योग से भीतर के सारे रोग, विकार, दोष, पाप, अधर्म, दुःख, विकार, तनाव सब खत्म हो जाते हैं और हम नर से नारायण, जीव से ब्रह्म, मानव से महामानव हो जाते हैं, सामान्य चेतना से दिव्य चेतना में प्रतिष्ठित हो जाते हैं। यह है योग की महिमा।

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    योग एवं ध्यान शिविर

    योग से भीतर के सारे रोग, विकार, दोष, पाप, अधर्म, दुःख, विकार, तनाव सब खत्म हो जाते हैं और हम नर से नारायण, जीव से ब्रह्म, मानव से महामानव हो जाते हैं, सामान्य चेतना से दिव्य चेतना में प्रतिष्ठित हो जाते हैं। यह है योग की महिमा।

    योग से हमारी सुप्त शक्ति, सुप्त ज्ञान, सुप्त संवेदनाएं, सुप्त सामर्थ्य, सुप्त ऐश्वर्य जागृत हो जाता है।

    योग का मूल सिद्धांत है सुख, शांति, संतुष्टि, तृप्ति, मुक्ति, जीवन मुक्ति, सारी संपत्ति, सारा सुख, सारा ऐश्वर्य, सारा ब्रह्मांड सब अपने भीतर धीरे-धीरे इस अनुभूति को आप खुद अनुभव करते जाएंगे।

    हनुमान चालीसा तो पढ़ना लेकिन साथ में हनुमान जी जैसा भी बनना है। बल के देवता हैं हनुमान जी, बुद्धि से भी वरिष्ठ, शरीर से भी वरिष्ठ और सेवा में तो देवता हैं, आदर्श हैं हमारे, ऐसा चरित्र जिस दिन देश का बन जाएगा उस दिन राम राज्य इस धरा पर दुबारा आ जाएगा।

    – परम पूज्य स्वामी रामदेव जी