मोदी सरकार में 4 करोड़ से ज्यादा बेरोजगार

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मोदी सरकरा भले ही अपने विकास की गाथा हर मंच से बखान करते नही थकते हो लेकिन सच तो ये है कि मोदी सरकार नें चार करोड़ लोगों को बेरोजगार कर दिया है। मोदी सरकार के इस कारनामें से एक विशेष वर्ग को बड़ा झटका लगा है। पूरा विपक्ष आज बेरोजगार है, उसे कोई काम नही मिल रहा है। साजिश करने की जी तोड़ कोशिश के बावजूद उसको असफलता ही असफलता हाथ लगा है। इलेक्शन लड़ने तक के लिए पैसे नही बचा है। चार-चार कारों को लेकर घुमने वाले मोहल्ले के गमछा छाप नेता जी आजकल ई-रिक्शा से ही काम चला ले रहे है। बेरोजगारी-बेरोजगारी-बेरोजगारी।

ताजा मामला दिल्ली का है, जहाँ पर दिल्ली पुलिस नें 6 भटके हुए नौजवान को आतंकी समझ पकड़ लिया। इतने भटके हुए कि उनसे कहा जाय कि एनआरसी प्रुव करो तो वो भी नही कर सकते। भटके हुए नौजवान जो कि आने वाले त्योहारों के मध्यनजर पूरे देश में फुलझड़ी तथा पटाखे जलाकर धमाका करने की तैयारी में लगा था। अब उन जाहिलों को कौन समझाय कि ये कोई मनमोहन के सरकार नही है। ये मोदी सरकार है जो कि चाईना और पाकिस्तान के घर में घुसकर मारता है।

पुलिस ने बताया है कि 6 जाहिलों के जमात में से 2 तो हाल नही में अपने ननिहाल पाकिस्तान से पटाखा बनाने और जलाने का डिप्लोमा करके लौटा था। ननिहाल वालों नें उसे दिल्ली में जाकर पटाखे बनाने का अप्रेंटिंस करने के लिए भेजा था। पटाखा इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि अगर बम के बारे में बताया तो यू-ट्यूब विडियों को बैन कर सकता है। खैर समझदार को ईशारा ही काफी है। आप समझ ही गये होंगे।

अब हम आपको बताने जा रहे है कि आखिर कैसे मोदी सरकार में लोग बेरोजगारी बढ़ने लगी है। कल्पना कीजिए कि अगर ये शांतिदूत अपने मकसद में कामयाब हो जाते। कहने का मतलब है अप्रेंटिस करने में। एक पटाखा फोड़ने में अगर कामयाब होता तो देश की क्या हालत होती जैसा कि इन शांतिदूतों के द्वारा प्लान किया जा रहा था। लेकिन दिल्ली पुलिस नें उसके प्लान को नेस्तानाबुत कर दिया। यह भी कह सकते है कि बहुत सारे लोगों के लिए जो काम आने वाले थे उससे छिन लिया। कहते है न सामने से भोजन के थाली को खिच लेना। एक प्रेस कांफ्रेस करके ही दिल्ली पुलिस नें काम चला लिया।

सोचिये अगर पटाखे फूट जाते । फिर चारों तरफ चिख चिल्लाहट, चारों तरफ दौड़ती पुलिस की जिप्सी, सायरन से पूरा वातावरण में दहशत, घायलों को लेकर जाते एंबुलेंस, घायल एवं मृतक परिवारों का रोना बिलखना, अस्पताल के बाहर परिजनों का लगा तांता। अस्पताल में इधर उधर परिजनों को ढ़ुढ़ती आंखे, भीड़ को कवर करती मिडिया कैमरे, परिजनों को सात्वना देते देश के गिरगिर लोग, लाश पर रोटी सेकते राजनीतिक पार्टियाँ , न्यूज चैनल का चिख-चिखकर आरोप प्रत्यारोप। फिर जांच कमेटी या फिर सीबीआई से जांच करना की सिफारिश। 10 साल के लिए सीबीआई व्यवस्त।

इतने सारे लोग इतने सारे काम सब एक ही झटके में समाप्त कर दिया दिल्ली पुलिस नें। अब आप समझ ही गये होंगे की बेरोजगारी कैसे बढ़ती जा रही है। इसी तरह से करोड़ों लोगों को बेरोजगार बना दिया है मोदी सरकार ने चाहे वो कश्मीर के भटके नौजवान हो या फिर जवाहर लाल युनिवर्सिटी के पढ़े लिखे लिबरल लोग। बालिबुड के डालीबुड हो या फिर रिहाना या खलीफा। सबके सब बेरोजगार हो चुके है।

पाकिस्तान से डिप्लोमा करके आये भटके नौजवान है लेकिन यहाँ उनके का्म करने तक की छूट नही है। अब जिसनें जो सीखा है वही तो करेगा। खैर अब तो दिल्ली पुलिस ही बता सकती है कि 6 जाहिलों को किस-किस प्रकार से स्वागत किए जा रहा है। बिरयानी खिलायी जा रही है या कबाब।

मै दिल्ली पुलिस को यह कहकर आलोचना करता हूँ और उम्मीद करता हूँ कि ऐसे ही आलोचना करने की मौका आगे भी जारी रखियेगा। एक बात और जरा ठिक से स्वागत कीजिए, क्योंकि ननिहाल से जो आया है हालफिलहाल में ।

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