पेट कम करने के लिए योगासन

5 months ago Vatan Ki Awaz 1

योग भारत तथा दुनिया भर के लिए सबसे पौराणिक कथा प्राकृतिक इलाज है । योग अपनाने से प्राणी जीवन भर स्वस्थ रह सकता है । योग माने तो जीवन का ही आधार है । क्योंकि संसार मे जो भी घटना घटित होता है उसका संवध कही न कही योग  से है । प्राणी के जन्म मे सबसे बड़ा संयोग ही योग है ।

किस रोग मे करे कौन सा आसन ?

  1. क्या आप पेट की समस्या से जुझ रहे है , तो करे

 

उतानपादासन ,

योग चिकित्सा में बहुत से आसन है जो स्वास्थ्य की दृष्टि से अतिमहत्वपूर्ण है और जिन्हे हर प्रकार के लोग कर सकते हैं एवं सावधानियां भी कम रखनी पड़ती हैं। इन्ही आसनों में उतानपादासन भी एक महत्वपूर्ण आसन है। कमर दर्द, मोटापा और नितंब मजबूत बनाने के लिए इस आसन के अपने अलग महत्व हैं। यह आसन ध्रव के पिता उतानपाद को समर्पित है।

उतानपादासन करने की विधि

उतानपादासन करने के लिए निम्न क्रियाएँ अपनायें

  •  सबसे पहले एक समतल जगह पर पीठ के बल लेट जाएँ।
  •  अब दोनों हाथों को कमर के अगल-बगल में रखें और हथेलियां जमीन पर स्थिर रखें।
  •  श्वास लें और हाथों पर हल्का दबाव देते हुए दोनों पैरों को एक साथ ज़मीन से लगभग 60 डिग्री के कोण पर उठाएँ।
  •  ध्यान दें दोनों पैर एक साथ मिले हुए हों और पंजे सामने की तरफ तने हुए हों।
  •  इस अवस्था में 1 से 2 मिनट रूकें , अब मूल अवस्था में आयें।
  •  पैरों को ऊपर उठाते समय श्वास रोकें एवं मूल अवस्था में आते समय श्वास छोड़े। ऐसा 3 से 5 बार करें।
  •  उतानपादासन करते समय श्वास-प्रश्वास सामान्य रखें।

सावधानियां – अधिक कमर दर्द और रीढ़ की हड्डी में समस्या वाले योग्य योग गुरू की देख-रेख में करें।

यह विधि मूल उतानपादासन करने की विधि है लेकिन हम इसे गतिमय बनाते हैं ताकि उतानपादासन से अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इसे हम दो विधियों से गतिमय बना रहें हैं जिनका वर्णन निम्न है

♦ गतिमय उतानपादासन

उतानपादासन को गतिमय बनाने के लिए सबसे पहले जमीन पर पीठ के बल लेट जाएँ। हथेलियां अगल-बगल रखें। अब श्वास लेते हुए बाएँ पैर को इतना ऊँचा उठायें कि समकोण बन जाये। इस स्थिती मे कुछ देर रूके और मूल अवस्था में श्वास छोड़ते हुए वापिस आ जायें। बाएँ पैर से यह क्रिया 4 से 5 बार करें। अब यही पोजिशन दाएँ पैर से करें। 4 से 5 बार दाएँ पैर से करने के बाद मूल अवस्था में वापिस आ जायें। अब यही समकोण दोनों पैरों को एक साथ उठाते हूए बनाऐ और श्वास-प्रश्वास सामान्य चलने दें। इस प्रकार गतिमय उतानपादासन पूर्ण होता है।

गतिमय उतानपादासन के लाभ

  •  उदर प्रदेश, पाचन तंत्र, मेरूदण्ड, पीठ के निचले हिस्से की पेशियों को मजबूत बनाता है। लोच व लचक पैदा करता है।
  •  चर्बी दूर कर जंघाएँ एवं नितम्ब सुडोल बनाता है।

♦ दूसरी विधि

पीठ के बल जमीन पर लेट जाएँ। पहले दायाँ पैर सीधा उठाएँ और उसे दाएँ तरफ से बाएँ लाते हुए वृत बनाएँ। यह क्रिया 10 से 15 बार दोहराएं। अब उसी पैर से बाएँ से दाएँ तरफ घुमाएँ। एक चक्र पूरा करने के बाद यही क्रिया बाएँ पैर से पूर्ण करे। पहले वृत बनाकर घुमायें और उसके पश्चात मूल अवस्था में वापिस आ जायें। इस दौरान अपने श्वास-प्रश्वास को सामान्य चलने दें।

उतानपदासन के स्वास्थ्य लाभ

  •  उतानपादासन पेट की चर्बी को कम करता है।
  •  यह आसन कब्ज को दूर करता है।
  •  पाचन क्रिया को दूरस्त करता है।
  •  इस आसन को करने से पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। यह महिलाओं के मासिक चक्र की समस्या को भी ठिक करता है।
  •  अगर नाभि अपनी जगह से हट गई है तो उतानपादासन से अच्छा कोई आसन नहीं है। अपनी जगह से हटी हुई नाभि को ठिक करने के लिए आप उतानपादासन करें।
  •  यह आसन मेरूदण्ड और उसकी कोशिकाओं के लिए भी फायदेमंद है।
  •  पैरों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए उतानपादासन लाभदायक है।
  •  नितंब और जंघाओं की मांसपेशियां मजबूत बनती है।
  •  इसके निरंतर अभ्यास करने से गर्दन और कंधे की मांसपेशियां मजबूत बनती है और तनाव भी दूर होता है।
  •  निरंतर अभ्यास से चिंता और तनाव से मूक्ति मिलती है।

उतानपादासन करते समय सावधानियाँ

  •  गर्भवती महिलाएं इस आसन को योग्य योग शिक्षक की देख-रेख में करें, अन्यथा न करें।
  •  पेट या कमर की कोई सर्जरी हुई हो तो इसे न करें।
  •  अधिक कमर दर्द वाले भी योग शिक्षक का परामर्श लें।
  •  साइटिका रोग से पीड़ित व्यक्ति न करें।

पवनमुक्तासन

पवनमुक्तासन की विधि। How to do Pawanmuktasana

यहां पर पवनमुक्तासन को सरल तरीक़े से कैसे किया जाए उसके बारे में बताया गया है। यही नहीं आप बताये गए विधि का अनुसरण करते हुए इस आसन का ज़्यदा से ज़्यदा फायदा उठा सकते हैं।

तरीका

  • सबसे पहले आप पीठ के बल लेट जाएं।
  • दोनों पैरों को फैलाएं और इनके बीच की दुरी को कम करें।
  • अब दोनों पांव उठाएं घुटने मोड़ें।
  • घुटनों को बांहों से घेर लें।
  • सांस छोड़े, घुटनों को दबाते हुए छाती की ओर लाएं। सिर उठाएं तथा घुटनों को छाती के निकट लाएं जिससे ठोड़ी घुटनों को स्पर्श करने लगे।
  • जहाँ’ तक सम्भव हो सके इस मुद्रा को मेन्टेन करें।
  • फिर सांस लेते हुए पैरों को जमीन पर लेकर आएं।
  • यह एक चक्र हुआ।
  • इस तरह से आप 3 से 5 चक्र करें।

सुप्त पवनमुक्तासन कैसे करें ? How to do Supta Pawanmuktasana

    • सबसे पहले आप पीठ के बल लेट जाएं।
    • दोनों पैरों को फैलाएं और इनके बीच की दुरी को कम करें।
    • अब दायां पांव उठाएं और घुटने से मोड़ें।
    • दोनों बांहें आपस बांधकर घुटने पकड़ लें।
    • सांस छोड़ें और रोक लें।
    • धीरे-धीरे घुटने दबाएं और उन्हें छाती तक लाएं।
    • सांस छोड़ते हुए सिर उठाएं और घुटनों को छाती के करीब लाएं ताकि नाक घुटनों से छूने लगे।
    • जब तक संभव हो, इस मुद्रा को मेन्टेन करें।
    • सांस छोड़ते हुए सिर तथा पांवों को वापस जमीन पर ले आएं।
    • यही क्रिया बाएं पांव के साथ भी दोहराएं।
    • यह एक चक्र हुआ।
    • इस तरह से आप 3 से 5 चक्र करें।
    • यह एकपाद पवनमुक्तासन या सुप्त पवनमुक्तासन कहलाएगी।

वज्रासन

योग और रोग दोनों का छत्तीस का आंकड़ा है । दोनों एक दूसरे के दुश्मन है जो लोग नित्य योग करते है उन्हें कभी रोग नही होता। चाहें वजन कम करना हो या फिर कोई पुराना रोग दूर भागना हो योग से अच्छा उपाय कोई नही है । बड़ी से बड़ी बीमारी हमारी छोटी छोटी लापरवाही के कारण ही जन्म लेती है। क्या आप भी परेशान है कब्ज की समस्या से ? या फिर हो रहे है बढ़ते हुए वजन का शिकार , मासिक धर्म मे अनियमितता ऐसे अनेक परेशानियों को खत्म करने का एकमात्र इलाज है वज्रासन। आइए जानते है कैसे और कब किया जाता है वज्रासन और इससे होने वाले अनेक लाभ क्या है ।

वज्रासन एक प्रकार का योग आसन है जिसका आप नित्य अभ्यास कर सकते है । ज्यादार आसान , किसी भी प्रकार के भोजन को करने के पहले किए जाते है लेकिन यह एक ऐसा आसान है जो भोजन के पश्चात किया जाता है।

वज्रासन करने की विधी – वज्रासन करने के लिए एक समतल ओर साफ जगह पर बैठ जाये । इसे भोजन के कम से कम 15 से 20 मिनट के बाद किया जा सकता है । अब आप अपने घुटनों को जमीन पर टिकाकर अपने पैरो पर बैठ जाए। इस तरह के आपके हिप्स आपके पैरो के ऊपर हो ।आपके पैर के अंघुठे मिले हुए और आपके दोनों हाथ अपने जांघो पर रखे। इसी मुद्रा में अपने शरीर को एकदम आरामदायक महसूस कराए लेकिन रीढ़ की हड्डी को एकदम सीधा रखे और ग़हरी सांस ले। यह प्रक्रिया कम से कम पांच मिनट तक कि जानी चाहिए।

 

वज्रासन से होने वाले फायदे – वज्रासन का सबसे बड़ा फायदा है वह आपकी पाचन शक्ति को बढ़ाएगा ओर भोजन पचाने में शरीर की मदद करेगा। जिससे कि एसिडिटी, अपच ओर कब्ज जैसी बीमारियां आपको छू भी नही पाएंगी। इतना ही नही यह आपकी आँखों की दृष्टि के लिए भी बहुत ही फायदेमंद होता है।
इस आसन में बैठने से आपकी रीढ़ की हड्डी को भी मजबूती प्रदान होती है और आपके पोस्चर में सुधार आता है ।

सांस पर नियंत्रण होने के कारण इस आसन से उच्च रक्तचाप वालो को काफी फायदा मिलता है और उनका मन स्थिर रहता है। मन मे ठहराव आने के कारण चंचलता समाप्त होती है जिससे कि बुद्धि बाद जाती है और याददाश्त मजबूत होने लगती है ।

भोजन के बाद यह आसन इसलिए किया जाता है कि खाया हुआ खाना अच्छी तरह पच सके जिससे की अतिरिक्त वजन से छुटकारा मिल जाये। इस आसन में बैठने के कारण जो भी अतिरिक्त चर्बी होती है वह काम होती हुई चलती है । नितम्ब , कमर सुंदर पर आकर्षक दिखाई देने लगते है ।

योगमुद्रासन

पद्मासन लगाकर दोनों हाथों को पीठ के पीछे ले जायें। बायें हाथ से दाहिने हाथ की कलाई पकड़ें। दोनों हाथों को खींचकर कमर तथा रीढ़ के मिलन स्थान पर ले जायें। अब रेचक करके कुम्भक करें। श्वास को रोककर शरीर को आगे झुकाकर भूमि पर टेक दें। फिर धीरे-धीरे सिर को उठाकर शरीर को पुनः सीधा कर दें और पूरक करें।

प्रारंभ में यह आसन कठिन लगे तो सुखासन या सिद्धासन में बैठकर करें। पूर्ण लाभ तो पद्मासन में बैठकर करने से ही होता है। पाचनतन्त्र के अंगों की स्थानभ्रष्टता ठीक करने के लिए यदि यह आसन करते हों तो केवल पाँच-दस सेकण्ड तक ही करेंएक बैठक में तीन से पाँच बार।

सामान्यतः यह आसन तीन मिनट तक करना चाहिए। आध्यात्मिक उद्देश्य से योगमुद्रासन करते हों तो समय की अवधि रूचि और शक्ति के अनुसार बढ़ायें।

योगमुद्रासन के लाभ

योगमुद्रासन भली प्रकार सिद्ध होता है तब कुण्डलिनि शक्ति जागृत होती है। पेट की गैस की बीमारी दूर होती है। पेट एवं आँतों की सब शिकायतें दूर होती हैं। कलेजा, फेफड़े, आदि यथा स्थान रहते हैं। हृदय मजबूत बनता है।

रक्त के विकार दूर होते हैं। कुष्ठ और यौनविकार नष्ट होते हैं। पेट बड़ा हो तो अन्दर दब जाता है। शरीर मजबूत बनता है। मानसिक शक्ति बढ़ती है।

योगमुद्रासन से उदरपटल सशक्त बनता है। पेट के अंगों को अपने स्थान टिके रहने में सहायता मिलती  है। नाड़ीतंत्र और खास करके कमर के नाड़ी मण्डल को बल मिलता है।

इस आसन में ,सामन्यतः जहाँ एड़ियाँ लगती हैं वहाँ कब्ज के अंग होते हैं। उन पर दबाव पड़ने से आँतों  में उत्तेजना आती है। पुराना कब्ज दूर होता है। अंगों की स्थानभ्रष्टता के कारण होने वाला कब्ज भी, अंग अपने स्थान में पुनः यथावत स्थित हो जाने से नष्ट हो जाता है। धातु की दुर्बलता में योगमुद्रासन खूब लाभदायक है।

भुजंगासन

“भुजंग” शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है। भुजंग का अर्थ सर्प होता है, इसलिए भुजंग-आसन को “सर्प आसन” भी कहा जाता है। भुजंगासन को अंग्रेजी में Cobra Pose कहा जाता है। सभी आसनों में से भुजंग आसन एक प्रसिद्ध आसन है। पीठ के दर्द के रोगीयों के लिए यह आसान अत्यंत गुणकारी होता है। सम्पूर्ण व्यायाम कहे जाने वाले सूर्यनमस्कार (Suryanamaskar) में भुजंगासन सातवे क्रम पर आता है। यह लाभदायी आसन प्रति दिन करने से करने से कंधे, हाथ, कुहनियाँ, पीठ, किडनी, और लीवर को मज़बूती मिलती है, तथा अनेक रोगों से मुक्ति मिलती है।

भुजंग आसन कैसे करें – How To Do Bhujangasana (Cobra Pose)

bhujangasana vidhi

  • भुजंग आसन करने के लिए सर्वप्रथम किसी स्वच्छ और साफ हवादार जगह का चयन कर लें। उसके बाद आसन (चटाई) बिछा कर पेट के बल लेट जाएं।
  • फिर दोनों परों को अच्छी तरह से लंबा कर के फैला दें। और ठोड़ी (chin) ज़मीन पर लगा दें। दोनों कुहनिया (Elbows) दोनों तरफ की पसलियों से सटी हुयी रख कर, दोनों हाथों की हथेलियाँ ज़मीन पर लगा दें। (Note- याद रहे की आप के हाथों के पंजे सीधे होने चाहिए ओर ज़मीन की और होने चाहिए, तथा दोनों कुहनिया (Elbows) सीधी आकाश की और मुड़ी होनी चाहिए )।
  • भुजंग आसन करते वक्त इस बात का खास ध्यान रखे की दोनों हाथों के पंजे, हमेशा दोनों कंधों के ठीक नीचे (ज़मीन पर) लगे होने चाहिए।
  • अब अपनें सिर को ज़मीन से लगा दें। और फिर अपनी दोनों आँखें बंद कर के सांस शरीर के अंदर भरते हुए धीरे धीरे ठोड़ी (chin) को ऊपर उठाएँ, उसके बाद गर्दन को ऊपर आकाश की तरफ उठाएँ। फिर अपनी छाती को धीरे धीरे ऊपर उठाएँ। और उसके बाद अपने पेट के भाग को धीरे धीरे ऊपर उठा लें।
  • अब आगे, गर्दन को ऊपर की ओर ले जाते हुए पीठ को पीछे की ओर जुकाना है (कमान की तरह )। ऊपर उठनें के लिए शरीर से ज़ोर लगाएं, हाथों पर हो सके उतना कम बल लगाएं। ध्यान में रखें की दोनों पैरों के अग्र भाग को ज़मीन पर लगा कर सामान्य गति से शरीर के अग्र भाग को ऊपर उठने का प्रयत्न करना है।

cobra pose yoga in hindi

  • भुजंग आसन की इस मुद्रा में आने के बाद अपनी दोनों आँखें खोलें और श्वसन गति सामान्य बनाए रखें (सांस सामान्य गति से अंदर लें तथा बाहर छोड़ें)। और पहली बार में इस आसन मुद्रा को बीस सेकंड से तीस सेकंड तक बनाए रखिए। फिर ऊपर उठाए शरीर को नीचे की ओर ले जाना शुरू कर दीजिये।
  • शुरुआत में पेट के बल लैट कर जिस मुद्रा से आसन शुरू किया था, उस मुद्रा में लौट जाने के बाद अपनें दोनों हाथों पर अपना सिर टीका कर या ज़मीन से अपना सिर लगा कर उतनी ही देर विश्राम करें, जितनी देर तक भुजंग आसन किया हों।
  • भुजंगासन कर लेने के बाद शवासन कर के थकान मिटा लेनी चाहिए।

भुजंगासन समय सीमा  – Time Duration Of Bhujangasana

  • भुजंग आसन शुरुआत में तीन बार तक करना चाहिए। (यानी कि बीस सेकंड से तीस सेकंड का एक सेट और ऐसे तीन सेट) अभ्यास बढ़ जाने के बाद धीरे धीरे इसकी संख्या पाँच, सात, ग्यारह या फिर इक्कीस बार तक बढ़ाई जा सकती है।
  • भुजंग आसन मुद्रा में अधिकतम बीस से तीस सेकंड तक रुकना चाहिए, उसके बाद फिर से ज़मीन की और प्रस्थान करना चाहिए, इस समय सीमा को अभ्यास के साथ बढ़ाया जा सकता है, परंतु शरीर को अधिक कष्ट पड़ें उतनी देर भुजंग आसन में रुकना हानिकारक हो सकता है।

भुजंग आसन के फायदे  – Benefits of Bhujangasana

  • भुजंग आसन के नित्य प्रयोग से महिलाओं को मासिक चक्र से जुड़ी समस्याओं में लाभ मिलता है। तथा प्रजनन सम्बन्धी रोग भी दूर हो जाते हैं।
  • भुजंग आसन करने से पीठ की हड्डी मज़बूत हो जाती है। कब्ज़ रोग दूर होता है, गैस की समस्या मिट जाती है। पाचन तंत्र मजबूत होता है और पेट में जमी हुई अतिरिक्त चर्बी (Weight Loss) भी दूर हो जाती है। इस व्यायाम को प्रति दिन सुबह में करने से रीड़ की हड्डी लचकदार बन जाती है।
  • भुजंग आसन दमें के रोगी को लाभदायी होता है। गले में होने वाले अन्य सामान्य रोग भी भुजंग आसन के प्रयोग से दूर हो जाते हैं।
  • भुजंगासन करने से किडनी और लीवर स्वस्थ रहते हैं। और अगर किसी व्यक्ति को किडनी, लीवर या उदर से संबन्धित रोग हुए हों, तो भुजंग आसन करने से वह रोग दूर हो जाते हैं। यह आसन शरीर की रोग प्रतिकारक शक्ति भी बढ़ता है।
  • दिन भर बैठ कर काम काज करने वाले व्यक्तियों को पेट और कमर के आसपास अतिरिक्त चर्बी बढ़ जाती है। ऐसे व्यक्ति अगर प्रति दिन भुजंग आसन करें तो तेजी से चर्बी कम की जा सकतीहै।
  • भुजंगआसन करने से श्वसन क्रिया (breathing pattern) बेहतर हो जाती है।

 

भुजंगासन में सावधानी – Precautions/Side-Effects  For Bhujang Aasana

  • भुजंग आसन करने वाले व्यक्ति को अपनें शरीर का अग्र भाग ज़मीन से उठाते समय और नीचे ले आते समय यह सुनिश्चित कर लेना अति आवश्यक है कि उनके दोनों हाथों की हथेलियों पर एक समान बल पड़े।
  • भुजंग आसन करते वक्त अपनें दोनों कंधों को सिकुडना नहीं है। हो सके उतना कंधों को फैलाये रखना है। और रिलैक्स रखना है। यह आसन करते वक्त मुख मुद्रा प्रसन्न रखें। आसन का आनंद अनुभव करें और शरीर की मर्यादा से अत्याधिक बल प्रयोग ना करें।
  • गंभीर प्रकार के कमर दर्द के रोगी (serious back injury / serious back pain) को भुजंग आसन डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए। पेट दर्द की तकलीफ रहती हों तो यह आसन नहीं करना चाहिए। झटका दे कर पीठ को और सिर को पीछे की और नहीं मोड़ना चाहिए।
  • सारणगाठ (hernia) के रोगी को भुजंग आसन बिल्कुल “नहीं” करना चाहिए। अल्सर के रोगी भी भुजंग आसन ना करें। गर्भवती महिलाएं भुजंग आसन का प्रयोग ना करें। महिलाएं मासिक चक्र के दौरान भी यह आसन अभ्यास ना करें। शरीर पर किसी भी प्रकार की शल्यचिकित्सा कराई हों तो यह आसन डॉक्टर की सलाह के बाद ही करें।

मत्स्यासन

मत्स्यासन योग क्या है?

मत्स्यासन संस्कृत शब्द मत्स्य से निकला है जिसका अर्थ होता है मछली। मत्स्यासन योग पीठ के बल लेटकर किया जाने वाला आसन है। इसमें शरीर का आकार मछली जैसा प्रतीत होता है इसलिए इसको Fish Yoga Pose के नाम से भी जाना जाता है। अगर इसको सही विधि के साथ किया जाए इसके स्वस्थ लाभ अनेक हैं। मत्स्यासन योग गले एवं थाइरोइड के लिए एक उत्तम योगाभ्यास है। यह आपके पेट की चर्बी को कम करता है और कमर दर्द से राहत दिलाता है। इसके करते समय कुछ सावधानी का भी ध्यान रखनी चाहिए जो नीचे बताया गया है।

यहाँ पर बहुत सरल रूप में विधि बताया जा रहा है जिसके मदद से इसको आप अपने घर पर भी कर सकते हैं।

तरीका

  • साधक सबसे पहले पद्मासन में बैठ जाएं।
  • धीरे-धीरे पीछे झुकें और पूरी तरह पीठ पर लेट जाएं।
  • बाएं पांव को दाएं हाथ से पकड़े और दाएं पांव को बाएं हाथ से पकड़ें।
  • कोहनियों को जमीन पर टिका रहने दें।
  • घुटने जमीन से सटे होनी चाहिए
  • अब आप सांस लेते हुए अपने सिर को पीछे की ओर लेकर जाएं।
  • या हाथ के सहायता से भी आप अपने सिर को पीछे गर्दन की ओर कर सकते हैं।
  • धीरे धीरे सांस लें और धीरे धीरे सांस छोड़े।
  • इस अवस्था को अपने हिसाब से मेन्टेन करें।
  • फिर लंबा सांस छोड़ते हुए अपने आरम्भिक अवस्था में आएं।
  • यह एक चक्र हुआ।
  • इस तरह से आप 3 से 5 चक्र करें।

 

मत्स्यासन योग के लाभ

मत्स्यासन योग के कुछ महत्वपूर्ण लाभ का यहां जिक्र किया जा रहा है।

  1. मत्स्यासन पेट की चर्बी के लिए: इस आसन के अभ्यास से आप पेट की चर्बी को कम कर सकते हैं। लेकिन पेट की चर्बी कम करने के लिए इस आसन को बहुत देर तक धारण करनी की जरुरत है ताकि पेट में खिंचाव आये। और साथ ही साथ यह भी जरूरी है की इस आसन को कुछ महीनों तक करते रहा जाए।
  2. थाइरोइड का इलाज मत्स्यासन से: थाइरोइड के इलाज के लिए मत्स्यासन रामबाण का काम करता है। इस आसन से गर्दन वाले हिस्से में पाए जाने वाले थाइरोइड और पारा थाइरोइड का अच्छी तरह से मालिश हो जाता है जिससे थायरोक्सिन हॉर्मोन के स्राव में मदद मिलती है। यही थायरोक्सिन हॉर्मोन थाइरोइड के इलाज के लिए एक अहम भूमिका निभाता है।
  3. मत्स्यासन कब्ज के लिए: यह आसन पेट की मालिश करता है तथा कब्ज के उपचार में लाभदायक है।
  4. फेफड़े रोगों के लिए मत्स्यासन: इस आसन के अभ्यास से छाती चौड़ी होती है जी फेफड़ों एवं सांस के रोगों में लाभकारी है।
  5. रीढ़ लचीला के लिए मत्स्यासन: यह पीठ के ऊपरी हिस्से की पेशियों को आराम देता है तथा रीढ़ को लचीला बनाता है।
  6. घुटने के दर्द के लिए मत्स्यासन: घुटनों तथा पीठ के दर्द में यह उपयोगी है।
  7. यौन विकारों से बचाए मत्स्यासन: विभिन्न प्रकार के यौन विकारों से बचने में यह महिलाओं की सहायता करता है।
  8. गर्भाशय की समस्याओं के लिए मत्स्यासन: यह गर्भाशय की समस्याओं में महिलाओं के लिए यह उत्तम आसन है।
  9. मधुमेह के लिए मत्स्यासन: यह पैंक्रियास का मालिश करता है और इन्सुलिन के स्राव में मददगार है।
  10. कमर दर्द के लिए मत्स्यासन: यह आपके रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और कमर दर्द से आपको निजात दिलाता है।

 

मत्स्यासन की सावधानी

  • पेप्टिक अल्सर में इस आसन को करने से बचना चाहिए।
  • हर्निया वालों को यह आसन नहीं करनी चाहिए।
  • रीढ़ के किसी गंभीर रोग से ग्रस्त व्यक्तियों यह आसन नहीं करनी चाहिए।
  • अगर घुटने में ज़्यदा दर्द हो तो इस आसन को करने से बचें।

 

Dr. Anjana Somvanshi (Yoga, Therapist & Naturopathy doctor)

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