सिर के बीमारी दूर करने के लिए योगासन

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योग भारत तथा दुनिया भर के लिए सबसे पौराणिक कथा प्राकृतिक इलाज है । योग अपनाने से प्राणी जीवन भर स्वस्थ रह सकता है । योग माने तो जीवन का ही आधार है । क्योंकि संसार मे जो भी घटना घटित होता है उसका संवध कही न कही योग  से है । प्राणी के जन्म मे सबसे बड़ा संयोग ही योग है ।

किस रोग मे करे कौन सा आसन ?

2. क्या आप सिर की बिमारियो से परेशान है ?

तो करे यह आसन

सर्वांगासन

सर्वांगासन | Sarvangasana in Hindi

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सर्वांगासन या कंधों के सहारे एक योग आसन है, जिसमें पूरे शरीर को कंधों पर संतुलित किया जाता है। यह पद्म साधना योग का भी एक हिस्सा है। ‘सर्व’ का मतलब है, ‘अंग’ का मतलब शरीर का हिस्सा है, और ‘आसन’ मुद्रा है। जैसा कि नाम इंगित करता है, सर्वंगासन। आपके शरीर के सभी हिस्सों की कार्य प्रणाली को  प्रभावित करता है। यह आसन मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में बेहद फायदेमंद है और इसे ‘आसन की रानी’ भी कहा जाता है।

जो कि यह आसन शरीर के सभी अंगो को व्यायाम देता है इसलिए इसको सर्वांगासन (सम्पूर्ण-अंग-आसन) कहा जाता है। अंग्रेजी में इस आसन को Shoulder Stand Pose भी कहा जाता हैं। सर्वांगासन करने की प्रक्रिया और लाभ नीचे दिए गए हैं

Sarvangasana in Hindi

सर्वांगासन करने की प्रक्रिया | How to do Sarvangasana

यदि आपको उच्च या कम रक्त-चाप, ग्लूकोमा, थायराॅइड, गर्दन या कंधे में चोट जैसी कोई भी समस्या है तो यह आसन करने से पहले किसी चिकित्सक अथवा आर्ट ऑफ़ लिविंग प्रशिक्षक की राय अवश्य लें।

  • अपनी पीठ के बल लेट जाएँ। एक साथ, अपने पैरों, कूल्हे और फिर कमर को उठाएँ। सारा भार आपके कन्धों पर आ जाये । अपनी पीठ को अपने हाथों से सहारा दे।
  • अपनी कोहनियों को पास में लें आयें। हाथों को पीठ के साथ रखें, कन्धों को सहारा देते रहें। कोहनियों को ज़मीन पर दबाते हुए और हाथों को कमर पर रखते हुए, अपनी कमर और पैरों को सीधा रखें। शरीर का पूरा भार आपके कन्धों व हाथों के ऊपरी हिस्से पर होना चाहिए, न कि आपके सर और गर्दन पर।
  • अपने पैरों को सीधा व मज़बूत रखें। अपने पैर कि एड़ी को इस भांति ऊँचा रखें जैसे आप छत को छूना चाहते हो। अपनी पैरों कि उँगलियों को नाक की सीध में लें आयें। अपनी गर्दन पर ध्यान दे, उसको ज़मीन पर न दबाएँ। अपनी गर्दन को मज़बूत रखें और उसकी मासपेशियों को सिकोड़ लें। अपनी छाती को ठोड़ी से लगा लें। यदि गर्दन में तनाव महसूस हो रहा है तो आसन से बहार आ जाएँ।
  • लंबी गहरी साँसे लेते रहें और ३०-६० सेकण्ड्स तक आसन में ही रहें।
  • आसन से बहार आने के लिए, घुटनो को धीरे से माथे के पास लें कर आयें। हाथों को ज़मीन पर रखें। बिना सर को उठाये धीरे-धीरे कमर को नीचे लें कर आयें। पैरों को ज़मीन पर लें आयें। कम से कम ६० सेकण्ड्स के लिए विश्राम करें।

सर्वांगासन के लाभ | Benefits of the Sarvangasana

  • गलग्रंथि (Thyroid) व परावटु ग्रंथियों को सक्रिय करता है तथा उनका पोषण करता है।
  • हाथों व कन्धों को मज़बूत बनाता है और पीठ को अधिक लचीला बनाता है।
  • अधिक रक्त पहुँचा कर मस्तिष्क का पोषण करता है।
  • दिल कि मासपेशियों को सक्रिय करता है और शुद्ध रक्त को दिल तक पहुँचाता है।
  • कब्ज़ से राहत देता है और पाचन क्रिया को सक्रिय बनाता है।

सर्वांगासन के अंतर्विरोध | Contraindications

यदि आपको निम्न में से कोई समस्या है तो सर्वांगासन करने से पूर्व अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें गर्भावस्था, माहवारी, उच्च रक्तचाप, ह्रदय रोग, ग्लूकोमा, स्लिप डिस्क, स्पोंडिलोसिस, गर्दन में दर्द या गंभीर थाइरोइड की समस्या

शीर्षासन 

शीर्षासन योग क्या है ?

शीर्ष का मतलब होता है सिर (माथा) और आसन योगाभ्यास के लिए इस्तेमाल किया जाता है। शीर्षासन के जितने भी फायदे गिनाये जाएं कम है। इसकी लाभ और उपयोगिता इस बात से समझा जा सकता है कि आसनों की दुनिया में इस योगाभ्यास को राजा के नाम से जाना जाता है। यह योगाभ्यास आपको सिर से लेकर पैर की उँगुलियों तक फायदा पहुँचाता है।

शीर्षासन योग कैसे करें?

वैसे पहले पहले लोग इस आसन के अभ्यास से घबराते हैं। लेकिन इसके करने के तरीके पता हो तो इसको बहुत आसानी के साथ प्रैक्टिस किया जा सकता है। और इस योग का ज़्यदा से ज़्यदा फायदा उठाने के लिए जरूरी है इसको सही विधि के साथ किया जाए। यहां पर आपको शीर्षासन के सरल तरीके बताये जा रहे हैं।

शीर्षासन विधि

  • सबसे पहले आप अपने योग मैट के आगे बैठ जाए।
  • अब आप अपने अंगुलियों को इन्टर्लाक करें और अपने सिर को उस पर रखें।
  • धीरे धीरे अपने पैरों को इन्टर्लाक अंगुलियों का मदद लेते हुए ऊपर उठायें और इसे सीधा करने की कोशिश करें।
  • शरीर का पूरा भार अब आप इन्टर्लाक किये हुए अंगुलियों और सिर पर लें।
  • इस अवस्था में कुछ देर तक रुकें और फिर धीरे धीरे घुटनों को मुड़ते हुए पैरों को नीचे लेकर आयें।
  • यह एक चक्र हुआ।
  • आप इसे 3 से 5 बार कर सकते हैं।

शीर्षासन योग के लाभ

जितने भी योगाभ्यास है उसमें शीर्षासन को किंग कहा गया है। इसी बात से इसके फायदे और महत्व के बारे में जाना जा सकता है।

  1. शीर्षासन वजन के कंट्रोल में: इस योगाभ्यास के करने से थाइरोइड एवं पारा थाइरोइड अंतःस्रावी गंथियों को स्वस्थ बनाने में मदद मिलती है और हॉर्मोन का सही तरीके से स्राव होने लगता है। मेटाबोलिज्म को नियंत्रित करता है और शरीर के वजन को बढ़ने से रोकता है।
  2. शीर्षासन रोके बालों का गिरना: शीर्षासन बालों को सूंदर बनाता है। शीर्षासन अभ्यास से मस्तिष्क वाले भाग में ऑक्सीजन का प्रवाह अधिक हो जाता है और मस्तिष्क को उपयुक्त पोषक तत्व पहुँचता है। शीर्षासन न केवल बालों के झड़ने को ही नहीं रोकता बल्कि बालों से सम्बंधित और समस्याओं जैसे काले व घने बाल, लम्बे बाल, बालों का कम झरना, बालों को सफेद होने से रोकना इत्यादि में काम आता है।
  3. त्वचा के निखार में शीर्षासन: यह आपके त्वचा को मुलायम, खूबसूरत और ग्लोइंग प्रदान करता है। इसके अभ्यास से चेहरे वाले हिस्से में खून का बहाव अच्छा हो जाता है और शरीर के पुरे अग्र भाग में पोषक तत्व सही रूप में पहुँच पाता है।
  4. शीर्षासन मेमोरी बढ़ाने में: इस आसन के अभ्यास से सिर में रक्त का प्रवाह बढ़ता है जिससे स्मृति बढ़ती है।
  5. शीर्षासन तंत्रिका तंत्र के लिए: यह आसन तंत्रिका तंत्र को मजबूत करता है।
  6. शीर्षासन अंतःस्रावी गंथियों के लिए: यह आसन पिटुइटरी ग्रन्थि को स्वस्थ रखता है और इसके हॉर्मोन स्राव में मदद करता है। चूंकि शीर्षासन मास्टर ग्लैंड है इसलिए यह सभी अंतःस्रावी गंथियों को विनियमित करता है।
  7. शीर्षासन पाचन तंत्र के लिए: यह पाचन तंत्र को मजबूत करते हुए पाचन के लिए लाभकारी है।
  8. पीयूष ग्रन्थि के स्वस्थ में शीर्षासन: यह पीयूष (पिटुइटरी) ग्रंथि एवं शीर्ष ग्रंथि के कामकाज को बेहतर करता है।
  9. यकृत के स्वस्थ के लिए शीर्षासन: यह योगाभ्यास यकृत एवं प्लीहा के रोगों में लाभप्रद है।
  10. एकाग्रता को बढ़ाने के लिए शीर्षासन: यह एकाग्रता की क्षमता बढ़ाता है तथा अनिद्रा में सहायक है।

 

शीर्षासन की सावधानी

  • जिनको उच्च रक्तचाप हो उन्हें यह आसन नहीं करनी चाहिए।
  • हृदय रोग से पीड़ित लोगों को इस आसन के करने से बचना चाहिए।
  • सर्वाइकल स्पॉण्डिलाइटिस के रोगियों को यह आसन नहीं करना चाहिए।
  • शर्दी एवं अत्यधिक जुकाम के हालात में इस आसन को मत करें।
  • कान बहने की शिकायत होने पर भी इस आसन के करने से बचना चाहिए।
  • आरंभ में कम अवधि के लिए यह आसन करना चाहिए।

चन्द्रासन

सावधानी : यदि साइड या बेक पेन हो तो यह आसन योग चिकित्सक की सलाह अनुसार ही करें।

लाभ : इस आसन से घुटने, ब्लडर, किडनी, छोटी आँत, लीवर, छाती, लंग्स एवं गर्दन तक का भाग एक साथ प्रभावित होता है, जिससे क‍ि उपर्युक्त अंग समूह का व्यायाम होकर उनका निरोगीपन बना रहता है। श्वास, उदर, पिंडलियों, पैरों, कंधे, कुहनियों और मेरुदंड संबंधी रोग में लाभ मिलता है।

अर्ध का अर्थ आधा और चंद्रासन अर्थात चंद्र के समान किया गया आसन। इस आसन को करते वक्त शरीर की स्थिति अर्ध चंद्र के समान हो जाती है, इसीलिए इसे अर्ध चंद्रासन कहते है। इस आसन की स्थि‍ति त्रिकोण समान भी बनती है इससे इसे त्रिकोणासन भी कह सकते है, क्योंकि दोनों के करने में कोई खास अंतर नहीं होता। यह आसन खड़े होकर किया जाता है।

विधि : सर्वप्रथम दोनों पैरों की एड़ी-पंजों को मिलाकर खड़े हो जाएँ। दोनों हाथ कमर से सटे हुए गर्दन सीधी और नजरें सामने।फिर दोनों पैरों को लगभग एक से डेढ़ फिट दूर रखें। मेरुदंड सीधा रखें। इसके बाद दाएँ हाथ को उपर उठाते हुए कंधे के समानांतर लाएँ फिर हथेली को आसमान की ओर करें। फिर उक्त हाथ को और उपर उठाते कान से सटा देंगे। इस दौरान ध्यान रहे की बायाँ हाथ आपकी कमर से ही सटा रहे।फिर दाएँ हाथ को उपर सीधा कान और सिर से सटा हुआ रखते हुए ही कमर से बाईं ओर झुकते जाएँ। इस दौरान आपका बायाँ हाथ स्वत: ही नीचे खसकता जायेगा। ध्यान रहे कि बाएँ हाथ की हथेली को बाएँ पैर से अलग न हटने पाए।जहाँ तक हो सके बाईं ओर झुके फिर इस अर्ध चंद्र की स्थिति में 30-40 सेकंड तक रहें। वापस आने के लिए धीरे-धीरे पुन: सीधे खड़े हो जाएँ। फिर कान और सिर से सटे हुए हाथ को पुन: कंधे के समानांतर ले आएँ। फिर हथेली को भूमि की ओर करते हुए उक्त हाथ को कमर से सटा लें।यह दाएँ हाथ से बाईं ओर झुककर किया गए अर्ध चंद्रासन की पहली आवृत्ति हैं अब इसी आसन को बाएँ हाथ से दाईं ओर झुकते हुए करें तत्पश्चात पुन: विश्राम की अवस्था में आ जाएँ। उक्त आसन को 4 से 5 बार करने से लाभ होगा।

यह आसन कटि प्रदेश को लचीला बनाकर पार्श्व भाग की चर्बी को कम करता है। पृष्ठांश की माँसपेशियों पर बल पड़ने से उनका स्वास्थ्य सुधरता है। छाती का विकास करता है।

Dr. Anjana Somvanshi (Yoga, Therapist & Naturopathy doctor)