सोने की रोटी

5 months ago Vatan Ki Awaz 0

सिकंदर में असाधारण प्रतिभा और योग्यता थी। वह विश्व विजेता बनना चाहता था। उसने अनेक देशों पर विजय प्राप्त की थी। विजय के उन्माद में उसने निर्ममतापूर्वक नर संहार किय, काफी धन-संपदा लूटी और अपने सैनिकों को मालामाल कर दिया। एक बार सिकंदर ने ऐसे नगर पर चढ़ाई की जहा केवल स्त्रियां और बच्चे ही थे। सारे पुरूष पहले ही युध्द में मारे जा चुके थे। स्त्रियां असहाय थी। उनके पास आत्मरक्षा का कोई साधन नही था। सिकंदर सोच में पड़ गया कि  शस्त्रहीन स्त्रियों से कैसे युध्द किया जाए-यह बात उसकी समझ में नही आ रही थी।

दोपहर में सिकंदर को भूख लगी। उसने एक मकान के सामने अपना घोड़ा रोका। कई बार पीटने पर दरवाजा खुला और एक वृध्दा लाठि टेकती हुई बाहर निकली। सिकंदर बोला, घर में कुछ खाना हो तो ले आओ, मुझे भूख लगी है।,

वृध्दा भीतर गई और कपड़े से ढका हुआ थाल ले आई। उसने थाल को सिकंदर के आगे बढ़ा दिया। कपड़ा हटाने पर सिकंदर ने देखा कि उसनमें सोने के कुछ पुराने गहने थे। वह क्रोधित होकर बोला,” यह क्या लाई है बढ़िया? क्या मैं इन गहनों को खाऊंगा? मैंने तूझसे रोटिया मांगी थी।

वृध्दा बोली,” तू सिकंदर है न? मैंने तेरा नाम बहुत सुना था और आज तुझे देख भी लिया । मेंने यह भी सुना था कि  सोना ही तेरा भोजन है। इसी भोजन कि तलाश में तू यहां आया है। सोना और धन लूटकर तू बेगुनाह लोगों को मौत के घाट उतार रहा है। अगर तेरी भूख रोटयों से मिटती तो क्या तेरे देश में रोटियां नहीं थी? तू क्यों दूसरों की रोटियां छीनने के लिए यहां चला आया?

सिकंदर उस वृध्दा का मुँह देखता रह गया। उसने वृध्दा से माफी मांगी और सोना को वापस लौटाने का आदेश दिया। तब वृध्दा ने उसे बड़े प्यार से रोटी खिलाई। सिकंदर उसे धन्यवाद देता हुआ वापस लौट गया।

 

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