नगर परिषद की नाक के आगे बन रहे हैं अवैध कॉम्प्लेक्स… भीलवाड़ा में सैंकडों अवैध कॉम्प्लेक्स हैं

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भीलवाड़ा/नगर परिषद के आस पास बने कॉम्प्लेक्स तो नजर आए लेकिन ठीक सामने बनते कॉम्प्लेक्स नगर परिषद के जिम्मेदारों ने क्यूं अनदेखे कर दिए ?परिषद क्षेत्र में अब अवैध कॉम्प्लेक्स को लेकर जो सक्रियता दिखाई जा रही है,वो पहले दिखती तो शायद गली मोहल्लों में पैर धरने की जगह भी बची रहती और बेतहाशा अवैध निर्माण भी नहीं होते।

पिछले दिनो ही मैंने परिषद आयुक्त द्वारा अवैध निर्माण की फाईलें तलब किए जाने और इन पर सख्त कार्रवाई होने का उल्लेख रामा रामा में …..’नगर परिषद में अब नारायण नारायण’ से किया था।
इस क्रम में सिंधुनगर सहित शहर के कई कॉम्प्लेक्स नगर परिषद के टार्गेट पर आए हैं, जिनकी फाईलें तलब करवा नक्शे, निर्माण स्वीकृति और मौके पर हुए वास्तविक निर्माण को लेकर नोटिस दिए गए हैं। वहीं इससे दस गुना ज्यादा अवैध व्यावसायिक निर्माण को नोटिस देने की तैयारी है। शहर के मुख्य बाजारों और गली मोहल्लों में ऐसे सैंकड़ों अवैध निर्माणों को कैसे और किसने मैनेज किया?जिनके धन ,धर्म गए उनका क्या होगा?

अकेले सिंधुनगर में दर्जनों अवैध निर्माण की शिकायतें मिलने पर राज्य सरकार ने सख्ती दिखाई तो परिषद का अमला भी तत्परता दिखाने लगा। पिछले महीने ही आयुक्त ने ऐसे संदिग्ध निर्माणों की फाईलें मांग ली थी।एक कॉम्पलेक्स को 6 माह के लिए सीज करने की कल हुई कार्रवाई में चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि पांच साल में कॉम्प्लेक्स मालिक को नगर परिषद ने नोटिस भिजवाए पर उसने “नोटिस”ही नहीं लाया।तब ये सीजिंग की कार्रवाई हुई है।ऐसी कार्रवाई सेवा सदन रोड पर भी हुई थी लेकिन अब वहां कॉम्प्लेक्स मौजूद है।

समझा जा रहा है कि अगले वर्ष नगर परिषद चुनावों से पहले भीलवाड़ा में परिषद के घपले घोटालों की कलई पूरी तरह खुलेगी और कुछ नुमाइंदों पर गाज भी गिरेगी.
परिषद में बोर्ड बनाने की ये कांग्रेस की पैंतरेबाजी है कि सांप मर रहा है और लाठी भी सलामत है।

ऐसी भी चर्चा है कि आयुक्त मीणा को भीलवाड़ा परिषद में बार बार आयुक्त बदलने के झंझट से रामबाण दवाई के तौर पर लगाया गया है। इसके बेहतर परिणाम आने वाले दिनों में सामने आएंगे।
–अशोक जैन,स्वतंत्र पत्रकार 9414211451

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