यदि कोई आपसे पूछे कि अभिमन्यु कैसे मारा गया तो संभवतः आपके पास दो जवाब होंगे.

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    पहला :- अभिमन्यु को कौरव सेना के दर्जनों महारथियों ने घेरकर मार दिया।

    दूसरा :- अर्जुन से चक्रव्यूह तोड़ने की विद्या सुनते हुए सुभद्रा की नींद लग गई थी जिससे अभिमन्यु माँ के गर्भ में चक्रव्यूह तोड़ने का हुनर नहीं सुन पाया और चक्रव्यूह में फंसकर मारा गया।

    लेकिन इस सवाल का सही जवाब है. कौरवों की वो रणनीति जिसके तहत अर्जुन को युद्धक्षेत्र से जानबूझकर इतनी दूर ले जाया गया कि वो चाहते हुए भी अपने बेटे को बचाने हेतु समय पर नहीं पहुंच सके। अगर अर्जुन अभिमन्यु से दूर नहीं होते तो शायद कोई भी अभिमन्यु को मार नही पाता।

    फिलहाल युद्धक्षेत्र सज चुका है। अभिमन्यु (मोदी जी) को घेरने की पूरी तैयारी हो चुकी है।

    कौरवों के योद्धा (कांग्रेस, सपा, बसपा, ममता, लालु, वांमपंथी, आप, ओवेसी और पाकिस्तानी) इकट्ठे हो रहे हैं। अब बस आखिरी रणनीति के तहत अर्जुन को (तमाम हिन्दुऔ को जातियों में तोड़ कर) रणक्षेत्र से दूर करने की कोशिश जारी है।

    अब ये आप पर निर्भर है कि आप अभिमन्यु को अकेला छोड़कर उसके मरने के बाद पछताना चाहते है या उसके साथ खड़े रहकर उसे विजयी होते देखना।

    याद रखना आज आपके भविष्य के लिए लड़ रहा “मोदी” अभिमन्यु से कम भी नही है, वरना स्वार्थ में अच्छे अच्छों की ईमानदारी बिक जाती है

    जय हिन्द