सीखने की उम्र

5 months ago Vatan Ki Awaz 0

यह उस समय की घटना है जब हमारा देश अंग्रेजों का गुलाम था। महाराष्ट्र के एक गांव की पाठशाला का निरीक्षण करने के लिए वहां के निरीक्षक पहुंचे। उनका नाम था-विनायक। वहां के बच्चों को अग्रेंजी और मराठी में पढ़ा रहे थे। उन्होंने एक अधेड़ शिक्षक से पूछा,” आप बच्चों को अंग्रेजी और मराठी में पढ़ाते हैं, यह तो अच्छी बात है लेकिल हिंदी को हमने राष्ट्रभाषा माना है। देश के कोने-कोने में हिंदी पढ़ी और बोली जाती है। यदि आप अपने बच्चों को हिंदी नहीं पढ़ाएंगे तो यहां के बच्चे पिछड़ जाएंगे। आप इन्हैं हिंदी में भी पढ़ाया करें।“

शिक्षक बोला,” सर, हमें हिंदी आती ही नहीं तो हम पढ़ाएं कैसे?”

विनायक बोले,” हिंदी सीखना आसान है। आप हिंदी सीख लीजिए।“

लेकिन शिक्षक हिंदी सीखने को तैयार नहीं था। वह बोला,” सर, आप जो कह रहे हैं, वह तो ठीक है। लेकिन अब इस उम्र में हम कोई नई भाषा नहीं सीख पाएंगे। इस समय हमें जो कुछ आता है, उससे ही जितना चाहें काम ले लें। आप चाहें तो छह घंटे के बजाय आठ घंटे काम करा लें लेकिन नई पढ़ई न कराएं।“

इस पर विनायक ने उसे समझाया,” कोई व्यक्ति 20वर्ष का हो या 80वर्ष का, अगर उसकी कुछ नया सीखने की इचछा शक्ति मर गई है तो वह बूढ़ा नहीं, निर्जीव भी है। यही मानसिकता इस देश की गुलामी का कारण है।“

उस अधेड़ शिक्षक पर विनायक की बात का गहरा असर पड़ा और उसने कुछ ही दिनों में हिंदी सीख ली। जानते हो वो विनायक कौन थे? वो थे विनोबा भावे। उनका बचपन का नाम विनायक था। बाद में महात्मा गांधी ने उनका नाम विनोबा भावे रखा था। वे किसी को मात्र उपदेश ही नहीं देते थे बल्कि स्वयं भी उसका पालन करते थे। वे अंतिम समय तक कुछ न कुछ नया कार्य सीखते रहे। 46 साल की आयु में उन्होंने अरबी भाषा सीखकर कुरान शरीफ का अध्ययन किया। यही नही, सभी धर्मों को समझने के लिए उन्होंने 16 भाषाएं सीखीं।

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