सच्ची सीख

5 months ago Vatan Ki Awaz 0

एक बार गुरू नानक देव अपने कुछ शिष्यों के साथ लाहौर गए । वहां यब नियम था । कि जिस व्यक्ति

के पास जितनी  अधिक धन संपत्ति होती थी, वह अपने घर के ऊपर उतने ही झंडे लगाता था उस समय लाहौर में दुनीचंद नामक व्यक्यि सबसे अधिक धनी और समृध्द था उसके पास लगभग 20करोड़ की संपत्ति थी इस कारण दुनीचंद के घर की छत पर बीस रंग बिरंगे झंडे लहरा रहे थे एक दिन दुनीचंद

भी गुरू नानक देव के दर्शन करने के लिए उनके पास जा पहुंचा और सिर झुकाकर बोला , महाराज मुझे भी अपनी सेवा का अवसर दीजिए।

गुरु नानक ने दुनीचंद को एक सुई देकर कहा, इस को ले जाओ और मुझे अगले जन्म मे वापस लौटा देना

दुनीचंद अपनी धन –संपत्ति के अभिमान में गुरु नानक का अभिप्राय नहीं समझ पाया और सुई लेकर चला गया

कुछ दिनों बाद विचार करने पर दुनीचंद ने सोचा कि वह गुरु नानक देव को अगले जन्म में सुई कैसे वापस करेगा ? मरने के बाद तो व्यक्ति कुछ भी अपने साथ नहीं ले जा सकता । उन्होंने अवश्य ही किसी विशेष अभिप्राय से मुझे सुई दी  है। यह सोचकर दुनीचंद उसी समय गुरु नानक देव के पास गया और प्रणाम करके बोला , महाराज। आपने मझे यह सुई दी है, इसे मैं अगले जन्म में आपको कैसे लौटा सकता हूँ? क्या मरने के बाद भी व्यक्ति किसी वस्तु को अपने साथ ले जा सकता है? आप अपनी सुई वापस ले लीजिए।

दुनीचंद की बात सुनकर गुरु नानक देव बोले , दुनीचंद । यदि तुम मरने के बाद एक छोटी सी सुई भी अपने साथ नहीं ले जा सकते तो इतनी सारी धन –संपत्ति को भला कैसे ले जा सकोगे?

गुरु नानक की बात सुनकर दुनीचंद की आँखें खुल गई ।उसे सच्ची सीख मिल गई थी।उसने उसी क्षण अपनी सारी धन संपत्ति को निर्धनों ,बेसहारों और अभावग्रस्त लोगों की सहायता में लगाने का निर्णय कर लिया।

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