। आइए जानते हैं

उनसे जुड़ी कुछ ऐसी बातों को जिनसे हैं आप अनजान ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा’आजाद हिंद फौज के नायक सुभाष चंद्र बोस यूं तो किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। पर नेताजी की जयंती के अवसर पर हम आपको बताएंगे उनसे जुड़ी खास बातें। “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा” के नारे से देशवासियों में जोश और ऊर्जा भर देने वाले बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 को उड़ीसा राज्य के कटक शहर में हुआ था।

गांधी जी से पहली मुलाकात सुभाष चंद्र बोस की गांधी जी से पहली मुलाकात 1921 में हुई। इसके बाद ही वो आजादी की लड़ाई का हिस्सा बने। उनमें मौजूद देशप्रेम को देखते हुए गांधी जी ने उन्हें देशभक्तों का देशभक्त होने का दर्जा दिया था। हालांकि, भगत सिंह की फांसी के बाद उन दोनों में कुछ दूरियां आ गईं।

झारखंड से नेताजी का गहरा रिश्ताहर किसी का किसी न किसी जगह से एक गहरा रिश्ता जरूर रहता है। जैसा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का झारखंड से रहा। आखिरी बार नेताजी गोमो रेलवे स्टेशन से ही ट्रेन पकड़कर रवाना हुए थे। नेताजी यहां कांग्रेस के रामगढ़ अधिवेशन में पहुंचे थे। साथ ही गांधी के समानांतर सहजानंद सरस्वती के साथ मिलकर अलग सभा की थी। रांची में लालपुर स्थित डॉ. सिद्धार्थ मुखर्जी के पिता क्रांतिकारी यदुगोपाल मुखर्जी से भी वे मशविरा लिया करते थे। झारखंड में रहने वाले बंगाली समाज के लोग और बंगभाषी समुदाय नेताजी को इन्हीं कारणों से लगातार याद रखे हैं और उनकी जयंती पर तरह-तरह के आयोजन होते हैं।

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